कोरेक्स, बीकासूल व जेलुसिल बनानेवाली बहुराष्ट्रीय दवा कंपनी फाइजर का नाम शायद आप सबको पता ही होगा। इसके कुछ अन्य ब्रांड हैं डोलोनेक्स और मिनीप्रेस-एक्सएल। ये सभी ब्रांड बाजार से ज्यादा रफ्तार से बढ़ रहे हैं। कंपनी का वित्त वर्ष दिसंबर से नवंबर तक का है। नवंबर 2010 में खत्म वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में कंपनी की आय 29 फीसदी बढ़कर 203 करोड़ रुपए से 261 करोड़ रुपए हो गई है, जबकि इस दौरान दवा उद्योगऔरऔर भी

एल्गी इक्विपमेन्ट्स (बीएसई – 522074, एनएसई – ELGIEQUIP) कम्प्रेसर व इससे जुड़े अन्य उपकरण बनाती है जो माइनिंग, ट्रान्सपोर्ट, ओटोमोबाइल, फार्मा, बिजली व ऑयल जैसे तमाम उद्योगों में इस्तेमाल होते हैं। घरेलू बाज़ार के साथ कंपनी अमेरिका, यूरोप व मध्य-पूर्व समेत दुनिया के तमाम देशों को निर्यात करती है। वह विदेश में अधिग्रहण के ज़रिए भी विस्तार की कोशिश में लगी है। पिछले वित्त वर्ष में उसने फ्रांस की कम्प्रेसर कंपनी बेलेयर का अधिग्रहण किया है। इससेऔरऔर भी

अमित जी ने नए साल की शुरुआत में हमें टीसीआई फाइनेंस (बीएसई – 501242, एनएसई – TCIFINANCE) में निवेश की संस्तुति भेजी थी। 4 जनवरी को इसे हमने उनकी तरफ से इसे इसी कॉलम में पेश भी किया। तब यह शेयर 47.95 रुपए पर था। अब शुक्रवार, 14 जनवरी को 72.30 रुपए के नए शिखर पर बंद हुआ है। महज नौ सत्रों में 50.78 फीसदी की शानदार बढ़त!!! अमित जी! वाकई आपने हमें ही नहीं, अर्थकाम केऔरऔर भी

सिन्टेक्स इंडस्ट्रीज का नाम है। पानी की टंकी की बात सोचें तो सिन्टेक्स का ही नाम आता है। हालांकि वह टंकी के अलावा भी बहुत कुछ बनाती है। रेटिंग एजेंसी केयर ने चार महीने पहले सितंबर में फंडामेंडल्स के आधार पर उसे पांच में चार का ग्रेड दिया था, यानी मूलभूत रूप से बहुत मजबूत कंपनी। शेयर (बीएसई – 502742, एनएसई – SINTEX) तब 362 रुपए पर था और केयर ने कहा था कि उसका अंतर्निहित मूल्यऔरऔर भी

अमारा राजा बैटरीज में इधर एक हलचल शुरू हुई है। यह एक्साइड के बाद देश के बैटरी बाजार की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है। अच्छे प्रबंधन और रणनीति वाली कंपनी है। शेयर न बहुत ऊपर है, न बहुत नीचे। ऐसे में इसे पकड़ लेने में कोई हर्ज नहीं है। कल अमारा राजा बैटरीज (बीएसई – 500008, एनएसई – AMARAJABAT) के शेयरों का वोल्यूम बीएसई में अचानक पिछले हफ्ते के औसत 74 हजार से बढ़कर 5.62 लाख परऔरऔर भी

जब आंधी-तूफान का अंदेशा हो तो हल्की चीजें हाथ में नहीं रखनी चाहिए। बाजार का माहौल ऐसा ही बन रहा है। लेकिन यह माहौल बड़ी कंपनियों को सस्ते में पकड़ने का अच्छा मौका भी पेश कर रहा है। ऐसी ही एक कंपनी है सीमेंस। ऊर्जा, औद्योगिक इंजीनियरिंग और हेल्थकेयर क्षेत्र में सक्रिय बहुराष्ट्रीय कंपनी। पैदाइश जर्मनी की। कंपनी का शेयर नए साल में गिरता ही जा रहा है। 3 जनवरी को 828.90 रुपए पर था। कल बंदऔरऔर भी

स्पैंको लिमिटेड टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनी है। वह सरकार, बिजली, ट्रांसपोर्ट व टेलिकॉम सेक्टर को अपनी सेवाएं देती है। साथ ही बीपीओ सेवाओं में भी सक्रिय है। पिछले ही हफ्ते शुक्रवार 7 जनवरी को उसे महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी, महावितरण से नागपुर जिले में फीडर सेपरेशन स्कीम के लिए करीब 66 करोड़ रुपए का नया अनुबंध मिला है। लेकिन इस खबर को सकारात्मक रूप से लेने के बजाय उसका शेयर कल सोमवार को बीएसई (कोडऔरऔर भी

ऑयल इंडिया सरकार की नवरत्न कंपनी है। कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के धंधे में है। सितंबर 2009 में इसका आईपीओ 1050 रुपए प्रति शेयर मूल्य पर आया था। शुक्रवार को यह बीएसई (कोड – 533106) में 3.18 फीसदी की गिरावट के साथ 1328.70 रुपए और एनएसई (कोड – OIL) में 2.32 फीसदी गिरकर 1336.30 रुपए पर बंद हुआ है। हो सकता है आज भी गिरावट आए। लेकिन कंपनी के कामकाज और भावी योजनाओं को देखें तोऔरऔर भी

हमने आईडीएफसी (इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फाइनेंस कंपनी) की चर्चा इसी कॉलम में 31 मई 2010 को थी। तब 25 मई को 141.35 रुपए की तलहटी पकड़ने के बाद यह 28 मई को 154.15 रुपए तक पहुंचा था। हमने उस वक्त कहा था कि यह शेयर अगले कुछ महीनों में 180 रुपए तक जाने की सामर्थ्य रखता है। वाकई यह शेयर बढ़ते-बढ़ते 8 नवंबर को 218.20 रुपए तक जा पहुंचा। लेकिन अब फिर गिरते-गिरते 168.25 रुपए पर आ चुकाऔरऔर भी

जुआरी इंडस्ट्रीज का शेयर कल बीएसई (कोड – 500780) में 2.50 फीसदी गिरकर 689.05 रुपए और एनएसई (कोड – ZUARIAGRO) में 2.78 फीसदी गिरकर 689.90 रुपए पर बंद हुआ है। कंपनी का ठीक पिछले बारह महीनों का ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) 52.48 रुपए है और इस हिसाब से उसका शेयर 13.13 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। शेयर की बुक वैल्यू 400.14 रुपए है। बी ग्रुप का शेयर है। कल बीएसई में इसमें औसत सेऔरऔर भी