सिन्टेक्स: ब्रांड भी, ग्रेड भी, फिर भी!

सिन्टेक्स इंडस्ट्रीज का नाम है। पानी की टंकी की बात सोचें तो सिन्टेक्स का ही नाम आता है। हालांकि वह टंकी के अलावा भी बहुत कुछ बनाती है। रेटिंग एजेंसी केयर ने चार महीने पहले सितंबर में फंडामेंडल्स के आधार पर उसे पांच में चार का ग्रेड दिया था, यानी मूलभूत रूप से बहुत मजबूत कंपनी। शेयर (बीएसई – 502742, एनएसई – SINTEX) तब 362 रुपए पर था और केयर ने कहा था कि उसका अंतर्निहित मूल्य 415 रुपए है।

कंपनी ने इसके बाद 28 अक्टूबर से अपने शेयर को दो भागों में बांटकर उसका अंकित मूल्य 2 से 1 रुपए कर दिया है। इसलिए तब का मूल्य 181 रुपए और केयर का मूल्यांकन 207.5 रुपए निकलता है। लेकिन यह शेयर अब घटकर 167.25 रुपए पर आ चुका है। वह भी तब, जब कल ही कंपनी ने दिसंबर तिमाही के काफी अच्छे नतीजे घोषित किए हैं। पिछले साल की तीसरी तिमाही की तुलना में उसकी समेकित बिक्री 42 फीसदी बढ़कर 1183.8 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 56 फीसदी बढ़कर 112.8 करोड़ रुपए हो गया है।

पिछले वित्त वर्ष 2009-10 में कंपनी ने 3281.64 करोड़ रुपए की आय पर 328.99 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया था, जबकि चालू वित्त वर्ष 2010-11 में दिसंबर तक के नौ महीनों में ही वह 3019.7 करोड़ रुपए की आय पर 291.8 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमा चुकी है। इन नौ महीने में पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि की तुलना में उसकी बिक्री 36 फीसदी और शुद्ध लाभ 53 फीसदी बढ़ा है। जाहिर है कि पूरे वित्त वर्ष में भी कंपनी ऐसी ही शानदार बढ़त हासिल करेगी।

केयर के मूल्यांकन को आधार बनाएं तो यह शेयर अब 215 रुपए तक तो जाना ही चाहिए। यानी, अभी के स्तर से इसमें चार महीने के भीतर 28.55 फीसदी रिटर्न देने की संभावना है। वैसे भी इसका 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 228.80 रुपए (5 अक्टूबर 2010) और न्यूनतम स्तर 158.40 रुपए (11 जनवरी 2011) रहा है। हम देख सकते हैं कि यह शेयर अपनी तलहटी के काफी करीब है। कंपनी का ठीक पिछले बारह महीने का ईपीएस (प्रति शेयर शुद्ध लाभ) 12.15 रुपए है और वो अभी 13.76 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। शेयर की बुक वैल्यू 75.80 रुपए है।

सिन्टेक्स का गठन 1931 में टेक्सटाइल कंपनी के रूप में हुआ था। 1975 में वह स्टोरेज टैंक बनाने के धंधे में भी उतर गई और देखते-देखते बाजार की अग्रणी कंपनी बन गई। प्लास्टिक डिवीजन से उसकी आय का करीब 87 फीसदी हिस्सा आता है, जबकि टेक्सटाइल से करीब 10 फीसदी। उसका टेक्सटाइल डिवीजन कलोल (गुजरात) में है, जबकि प्लास्टिक डिवीजन के 16 संयंत्र देश भर में फैले हैं। कंपनी ने पिछले चार सालों में विदेश में छह अधिग्रहण किए हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपने पैर फैला लिए हैं।

कंपनी अपने धंधे को तीन सेगमेंट में रखती है – बिल्डिंग मैटीरियल, कस्टम मोल्डिंग और टेक्सटाइल्स। चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीने में उसका बिल्डिंग मैटीरियल का धंधा 53 फीसदी, कस्टम मोल्डिंग का 25 फीसदी और टेक्सटाइल्स का 29 फीसदी बढ़ा है। कंपनी टेक्सटाइल डिवीजन में बने अपने हाई-एंड स्ट्रक्चर्ड डाईड यार्न फैब्रिक अरमानी, ह्यूगो बॉस, डीजल, बरबेरी जैसे नामी ब्रांडों को सप्लाई करती है।

कंपनी की इक्विटी 27.09 करोड़ रुपए है। इसका 34.59 फीसदी प्रवर्तकों के पास है। एफआईआई के पास भी कंपनी के 34.61 फीसदी शेयर हैं, जबकि डीआईआई ने इसके 11.67 फीसदी शेयर ले रखे हैं। कंपनी के प्रबंध निदेशक अमित पटेल है जिनका दावा है कि कंपनी सारी संभावनाओं को मूर्त रूप देने में कामयाब रहेगी। कंपनी के 11 सदस्यीय निदेशक बोर्ड में छह स्वतंत्र निदेशक हैं।

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