एम्फैसिस बड़ी ठसक वाली कंपनी है। नाम तक सीधे नहीं लिखती। खुद को MphasiS लिखती है। लेकिन नाम से क्या! हमें तो काम से मतलब है। मुख्यतः बीपीओ (बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग) और रिमोट इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट या इंफ्रास्ट्रक्चर टेक्नोलॉजी आउटसोर्सिंग (आईटीओ) सेवाओं सक्रिय है। दुनिया के 14 देशों में 29 ऑफिस हैं। धंधा अच्छा करती है। लेकिन उसका वक्त अभी अच्छा नहीं चल रहा है। पिछले कुछ महीनों से एडेलवाइस जैसी देशी और सीएलएसए जैसी विदेशी निवेश फर्मेंऔरऔर भी

वित्त मंत्री और रिजर्व बैंक के गवर्नर दो ऐसी शख्सियतें हैं जिनका एक-एक बयान शेयर बाजार को प्रभावित कर सकता है। सावधानी हटी दुर्घटना घटी। जरा-सा गलत बयान दे दिया तो बाजार में पलीता लग सकता है। लेकिन पहले पी चिदंबरम और अब प्रणव मुखर्जी कह चुके हैं कि उन्हें बाजार का उठना-गिरना नहीं समझ में आता। पिछले हफ्ते 3 मई को करीब सवा तीन बजे शाम सालाना मौद्रिक नीति पेश किए जाने के बाद रिजर्व बैंकऔरऔर भी

ऐसा कैसे हो सकता है कि एक दिन कोई शेयर 52 हफ्ते का शिखर बनाए और अगले ही दिन 20 फीसदी के निचले सर्किट का शिकार हो जाए? लेकिन सुमीत इंडस्ट्रीज के साथ ऐसा ही हुआ है। बुधवार, 11 मई को उसने वित्त वर्ष 2010-11 और मार्च 2011 की तिमाही के नतीजे घोषित किए जो वाकई काफी जानदार-शानदार हैं। शेयर ऐसा उछला कि 42.30 रुपए पर पहुंच गया। लेकिन अगले ही दिन यानी, कल यह बीएसई (कोडऔरऔर भी

ओम्निटेक इनफोसोल्यूशंस का 10 रुपए अंकित मूल्य का शेयर कल बीएसई (कोड – 532882) में 8.47 फीसदी उछल कर 152.40 रुपए और एनएसई में 7.92 फीसदी उछल कर 151.30 रुपए पर बंद हुआ है। इसके बावजूद सस्ता है क्योंकि उसका टीटीएम (ठीक पिछले बारह महीनों का) ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) 39.32 रुपए है और इस तरह वो केवल 3.88 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। असल में इधर एफआईआई अपना ध्यान बड़ी आईटी कंपनियों सेऔरऔर भी

हरियाणा के प्रभावशाली और राजनीतिक रूप से दबंग जिंदल परिवार की कंपनी है जेएसडब्ल्यू एनर्जी। इस्पात इंडस्ट्रीज का अधिग्रहण कुछ महीने पहले इसी समूह की कंपनी जेएसडब्ल्यू स्टील ने किया है। सज्जन जिंदल इसके प्रबंध निदेशक हैं। कंपनी का इरादा बिजली बनाने, भेजने और बांटने से लेकर उसकी ट्रेडिंग तक करने का है। 1994 में बनने के सोलह सालों के भीतर ही वह कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान व हिमाचल प्रदेश तक फैल चुकी है। 2000 से बिजली बनानेऔरऔर भी

केईसी इंटरनेशनल आरपीजी समूह की करीब 65 साल पुरानी इंजीनियरिंग व कंस्ट्रक्शन कंपनी है। सचमुच इंटरनेशनल है क्योंकि दुनिया के 45 से ज्यादा देशों से उसे इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े ठेके बराबर मिलते रहते हैं। उसके पास उभी 7800 करोड़ रुपए के ऑर्डर हैं जो साल भर पहले की अपेक्षा 42 फीसदी ज्यादा है। कंपनी ने सितंबर 2010 में ही अमेरिका की एसएई टावर्स होल्डिंग्स का अधिग्रहण किया है जिसके चलते उसका लाभ मार्जिन बढ़ गया है। अधिग्रहणऔरऔर भी

किसी चीज का दाम जस का तस रहे तो उसी स्तर पर वह महंगी से सस्ती कैसे हो सकती है? लेकिन शेयर बाजार में ऐसा खूब होता है। जैसे, पिरामल ग्लास के शेयर का औसत भाव इस साल जनवरी में 89.95, फरवरी में 93.50, मार्च में 112.90 और अप्रैल में 129..40 रुपए था। लेकिन यह महंगा था क्योंकि इसका पी/ई अनुपात इस दौरान क्रमशः 42.81, 44.50, 53.73 और 61.58 था। यह गणना हर माह ठीक पिछले बारहऔरऔर भी

जीवन की यात्रा और उसमें हर मोड़ पर सीखना एक अटूट श्रृंखला है। हम नहीं रहते तो हमारे बाल-बच्चे इसे आगे बढ़ाते हैं। कड़ी कभी कहीं टूटती। जब तक यह सृष्टि है, तब तक यह टूटेगी भी नहीं। लेकिन अगर अगली यात्रा तक पिछली यात्रा के सबक याद न रखे जाएं तो अंत में हम खाली हाथ रह जाते हैं। बर्तन के पेंदे में छेद हो तो उसमें डाला गया सारा तरल निकलता जाता है। इसलिए मित्रों!औरऔर भी

मुथूत फाइनेंस ने अपने 1.95 लाख से ज्यादा शेयधारकों को लिस्टिंग के पहले ही दिन रुला डाला। 175 रुपए पर जारी हुआ उसका शेयर सुबह 180 रुपए पर लिस्ट होने के थोड़ी देर बाद करीब 13 फीसदी बढ़कर 198 रुपए पर पहुंच गया। लेकिन बाद में फटाफट गिरकर 161.50 रुपए तक चला गया। दिन भर गहमागहमी रही। बीएसई में इसके 2,26,76,312 शेयरों और एनएसई में 6,06,13,615 शेयरों में कारोबार हुआ। बीएसई में पता नहीं कि इसमें सेऔरऔर भी

अर्थव्यवस्था का दूरगामी नजरिया अच्छा हो और कंपनी अच्छी हो तो बाजार का पिटना बड़ा अच्छा होता है क्योंकि इस चक्कर में अच्छी कंपनियों के शेयर सस्ते में मिल जाते हैं। किसी सेक्टर का डाउनग्रेड किया जाना भी कभी-कभी अच्छा होता है क्योंकि सेक्टर के बीच भी अच्छी कंपनियां होती हैं। यहां संदर्भ है बैंकिंग सेक्टर का है और कंपनी है इंडियन बैंक। इंडियन बैंक का शेयर पिछले गुरुवार से इस गुरुवार के बीच 12.45 फीसदी काऔरऔर भी