हर देशवासी के लिए जानना ज़रूरी है कि सरकार जो प्रत्यक्ष व परोक्ष टैक्स लेती है और उसके ऊपर देश के नाम पर जो कर्ज लेती है, उसका वो करती क्या है? हर साल बजट में इसकी जानकारी होती है। लेकिन एक तो हम उस पर ध्यान नहीं देते। दूसरे वो इतनी उलझी होती है कि बड़े-बड़े जानकारों के लिए उसे तार-तार कर समझना मुश्किल है। फिर भी हम कोशिश करें तो उलझे तारों को सुलझा सकते हैं। मगर एक पहलू पर किसी का ध्यान नहीं जाता कि हर साल सरकार टैक्स, नॉन-टैक्स, विनिवेश व अन्य पूंजीगत प्राप्तियों से अलग बजट का जो करीब 32% हिस्सा उधार से हासिल करती है, उसकी फंडिंग कौन करता है? अभी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और एसआईआर की धांधली के खिलाफ देश भर के युवा जो आंदोलन कर रहे हैं, उस पर सत्ताधारी दल और सरकारी पक्ष से बराबर सवाल उठाए जा रहे हैं कि इस आंदोलन की फंडिंग कौन कर रहा है तो हमारे लिए यह जानना भी ज़रूरी है कि देश पर अपने मनमाने फैसले थोपनेवाली सरकार की फंडिंग कौन कर रहा है? लोकतंत्र में लोक को यह जानने का हक है और सरकार की भी जिम्मेदारी व जवाबदेही बनती है कि वो इस सवाल का खुलकर जवाब दे। वैसे, पिछले 10-12 साल में सरकार की फंडिंग का तरीका जिस तरह बदला गया है, उसे जानकर आप हैरत में पड़ जाएंगे। अब सोमवार का व्योम…
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