कर्ज अवाम की फांस, सरकार की ऐश!
2026-10-05
विकास के सरकारी शोर में देश बड़ी सांसत में फंस गया है। एक तरफ आमजन को जिंदगी चलाने के लिए घर का सोना तक गिरवी रखकर लोन लेना पड़ रहा है। दूसरी तरफ पिछले बारह सालों में भारत सरकार पर चढ़ा आंतरिक ऋण ₹54.04 लाख करोड़ का 3.52 गुना ₹190.44 लाख करोड़ हो चुका है, जबकि हमारा नॉमिनल जीडीपी 3.05 गुना ही हुआ है। लेकिन व्यक्ति और देश पर चढ़े ऋण को एक तराजू पर रखना ठीकऔरऔर भी
