नरेंद्र दामोदर दास मोदी दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुके भारत के लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बन गए हैं। उनका दावा है कि भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे और 2047 तक उसे विकसित देश बना देंगे। उनकी बातों और सरकारी आंकड़ों पर तमाम देशी-विदेशी अर्थशास्त्रियों से लेकर आईएमएफ, विश्व बैंक, वैश्विक निवेश बैंकर, रेटिंग एजेंसियां और विदेशी सरकारें तक या तो यकीन रखती हैं या ‘मौनं स्वीकृति लक्षणं’ के अंदाज़ में चुप हैं।औरऔर भी

चढ़ जा बेटा सूली पर, भला करेंगे राम। खुद मौज करते हुए राम का वास्ता देकर दूसरों को सूली पर चढ़ाने की यह सलाह ठीक नहीं। वो भी तब, जब इसे देश के सर्वोच्च पद पर बैठा कोई शख्स दे रहा हो। लेकिन यह सच है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ठीक चुनावों के बीच टीवी पर इंटरव्यू में लोगों को शेयर बाज़ार में निवेश करने की सलाह देते हुए कहा कि 4 जून को नतीजों केऔरऔर भी

जो भी नई सरकार बने, उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए कि अर्थव्यवस्था को झांकी से स्थिति से उबार कर मजबूत धरातल पर खड़ा किया जाए ताकि समाज में विसंगति व असंतुलन खत्म किया जा सके। असल में मोदी सरकार ने झांकी बनाने के चक्कर में पिछले दस साल में अर्थव्यवस्था को विचित्र दुष्चक्र में फंसा दिया है। कहने को अर्थव्यवस्था तेज़ गति से बढ़ रही है। अभी दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। चार-पांच साल मेंऔरऔर भी

लोकसभा नतीजों से साफ है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सारा तिलिस्म टूट गया है और केंद्र में बैसाखी पर टिकी सरकार बनने जा रही है। भाजपा को अपने दम 240 सीट ही मिली है। टीडीपी के 16 और जेडी-यू के 12 सांसदों को साथ लेकर ही नरेंद्र मोदी फिर से सरकार बना पाएंगे। अगर ये दोनों दल अपने 28 सांसदों को लेकर 234 सीटों वाले इंडिया गठबंधन के पाले में चले गए तो वो भी जोड़तोड़औरऔर भी