माना जाता है कि शेयर बाज़ार स्टॉक्स की प्राइस डिस्कवरी या मूल्य की खोज का आदर्श माध्यम है। लेकिन इस बाज़ार में ‘खेला’ होता रहता है। अपने यहां ठीक आम चुनावों के बाद दो दिन में जो ‘खेला’ हुआ, उसका भेद शायद कभी न खुले। लेकिन मामला इतना आसान भी नहीं, जैसा केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल बताते हैं कि एक्जिट पोल आने के बाद विदेशी निवेशकों ने ऊंचे भाव पर शेयर खरीदे, जबकि भारतीय निवेशकों ने ज्यादाऔरऔर भी

वित्त वर्ष 2021-22 और 2022-23 के बीच के जिन दो सालों में निफ्टी रीयल एस्टेट सूचकांक 200% बढ़ा है, उसी दौरान कंस्टक्शन क्षेत्र के मजदूरों की औसत मजदूरी घट गई। इसमें भी महिला मजदूरों की हालत ज्यादा खराब रही। इस क्षेत्र में लगभग 80% अकुशल मजदूर काम करते हैं, जिनके लिए राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम मजदूरी निर्धारित है। लेकिन मशहूर संस्था सीईआईसी के डेटा के मुताबिक 15 से 20 राज्यों में यह न्यूनतम मजदूरी नहीं मिलती। जाहिरऔरऔर भी

जीडीपी बढ़ रहा है, टैक्स संग्रह बढ़ रहा है, शेयर बाज़ार बढ़ता जा रहा है। लेकिन औसत भारतीय की समृद्धि कितनी बढ़ रही है? खुद सरकार के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2014-15 में हमारी प्रति व्यक्ति आय या शुद्ध राष्ट्रीय आय ₹72,805 हुआ करती थी। यह वित्त वर्ष 2023-24 के अंत तक ₹1,06,744 तक पहुंची है। इसकी सालाना चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) मात्र 3.90% निकलती है। इसमें भी मुद्रास्फीति बराबर कम आंकी जाती है तो असल वृद्धिऔरऔर भी

कॉरपोरेट क्षेत्र की दिग्गज हस्तियों, शेयर बाज़ार के उस्तादों और जमकर कमानेवाले एचएनआई के साथ उच्च-मध्यवर्ग के बहुतेरे लोगों को लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार तीसरे कार्यकाल में ही भारत को विकसित देश बना सकती है। लेकिन सवाल उठता है कि विकसित देश बनने का पैमाना क्या होगा? जीडीपी का तेज़ विकास, टैक्स संग्रह का जमकर बढ़ना, शेयर बाज़ार का उछाल, कॉरपोरेट क्षेत्र के मुनाफे का बढ़ना, देशी-विदेशी पूंजी निवेश का प्रवाह या कुछऔरऔर भी

कॉरपोरेट क्षेत्र की आशा, उम्मीद और प्रगति से ही शेयर बाज़ार चमकता है। उसने उम्मीद जताई है कि मोदी की सरकार में बनी नई एनडीए सरकार अधिक साहसी आर्थिक सुधारों पर अमल करेगी। उसने यह तो साफ नहीं किया कि ये साहसी सुधार क्या हो सकते हैं। लेकिन इस उम्मीद के साथ प्रधानमंत्री के विकसित भारत के नारे को ज़रूर नत्थी कर दिया है। ये वही कॉरपोरेट क्षेत्र है जिसने इलेक्टोरल बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशऔरऔर भी