इस समय ऊपर से नीचे तक देश का फ्रॉडकाल चल रहा है। जीडीपी डेटा में डिफ्लेटर के खेल और पीएमओ से जुड़े होने के नाम पर किरण पटेल, संजय शेरपुरिया व कश्मीरा पवार जैसे ठगों की करतूतों को अलग रखकर भी देखें तो वित्तीय जगत तक में फ्रॉड बढ़ता जा रहा है। लोकलसर्कल्स के एक ताजा सर्वे में 47% शहरी भारतीयों ने बताया कि वे खुद या उनके परिवार का कोई सदस्य पिछले तीन सालों में वित्तीयऔरऔर भी

देश इस वक्त विषमता के विचित्र दौर से गुजर रहा है। एक तरफ जीडीपी बढ़ रहा है। दूसरी तरफ तीन-चौथाई से ज्यादा घरों की आय घटती जा रही है। लेकिन साथ ही भारतीयों का एक तबका विदेश में जाकर मौज-मस्ती करने पर जमकर खर्च कर रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसी मार्च में खत्म वित्त वर्ष 2023-24 में विदेश में भारतीयों का खर्च अब तक के सर्वोच्च स्तर 31.7 अरब डॉलरऔरऔर भी

राष्ट्रीय औसत यह है कि भारतीय लोग अपनी आय का 30% हिस्सा हारी-बीमारी या निवेश व आकस्मिक खर्चों के लिए बचाकर रखते हैं। लेकिन निम्न व मध्यम आय वाले घरों में ऐसी बचत 20% से भी कम रहती है। यह हकीकत रेडसीयर के सर्वे से सामने आई है। ऐसे परिवारों की अधिकांश आय खाने-पीने, इलाज और घर के किराए वगैरह पर खर्च हो जाती है। मध्यम वर्ग के 81%, उभरते मध्य-वर्ग के 78% और निम्न-आय वर्ग केऔरऔर भी

पिछले पांच साल में देश का जीडीपी 24.33% बढ़ा है, वो भी मुद्रास्फीति के असर को घटाने के बाद। हमारा जीडीपी वित्त वर्ष 2018-19 में ₹139.81 लाख करोड़ था। सरकार के ताजा अनुमान के मुताबिक 2023-24 में यह ₹173.82 लाख करोड़ रहा है। लेकिन हम सभी जानते हैं कि देश के 81.35 करोड़ लोग (करीब 58% आबादी) अब भी महीने में सरकार के मुफ्त पांच किलो राशन पर गुजारा कर रहे हैं। हाल ही में आए सलाहकारऔरऔर भी