वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश के कॉरपोरेट क्षेत्र से कह रही हैं कि हमें बताओ कि ज्यादा निवेश करने के लिए आप हमसे क्या चाहते हैं। जब सितंबर 2019 में उन्होंने कॉरपोरेट क्षेत्र को टैक्स में जबरदस्त रियायत देते हुए 1.45 लाख करोड़ रुपए का तोहफा दिया था, तभी से भारतीय उद्योग से क्षमता बढ़ाने और निवेश करने के लिए रिरिया रही हैं। लेकिन उनको नहीं दिख रहा कि जब देश में ग्राहक त्रस्त हों और निर्यात के बाज़ार सुस्त पड़े हों तो उद्योग जगत क्षमता क्यों बढ़ाएगा। उधर ऐसा ही रोना सत्तारूढ़ भाजपा के मातृ-पितृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता राम माधव अमेरिका में जाकर रोते हैं कि भारत ने ईरान व रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद कर दिया, पहले से कहीं ज्यादा 18% टैरिफ देने को तैयार हो गया। इसके अलावा भारत और क्या कर सकता था! सत्ता केंद्र में बैठे सीता और राम के इन बयानों ने साफ कर दिया है कि भारत की अर्थव्यवस्था आज अंदर और बाहर, दोनों ही मोर्चों पर कहीं फंस गई है। देश के किसान खाद के दाम बढ़ने पर बिलबिला रहे हैं। उनका दुख कभी भी आंदोलन बनकर फूट सकता है। पश्चिम एशिया में करीब डेढ़ महीने से जारी युद्ध ने देश के लिए ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। हर कोई बोलने लगा है कि भारत डेढ़ साल से जिस ‘गोल्डीलॉक्स’ स्थिति में था, वो अब टूटकर बदतर होती जा रही है और दुर्दिन आ रहे हैं। अब सोमवार का व्योम…
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