खासजन फूलते गए, आमजन खस्ताहाल
मुठ्ठी भर खासजन सरकारी कृपा और दलाली से फलते-फूलते ही जा रहे हैं, जबकि करोड़ों आमजनों की हालत पतली होती जा रही है। पिछले कुछ सालों में एक तरफ उन पर ऋण का बोझ बढ़ता गया। दूसरी तरफ उनकी खपत घटती चली गई। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2021-22 में देश के आम परिवारों पर कुल ₹9 लाख करोड़ का ऋण था। यह बोझ साल भर बाद ही 2022-23 में 76% बढ़कर ₹15.8 लाखऔरऔर भी
अर्थव्यवस्था के प्रबंधन पर नहीं है विश्वास
विश्व अर्थव्यवस्था ठहरी पड़ी है तो निर्यात की मांग नहीं निकल रही। देश के भीतर निजी खपत ठीक से नहीं बढ़ रही। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर-दिसंबर 2023 की तिमाही में यह 1.8% बढ़ी है, जबकि अप्रैल से दिसंबर 2023 तक के नौ महीनों में 3.5% बढ़ी है। ऐसे में दिसंबर तिमाही में जीडीपी की 8.4% बढ़त को लेकर कोई चाटेगा क्या? निजी क्षेत्र इसलिए भी नया निवेश नहीं कर रहा क्योंकि उसके पास मांग से कहींऔरऔर भी
कॉरपोरेट ने कमाया, लेकिन लगाया नहीं
सरकार अपना बेहताशा खर्च पूरा करने के लिए आमजन से वसूली के साथ-साथ जमकर ऋण लेती रही है। पर, कॉरपोरेट क्षेत्र को रियायत व प्रोत्साहन यह कहकर देती रही है कि इससे वो नया निवेश करने को प्रेरित होगा, जिससे रोज़गार के नए-नए अवसर पैदा होंगे। ज़मीनी हकीकत क्या है? सितंबर 2022 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रोत्साहनों की चर्चा के बाद निजी क्षेत्र की तुलना हनुमान से करते हुए कहा था – का चुप साधिऔरऔर भी
सावधान, टैक्स का ट्रेन्ड बेहद खतरनाक!
सरकार की कोशिश है कि खर्च करनेवाले व्यक्तियों से जीएसटी और एक्साइज़ व कस्टम ड्यूटी के साथ ही अधिकतम इनकम टैक्स वसूल लिया जाए, जबकि लाभ कमानेवाली कंपनियों को टैक्स में ज्यादा से ज्यादा छूट दी जाए। इसके ऊपर कॉरपोरेट क्षेत्र को मिल रही ऋण-माफी और पीएलआई जैसी स्कीमों में दी जा रही सब्सिडी अलग से। लाखों करोड़ रुपए के ऐसे ‘प्रोत्साहन’ से आखिर क्या सचमुच देश का कोई भला हो रहा है, क्षमता विस्तार और नएऔरऔर भी
व्यक्ति दे रहे कंपनियों से ज्यादा टैक्स!
इनकम टैक्स भले ही प्रत्यक्ष टैक्स हो। लेकिन इसे साल में ₹2.5 लाख से ज्यादा कमानेवाला हर देशवासी देता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक हमारी प्रति व्यक्ति आय वित्त वर्ष 2022-23 में ₹99,404 तक पहुंची थी और अब ताज़ा अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष 2023-24 में ₹1,06,134 रह सकती है। इसके ढाई गुना से ज्यादा कमाकर इनकम टैक्स देने वालों की संख्या 7.78 करोड़ हो चुकी है, जिसमें से 7.65 करोड़ बाकायदा टैक्स रिटर्न दाखिल करते हैं।औरऔर भी





