सोमवार को निफ्टी 3.25% उछला तो मंगलवार को 5.93% टूट गया। एक्जिट-पोल और हवाबाज़ी से बनाई गई बनावटी तेज़ी अंत में फायदे से कहीं ज्यादा नुकसान करा गई। सोमवार को जो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) घबराकर शॉर्ट-कवरिग को मज़बूर हुए थे, हो सकता है कि उन्होंने मंगलवार को शॉर्ट-सेलिंग से सारे नुकसान की भरपाई कर ली हो। लेकिन जो रिटेल ट्रेडर व निवेशक हवाबाज़ी में फंस गए, वे अपने नुकसान की भरपाई नहीं कर सकते। इसीलिए कहाऔरऔर भी

लोकसभा चुनावों के नतीजे दोपहर बाद तक साफ हो जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह दोनों ने दावा किया है कि आज हमारा शेयर बाज़ार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच जाएगा। लेकिन अगर मोदीराज वापस नहीं आया और इंडिया गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिल गया तो बाज़ार धड़ाम भी हो सकता है। याद कीजिए, बीस साल पहले 2004 में कमोबेश ऐसी ही स्थिति थी। जीडीपी लगभग 8% बढ़ा था। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की लोकप्रियता चरमऔरऔर भी

एक्ज़िट पोल को सही मानें तो मोदी सरकार फिर सत्ता में आने जा रही है। वैसे, असली नतीजे कल मतगणना के बाद ही सामने आएंगे। जो भी हो, मोदी सरकार रहे या इंडिया गठबंधन की सरकार आ जाए, देश की अर्थव्यवस्था को कोई फर्क नहीं पड़नेवाला। आर्थिक उदारवाद का जो सिलसिला 33 साल पहले 1991 में शुरू हुआ था, वह बदस्तूर जारी रहेगा। हां, इतना ज़रूर होगा कि मोदी सरकार अर्थव्यवस्था को लेकर जो झांकी बनाती रहीऔरऔर भी

ब्रोकरेज़ फर्म देशी हो या विदेशी, उनका समान धंधा है कि वे उन्हीं स्टॉक्स को खरीदने की सिफारिश करती हैं जो पहले से काफी चढ़ चुके होते हैं। कुछ ही दिन पहले जानी-मानी विदेशी ब्रोकरेज़ फर्म सीएलएसए ने 54 स्टॉक्स की लिस्ट जारी की है जिसे उसने मोदी स्टॉक्स का नाम दिया है। इनमें लार्सन एंड टुब्रो, एनटीपीसी, एनएचपीसी, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन, ओएनजीसी, इंद्रप्रस्थ गैस, महानगर गैस, भारती एयरटेल, इंडस टावर्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज़, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक,औरऔर भी

देश की अर्थव्यवस्था हो, चुनाव हों या शेयर बाज़ार, सत्ता और धंधे के सूत्र ने इन सबको जोड़ रखा है। सत्ता की आहट से ये सभी हिल जाते हैं। कल 18वीं लोकसभा के अंतिम चरण का मतदान है। फिर शाम को एक्जिट-पोल और मंगलवार को अंतिम नतीजे। इससे पहले आज आखिरी ट्रेडिंग दिन है तो शेयर बाज़ार में सनसनी मची हुई है। अभी दो दिन पहले अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी एस एंड पी ग्लोबल ने दस साल बादऔरऔर भी