देश की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी इनफोसिस ने उम्मीद से बेहतर नतीजे पेश किए तो दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितता के बावजूद निवेशकों के चेहरे खिल गए और उसके शेयर एकबारगी 6.17 फीसदी उछल गए। लेकिन इसके साथ ही थोड़ी बिकवाली भी शुरू हो गई तो शेयर बाद में थोड़ा नीचे आ गए। इनफोसिस ने चालू वित्त वर्ष 2011-12 की सितंबर तिमाही में समेकित रूप से 8099 करोड़ रुपए की आय पर 1906 करोड़ रुपएऔरऔर भी

एक मोटी-सी बात गांठ बांध लें कि शेयरों का धंधा दुनिया का इकलौता धंधा है जो अकेले किया जाता है। दूसरों के चक्कर में पड़े तो समझिए कि खटिया खड़ी, बिस्तरा गोल। आप इस बात की भी तस्दीक करेंगे कि चैनलों या अखबारों में दी गई एनालिस्टों की दस में आठ सलाहें गलत होती हैं। इसलिए हमारी कोशिश आपको ‘चुटकी भर टिप्स, मुठ्ठी भर मंत्र’ देने की है ताकि आप अपने फैसले खुद कर सकें। हमारी सलाहऔरऔर भी

आप से यह साझा करने में मुझे कोई हर्ज नहीं लगता कि मैं भी एक छोटा निवेशक हूं। साल 2005 से निवेश करके सीखने-समझने की कोशिश में लगा हूं। हमेशा समझदारी से, पढ़-लिखकर निवेश करता हूं। खुद के फैसले पर कमाया है। औरों के कहने पर घाटा खाया है। पहले बड़े नामों पर भरोसा करता था। अब नहीं करता क्योंकि दूध का जला छाछ भी फूंककर पीता है। इकनॉमिक्स टाइम्स की इनवेस्टर गाइड में पहले एक इनसाइडरऔरऔर भी

ला ओपाला क्रॉकरी और कांच व क्रिस्टल बनी चीजों का ऐसा ब्रांड है जिसकी कोई काट बड़ी मुश्किल है। यह ब्रांड क्वालिटी का पर्याय है। इसके सामान महंगे जरूर हैं। लेकिन देश का बढ़ता मध्य वर्ग इन्हें लपककर खरीदता है। इसे बनानेवाली कंपनी है ला ओपला आरजी लिमिटेड। नाम से लगता है जैसे फ्रांस की कोई कंपनी हो। लेकिन यह पूरी तरह देशी कंपनी है। सुशील झुनझुनवाला इसके प्रबंध निदेशक हैं जो राकेश झुनझुनवाला के रिश्तेदार नहींऔरऔर भी

एचडीएफसी बैंक धंधे के मामले में देश में निजी क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा बैंक है। आईसीआईसीआई बैंक इससे ऊपर है। लेकिन बाजार पूंजीकरण में यह उससे भी ऊपर है। एचडीएफसी बैंक का बाजार पूंजीकरण इस वक्त 1,02,320 करोड़ रुपए है, वहीं आईसीआईसीआई बैंक का 89,762 करोड़ रुपए। दोनों ही बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी में शामिल शेयर हैं। लेकिन जिस तरह अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों की कुदृष्टि हमारे बैंकिंग सेक्टर पर पड़ी है, उसमें हो सकता हैऔरऔर भी

अमेरिका की प्राइवेट इक्विटी फर्म कार्लाइल ग्रुप ने प्रमुख ब्रोकरेज व वित्तीय सेवा कंपनी इंडिया इनफोलाइन (आईआईएफएल) की 9 फीसदी इक्विटी खरीद ली है। यह खरीद उसने सीधे शेयर बाजार से की है। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंजों को यह जानकारी दी है। लेकिन उसने यह नहीं बताया है कि कार्लाइल ने किस भाव पर उसके शेयर खरीदे हैं। वैसे, बुधवार के बंद भाव 71.20 रुपए पर इंडिया इनफोलाइन की 9 फीसदी इक्विटी का मूल्य करीब 185 करोड़औरऔर भी

जलजला आया हो तो मकान-दुकान छोड़कर कहीं खुले में चले जाना चाहिए और तेज-आंधी तूफान में कोई सुरक्षित कोना पकड़कर बैठ जाना चाहिए। हमारे शेयर बाजार में अभी कोई जलजला तो नहीं आया है। लेकिन सारा कुछ उड़ाकर ले जाती आंधियां जरूर चल रही हैं। तमाम शेयर अपने न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुके हैं या पहुंचते जा रहे हैं। ऐसे में एक सुरक्षित कोना नजर आ रहा है डॉ. रेड्डीज लैब का। धंधा है तो जोखिम तोऔरऔर भी

शेयर बाजार में चल रही मायूसी ने पूंजी बाजार के दूसरे हिस्से प्राइमरी बाजार में भी सन्नाटा फैला दिया है। चालू वित्त वर्ष 2011-12 में पूंजी बाजार में उतरनेवाली 22 कंपनियों ने आईपीओ (शुरुआती पब्लिक ऑफर) लाने का इरादा ही छोड़ दिया है। इसके साथ ही बड़े निवेशकों को सीधे खींचनेवाले क्यूआईपी (क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट) बाजार में भी एकदम मुर्दनी छा गई है। ब्रोकरेज फर्म एसएमसी ग्लोबल सिक्यूरिटीज के ताजा अध्ययन के मुताबिक जिन 22 कंपनियों नेऔरऔर भी

शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एससीआई), भारत सरकार की महारत्न कंपनी। साल भर पहले उसका शेयर दहाड़ रहा था। 6 अक्टूबर 2010 को 202.50 रुपए की अट्टालिका पर था। लेकिन बीते हफ्ते शुक्रवार 30 सितंबर से सरकारी खबरों के आधार पर उसे ऐसा धुना जा रहा है कि कल 3 अक्टूबर को वह 74.50 रुपए की घाटी में जा गिरा। पिछले एक महीने में इसे 91.60 रुपए से 18.66 फीसदी तोड़कर 74.50 रुपए तक ले आया गया है।औरऔर भी

एनसीएल इंडस्ट्रीज का नाम पहले नागार्जुन सीमेंट लिमिटेड हुआ करता था। पिछले 25 सालों से आंध्र प्रदेश में नागार्जुन ब्रांड का सीमेंट बेचती है। पिछले साल की जून तिमाही में 2.57 करोड़ रुपए का घाटा उठाया था। लेकिन इस साल की जून तिमाही में 16.95 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया है। इस बार उसकी बिक्री भी पूरे 84.08 फीसदी बढ़कर 122.14 करोड़ रुपए हो गई है। लेकिन इन नतीजों का खास असर अभी तक उसके शेयरोंऔरऔर भी