मान्यता, संस्कार या परंपरा – ये सब जड़त्व व यथास्थिति के पोषक हैं, जबकि शिक्षा से निकली वैज्ञानिक सोच गति का ईंधन है। जड़त्व और गति की तरह शिक्षा और संस्कार में भी निरंतर संघर्ष चलता रहता है जिसमें अंततः गति का जीतना ही जीवन है।और भीऔर भी

सारी दुनिया दौलत के पीछे भाग रही है। काम, काम, काम। भागमभाग। लगे रहो ताकि धन बराबर आता रहे। लेकिन इससे कहीं ज्यादा अहम है इसकी चिंता करना कि हम अपने घर-परिवार के साथ ज्यादा भावपूर्ण रागात्मक ज़िंदगी कैसे जी सकते हैं।और भीऔर भी

किसी के बिना किसी का भी काम नहीं रुकता। सबकी अपेक्षाकृत स्वतंत्र ज़िंदगी है, हिचकोले खा पटरी पर आ जाती है। ऐसे में किसी को जोड़ने का सही तरीका उसे जबरन खीचना नहीं, बल्कि वो जहां है, वहीं उसकी ज़िंदगी को और चमकाने का सूत्र दे देना है।और भीऔर भी

जीनव की कठिन शर्तें। मैराथन। जीने और जीतने की अदम्य चाहत। इसे हासिल करने में जो मददगार हो सकता है, लोग तो उसे ही देखेंगे, उसे ही पूछेंगे। हालांकि, हम सब एक-दूजे के लिए उपयोगी हैं। लेकिन इसे दिखाना और साबित भी करना पड़ता है।और भीऔर भी

ज़िंदगी का असली मूल्य महज गणनाओं में नहीं, बल्कि यह जानने व पता लगाने में है कि असली चीजें क्या हैं और कैसे काम करती हैं। दुनिया हमें धकेलती है हिसाब-किताब लगाने की तरफ। लेकिन असली चीजें हिसाब-किताब से बहुत परे होती हैं, बंधु!और भीऔर भी

आप बुद्धिमान हैं, अच्छी बात है। लेकिन क्या आप बुद्धिमानी से दुनिया को देख रहे हैं? शायद नहीं, क्योंकि इसके लिए काफी अध्ययन, मनन और ज्ञान की जरूरत है। इसलिए बुद्धिमान होने से ज्यादा महत्वपूर्ण है जीवन को बुद्धिमानी से देखना व जीना।और भीऔर भी

जिंदगी में अनिश्चितता है तो बदलाव भी शाश्वत है। फिर भी हम निरंतर निश्चितता व स्थायित्व की तलाश में लगे रहते हैं। हमारी चाहत व हकीकत के बीच संघर्ष निरंतर चलता है। तभी एक दिन हम निश्चित मृत्यु तक पहुंचकर मिट जाते हैं।और भीऔर भी

छोटी-छेटी प्रतिक्रियाओं में हम अक्सर बड़े फैसले कर बैठते हैं। राजनीति और ज़िंदगी दोनों में। भूल जाते हैं कि हमारे इन फैसलों से रिश्ते सन्न रह जाते हैं, भावनाएं तड़क जाती हैं। प्रतिक्रिया से हमें सब मिल जाता है, पर उनकी तो ज़िदगी ही उजड़ जाती है।और भीऔर भी

जीने के साधनों की सौदेबाज़ी में ज़िंदगी इस कदर निचुड़ जाती है कि हम जीने लायक ही नहीं बचते। हालांकि चाहें तो हम इनके बगैर भी मजे से जी सकते हैं। इसके लिए दो ज़रूरी चीजें हैं प्यार और प्रकृति, जहां सिर्फ समर्पण चलता है, सौदेबाज़ी नहीं।और भीऔर भी

दुनिया में कुछ भी स्थाई नहीं। न मौसम और न ही सरकार। ज़िंदगी में भी कुछ स्थाई नहीं। न सुख और न ही दुख। सब कुछ निरंतर बदलता रहता है। इसलिए जीवन में सफलता से आगे बढ़ने का एक ही तरीका है कि हम इस सच को स्वीकार कर लें।और भीऔर भी