वित्त वर्ष 2009-10 में देश में कुल 123.52 लाख जीवन बीमा पॉलिसियां लैप्स हो गई हैं। यह संख्या साल भर पहले 2008-09 में लैप्स हुई 91.08 लाख पॉलिसियों से 35.61 फीसदी अधिक है। सबसे ज्यादा चौंकाने की बात यह है कि पारदर्शिता की बात करनेवाली बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) ने हाल ही में जारी अपनी 2009-10 की सालाना रिपोर्ट में इस बाबत स्पष्ट जानकारी देने से परहेज किया है। उसने सभी 22 जीवन बीमा कंपनियों केऔरऔर भी

रिजर्व बैंक के गर्वनर डॉ. दुव्वरी सुब्बाराव के मुताबिक हाल में हाउसिंग लोन घोटाले में रिश्वत लेकर जो भी ऋण दिए गए हैं, उनमें से सभी में स्थापित नियमों का पालन किया गया है। उन्होंने गुरुवार को कोलकाता में रिजर्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि इस सिलसिले में 14 ऋण खातों की जांच की गई है और इनमें से 13 खाते एकदम दुरुस्त तरीके से काम कर रहेऔरऔर भी

हम में से बहुत लोग लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी लेते समय खुद बहुत कम सोचते हैं। ज्यादातर वे एजेंट की बातों पर भरोसा करते हैं या उसकी वाकपटुता के जाल में आकर फैसला कर बैठते हैं और एजेंट उन्हें अपने मन मुताबिक (कमीशन-माफिक) लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी बेच देता है। फिर क्या करें: सिर्फ यह कीजिए कि  फैसला खुद लीजिए कि आपको  कौन-सी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी  खरीदनी है? एजेंट द्वारा सुझाई गई कम प्रीमियम वाली पॉलिसी को तभी तवज्जोऔरऔर भी

लोगों में बीमा की जागरूकता बढ़ रही है। बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) की तरफ से जारी किए गए ताजा आंकड़े यही तस्वीर पेश कर रहे हैं। इस साल सितंबर की तिमाही में एकल और गैर-एकल प्रीमियम वाली पॉलिसियों में सम-एश्योर्ड 2,68,945.36 करोड़ रुपए रहा है, जबकि साल पहले की सितंबर तिमाही में यह बीमा कवर 2,46,482.45 करोड़ रुपए का था। इस तरह सालाना तुलना में सम-एश्योर्ड 15.33 फीसदी बढ़ गया है। लेकिन इसमें नोट करने कीऔरऔर भी

आइए हम आपको बताते हैं कि अपनी कार का बीमा कराते समय फायदा ही फायदा कैसे प्राप्त करें? हम कोई भी खरीदारी करते हैं तो हमारी इच्छी रहती है कि वह चीज या सेवा सस्ती से सस्ती मिल जाए। दरअसल, मनमर्जी का सौदा सभी को प्रिय होता है, मन को संतोष देता है। अपनी मनपसंद कार खरीदने के बाद अब आपको उसका बीमा भी सस्ते से सस्ता मिल जाए तो आप अब यही कहेंगे कि मेरी पांचोंऔरऔर भी

बीमा नियामक संस्था, आरआरडीए (इरडा) ने आम अवाम को आगाह किया है कि वह ऐसे जालसाज लोगों से सावधान रहे जो खुद को इरडा का प्रतिनिधि बताकर उन्हें बीमा पॉलिसियां बेचने की कोशिश कर रहे हैं। इस बारे में इरडा ने एक पब्लिक नोटिस जारी की है। नोटिस में कुछ ऐसे मामलों के सामने आने का जिक्र किया गया है कि जिसमें लोगों को इरडा का प्रतिनिधि बताकर फोन किया गया और उन्हें विभिन्न बीमा कंपनियों कीऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने बीमा कंपनियों के पूंजी बाजार में उतरने की राह खोल दी है। लेकिन उसके बोर्ड ने सोमवार को अपनी बैठक में कुछ ऐसी शर्तें तय कर दीं जिन्हें बीमा कंपनियों को अलग से पूरा करना होगा। साथ ही बोर्ड ने किसी भी आईपीओ (प्रारंभिक पब्लिक ऑफर) में रिटेल निवेशकों के लिए अब तक चली आ रही एक लाख रुपए निवेश की सीमा को बढ़ाकर दो लाख रुपए कर दिया है। इसकेऔरऔर भी

बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) ने शुक्रवार, 22 अक्टूबर की रात से यूनिवर्सल लाइफ प्लान (यूएलपी) पर रोक लगा दी है। यह रोक फिलहाल 4 नवंबर को इरडा के अंतिम दिशानिर्देश आने तक जारी रहेगी। इरडा ने आनन-फानन में गुरुवार को बीमा कंपनियों को एक सर्कुलर भेजकर यह इत्तला दी है। लेकिन खुद इरडा ने ही करीब साल भर पहले 80 फीसदी कमीशन वाले रिलायंस लाइफ के यूएलपी – रिलायंस सुपर इनवेस्टमेंट प्लान को मंजूरी थी। इसकेऔरऔर भी

रमेश की व्यथा-कथा जारी है। कितने अफसोस की बात है कि उसने मेडिक्लेम करा रखा था जिसमें कैशलेस हास्पिटलाइजेशन की सुविधा थी। फिर भी बीमारी का खर्च उसने अपनी जेब से भरा। इसके बाद भी टीपीए (थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर) उसके क्लेम दिलाने में आनाकानी करता रहा। टीपीए बीमा कंपनी और बीमित के बीच का दलाल होता है जनाब। और, दलालों की हरकत और फितरत तो आप जानते ही होंगे। तो, अब कहानी आगे की… रमेश ने हफ्तेऔरऔर भी

रमेश ने मेडिक्लेम ले लिया और खुद व अपने परिवार को सुरक्षित महसूस करने लगा। टीपीए क्या होता है, कौन-सा टीपीए होना चाहिए? यह सब न उनको उनके बीमा एजेंट ने बताया, न उन्होंने जानने की कोशिश की। उन्हें लगा कि व्यक्तिगत मेडिक्लेम से अच्छा है फेमिली फ़्लोटर मेडिक्लेम पॉलिसी लेना, सो ले लिया। रमेश का सोचना बिल्कुल सही है कि फेमिली फ़्लोटर मेडिक्लेम पॉलिसी अच्छी है क्योंकि उस बीमा राशि का उपयोग परिवार का कोई भीऔरऔर भी