साल 1992 में देश में हाइड्रोकार्बन की खोज व उत्पादन का काम निजी क्षेत्र के लिए खोला गया और सेलन एक्सप्लोरेशन टेक्नोलॉजी तभी से धरती के भीतर से इन्हें निकालने का काम कर रही है। उसे शुरू में सरकार से गुजरात में खोजे गए तीन तेल क्षेत्रों – बकरोल, इंदरोरा व लोहार को विकसित करने का काम मिला। इसके बाद गुजरात में ही दो और तेल क्षेत्रों – ओग्नाज व कर्जीसन का काम भी मिल गया। कंपनीऔरऔर भी

यह हफ्ता छुट्टियों के चलते काफी छोटा है। शेयर बाजार में कुल तीन दिन ही ट्रेडिंग होनी है। बुधवार व शुक्रवार। बस दो दिन और। फिर अगले हफ्ते के एकदम शुरू में ही कंपनियों के तिमाही नतीजों के आने का सिलसिला थम हो जाएगा। लेकिन दुनिया के मंच पर घूम रही सारी बुरी खबरों के बीच एक ऐसी अच्छी खबर है जो हर तरफ शॉर्ट सौदों से भरे शेयर बाजार को चौंका सकती है और भारत इसकाऔरऔर भी

यूरोप के मसले ने उन सभी निवेशकों व ट्रेडरों को चरका दे दिया जो उस बहस और शॉर्ट सेलिंग करते रहे। निफ्टी 4700 से सुधरता हुआ 5350 तक आ चुका है और अब 5500 के पार जाने को तैयार है। इसके आसपास पहुंचते ही टेक्निकल एनालिसिस के हिसाब से एफआईआई खरीद की भंगिमा अपना लेंगे क्योंकि 200 डीएमए (200 दिनों के मूविंग औसत) अभी 5406 है और बाजार के इसके ऊपर जाने पर आप शॉर्ट नहीं रहऔरऔर भी

अक्सर मुझे लगता है कि किसी खास शेयर को खरीदने या बेचने की सलाह महज एक उकसावा भर होती है ताकि लोगों की दिलचस्पी बनी रहे और बाजार की खटर-पटर चलती रही। अनुमानों के पीछे कितना भी गणित गिनाया जाए, कुछ न कुछ पहलू छूट ही जाते हैं जिससे तीर निशाने पर नहीं लगता। जैसे साल भर पहले आज ही के दिन हमने फीनिक्स मिल्स पर एचडीएफसी सिक्यूरिटीज की रिसर्च रिपोर्ट के हवाले बताया था कि, “यहऔरऔर भी

अमेरिकी बाजार का सूचकांक डाउ जोंस 1.53 फीसदी ऊपर। लेकिन यूरोप के संकट ने एशियाई बाजारों को दबा डाला। भारत भी दबाव में। ऊपर से खाद्य मुद्रास्फीति नौ महीनों के शिखर 12.21 फीसदी पर। इसने निफ्टी पर चोट जरूर की। लेकिन तेजडियों के उत्साह पर आंच नहीं आई और वे निफ्टी को 5500 के ऊपर ले जाने में लगे हुए हैं। यू तो मंदड़ियों का मनोविज्ञान बेचते ही बेचते चले जाने का है। लेकिन अगर समर्थन स्तरऔरऔर भी

मुंबई की लोकल ट्रेनों में गैंग बनाकर चलनेवाले यात्री जब करताल बजाकर गाना शुरू करते हैं तो समूचा कोच सिर पर उठा लेते हैं। पूरा माहौल विचित्र तरंग व उल्लास से भर जाता है। इतना ज्यादा कि कभी-कभी डर लगने लगता है। कुछ ऐसा ही हाल हमारे शेयर बाजार के डे-ट्रेडरों का है। इशारा मिला नहीं कि करताल बजाकर किसी शेयर को आकाश से पाताल या पाताल से आकाश तक पहुंचा देते हैं। हल्ला मचाते हैं क्विंटलऔरऔर भी

अमेरिकी बाजार के 300 अंक गिरने से हर किसी के मन में डर भर गया था कि बाजार आज भारी डुबकी लगाकर खुलेगा। सो, ट्रेडर शुरुआत में ही शॉर्ट हो गए। लेकिन जैसा कि मैंने आपको बताया था कि बाजार ने निफ्टी में 5210 के आसपास सहारा हासिल किया और बहुत तेजी से पलटकर 5300 तक जा पहुंचा। ट्रेडरों ने कभी इसकी कल्पना तक नहीं की थी। फिलहाल निफ्टी कमोबेश कल के बराबर ही रहा है। निफ्टीऔरऔर भी

कोई शेयर बिना किसी वजह के इतना गिर सकता है, यकीन नहीं आता। बांसवाड़ा सिंटेक्स का दस रुपए अंकित मूल्य का शेयर सात महीने पहले 6 अप्रैल को 149 रुपए के शिखर पर झूम रहा था। लेकिन सवा महीने पहले 28 सितंबर को एनएसई में 78.10 रुपए और बीएसई में 84.05 रुपए तक गिर गया। छह महीने से भी कम वक्त में 47.6 फीसदी की गिरावट। लेकिन इस तरह घटकर करीब-करीब आधा हो जाने की कोई साफऔरऔर भी

बाजार चूंकि निफ्टी में 200 दिनों के मूविंग औसत (डीएमए) 5408 को नहीं पार कर सका, इसलिए थोड़ा दम मारना लाजिमी था। इसी के अनुरूप बाजार सुबह 5310.85 पर पहुंचने के बाद जो गिरना शुरू हुआ तो यह गिरता ही चला गया। अंत में 1.37 फीसदी की गिरावट के साथ 5253.75 पर बंद हुआ है। यह और कुछ नहीं, बल्कि बाजार का खुद को जमाने का उपक्रम है। इस प्रक्रिया में निफ्टी बहुत नीचे गया तो फिरऔरऔर भी

पहले घर एक-मंजिला हुआ करते थे। अब बहु-मंजिला होते हैं। पहले धन-दौलत सोने-चांदी के सिक्कों या बर्तनों के रूप में जमीन या दीवार में गाड़कर बचाई जाती है। अब लोग अपनी बचत बैंक एफडी, म्यूचुअल फंड या शेयरों जैसे अनाकार माध्यमों में लगाते हैं। पहले मुद्रास्फीति नहीं थी तो बचत जितना रखो, उतनी ही रहती थी। अब खोखली होती जाती है। इसलिए आप कमाकर बचाते हैं, यह पर्याप्त नहीं। आपकी बचत को भी कमा पड़ेगा। कम याऔरऔर भी