चाहें तो बैठे रहें मंदड़ियों की पंगत में

बाजार चूंकि निफ्टी में 200 दिनों के मूविंग औसत (डीएमए) 5408 को नहीं पार कर सका, इसलिए थोड़ा दम मारना लाजिमी था। इसी के अनुरूप बाजार सुबह 5310.85 पर पहुंचने के बाद जो गिरना शुरू हुआ तो यह गिरता ही चला गया। अंत में 1.37 फीसदी की गिरावट के साथ 5253.75 पर बंद हुआ है। यह और कुछ नहीं, बल्कि बाजार का खुद को जमाने का उपक्रम है। इस प्रक्रिया में निफ्टी बहुत नीचे गया तो फिर से 5210 पर पहुंच सकता है। लेकिन इसके बाद यह बहुत तेजी से पलटकर उठेगा।

खैर, अब मैंने अगले कुछ हफ्तों में निफ्टी के 5600 से 5700 तक पहुंचने का नया लक्ष्य बना लिया है। यह संभव होगा शॉर्ट सौदों की कवरिंग और मुख्य रूप से पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा व एसबीआई जैसे सरकारी बैंकों व किनारे पड़े ऐसे स्टॉक्स में नई पोजिशन बनने से, जिन पर ऑपरटेरों का पूरा नियंत्रण चल रहा है। आनेवाले दिनों में हम चीनी और उर्वरक कंपनियों के शेयरों में भी सक्रियता देख सकते हैं।

अगर चुनिंदा स्टॉक्स की बात की जाए तो डीएलएफ, एस्कोर्ट्स, पिपावाव डिफेंस, बीएफ यूटीलिटीज, ऑर्किड केमिकल्स, सिम्फनी, सेंचुरी टेक्सटाइल्स, बॉम्बे डाईंग, जेट एयरवेज, स्पाइसजेट व बीईएमएल वगैरह में हलचल आएगी। हालांकि सेंचरी के नतीजे काफी खराब रहे हैं। इस सितंबर तिमाही में वह 32.16 करोड़ रुपए के घाटे में है, जबकि पिछले साल की सितंबर तिमाही में उसे 66.05 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ हुआ था।

ऐसे में बाजार के बारे में जो आपको करना है, आप खुद तय कर सकते हैं। एसीसी के सितंबर तिमाही के नतीजे अच्छे रहे हैं। इसकी बिक्री 31.32 फीसदी बढ़कर 2149.99 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 67.51 फीसदी बढ़कर 167.58 करोड़ रुपए हो गया है। आज तो इसका शेयर गिरा है। लेकिन आगे यह ठीकठाक बढ़ सकता है कि क्योंकि सीमेंट के दाम जल्दी ही बढ़ाए जानेवाले हैं।

अगर अब भी आप मंदी के भाव में मंदड़ियों की पंगत में पड़े रहना चाहते हैं तो तमाम कंपनियों के कमजोर नतीजों, कमजोर अर्थव्यवस्था, यूरोप के संकट व अमेरिका के निराशाजनक आर्थिक हालात के तर्क पर ऐसा बखूबी कर सकते हैं। लेकिन मेरा कम से कम इतना मानना है कि देश में मुद्रास्फीति अब खुद-ब-खुद नीचे आना शुरू हो जाएगी और तब ब्याज दरें बढ़ाने की कोई सूरत नहीं बचेगी। मेरी इकलौती चिंता विप्रो के प्रमुख अजीम प्रेमजी की तरह सरकार की निष्क्रियता को लेकर है। हालांकि, इस पर हो सकता है कि इसी महीने 22 नवंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में स्थिति स्पष्ट हो जाए।

मुझे नहीं पता कि सफलता की कुंजी क्या है। लेकिन इतना जरूर पता है कि विफलता की कुंजी है – हर किसी को एकसाथ खुश रखने की कोशिश।

(चमत्कार चक्री एक अनाम शख्सियत है। वह बाजार की रग-रग से वाकिफ है। लेकिन फालतू के कानूनी लफड़ों में नहीं पड़ना चाहता। इसलिए अनाम है। वह अंदर की बातें आपके सामने रखता है। लेकिन उसमें बड़बोलापन हो सकता है। आपके निवेश फैसलों के लिए अर्थकाम किसी भी हाल में जिम्मेदार नहीं होगा। यह मूलत: सीएनआई रिसर्च का कॉलम है, जिसे हम यहां आपकी शिक्षा के लिए पेश कर रहे हैं)

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