केन्‍द्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) ने चालू वित्त वर्ष 2011-12 में आर्थिक वृद्धि दर के निराशाजनक अग्रिम अनुमान व्यक्त किए हैं। मंगलवार को जारी अग्रिम अनुमानों के मुताबिक बार जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) 6.9 फीसदी ही बढ़ेगा, जबकि बीते वित्त वर्ष में यह 8.4 फीसदी बढ़ा था। इस बार कृषि क्षेत्र की विकास दर 2.5 फीसदी रहेगी, जबकि पिछले साल यह 7 फीसदी थी। मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र के इस बार 3.9 फीसदी बढ़ने का अनुमान है, जबकि पिछले सालऔरऔर भी

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने पेट्रोलियम उत्पादों के दाम में की गई वृद्धि को वापस लेने की संभावना से इनकार कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि कच्चे तेल व पेट्रोलियम उत्पादों पर कस्टम व एक्साइज शुल्क में कटौती से सरकार के राजकोषीय घाटे पर कोई असर नहीं होगा। यह पूछे जाने पर कि डीजल, घरेलू गैस व केरोसिन की कीमतों में वृद्धि में कुछ कमी की जाएगी, मुखर्जी ने समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडियाऔरऔर भी

देश में प्रति व्यक्ति आय 2009-10 में 46,492 रुपए रही है। यह साल भर पहले 2008-09 की प्रति व्यक्ति आय 40,605 रुपए से 14.5 फीसदी अधिक है। यह जानकारी सांख्यिकी व कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्री एम एस गिल ने मंगलवार को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी। लेकिन यह जानकारी पुरानी है क्योंकि उन्हीं का मंत्रालय चालू वित्त वर्ष 2010-11 का भी अनुमान महीने भर पहले 7 फरवरी को जारी कर चुका है। उस समय बताया गयाऔरऔर भी

अगले हफ्ते सोमवार को पेश होनेवाले आम बजट में बीमा से लेकर रक्षा और मल्टी ब्रांड रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को लेकर कुछ सकारात्मक घोषणाएं हो सकती हैं। इस बात का स्पष्ट संकेत सोमवार को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने बजट सत्र के पहले दिन संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए दिया। उन्होंने कहा, ‘‘हमें निवेश के लिए वातावरण को अनुकूल बनाने की जरूरत है। सार्वजनिक व निजी निवेश के साथऔरऔर भी

विदा लेते साल 2010 के दौरान देश में भ्रष्टाचार और घोटालों के कई मामले सामने आए। इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था नौ फीसदी की तेज रफ्तार के साथ आगे बढती दिखाई दी। पहले राष्ट्रमंडल खेल आयोजन में भ्रष्टाचार, फिर कॉरपोरेट जगत के लिये जनसंपर्क का काम करनेवाली नीरा राडिया के नेताओं, अधिकारियों और पत्रकारों के साथ बातचीत के टेप के सार्वजनिक होने और 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले से उठा तूफान। इन सब विवादों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था नौ फीसदीऔरऔर भी