बताते हैं कि रिजर्व बैंक के गवर्नर डॉ. दुव्वरि सुब्बाराव ने मुद्रास्फीति के मोर्चे पर ठंडी पड़ी सरकार को झटका देने के लिए ही उम्मीद के विपरीत ब्याज दरों को एकबारगी 0.50 फीसदी बढ़ाया है। पिछले 17 महीनों से थोड़ी-थोड़ी ब्याज वृद्धि का डोज काम न आने से हताश रिजर्व बैंक ने तेज झटका देकर गेंद अब सरकार के पाले में फेंक दी है। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी को भी सुब्बाराव का इशारा समझ में आ गयाऔरऔर भी

पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने के पेट्रोलियम मंत्रालय के प्रस्ताव पर विचार के लिए मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह की बैठक से पहले प्रमुख उद्योग संगठन एसोचैम ने कहा है कि उपभोक्ताओं पर कम बोझ डालने के लिए सरकार को चरणबद्ध तरीके से कीमतें बढ़ानी चाहिए। एसोचैम ने रविवार को जारी बयान में कहा कि सरकार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के अनुपात में ईंधन के मूल्य नहीं बढ़ाना चाहिए। बताऔरऔर भी

हां, यह सच है कि नए साल के बजट में आम शहरी के लिए कुछ नहीं है क्योंकि साल भर में बचाया गया 2060 रुपए का टैक्स किसी अच्छे रेस्तरां में परिवार के लिए एक समय के भोजने के लिए भी पूरा नहीं पड़ेगा। यह निवेशकों के लिए भी अच्छा बजट नहीं है। इसलिए अगर बाजार विश्लेषक कह रहे हैं कि वित्त मंत्री अच्छा मौका चूक गए तो यह एक तरीके से सही है। लेकिन शायद आपनेऔरऔर भी

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने राजकोषीय घाटे को कैसे ‘मैनेज’ किया होगा, इसका हल्का-हल्का रहस्य अब सामने आने लगा है। शुक्रवार को केंद्र सरकार ने उर्वरक सब्सिडी के लिए लोकसभा में 8000 करोड़ रुपए की अनुपूरक अनुदान मांग पेश की। इसे मिला देने पर चालू वित्त वर्ष 2010-11 में उर्वरक सब्सिडी का कुल खर्च 66,075 करोड़ रुपए हो जाता है, जबकि वित्त मंत्री ने चार दिन पहले ही पेश किए गए बजट में इस खर्च का संशोधितऔरऔर भी

बीएसई सेंसेक्स 623 अंक उठा था तो हिचकी का आना लाजिमी था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम की चिंता में बाजार 128 अंक गिरकर खुला। फिर 157 अंक ऊपर चढ़ गया। और, फिर चौरस हो गया। इस बीच बाजार के स्वघोषित वित्त मंत्री (एनालिस्ट) बजट की मीनमेख निकालने में जुटे हैं। खासकर राजकोषीय घाटे के लक्ष्य के बारे में उनका कहना है कि इसे हासिल नहीं किया जा सकता। ऐसी ही गलती सीएलएसए ने 2003औरऔर भी

आलोचकों की आलोचनाओं को धता बताते हुए बाजार में बजट का उत्साह कायम है। मंगलवार को सेंसेक्स और निफ्टी साढ़े तीन फीसदी बढ़ गए। वैसे, सच कहूं तो हमें इस बात की कतई परवाह नहीं करनी चाहिए कि कोई बजट के बारे में क्या कह रहा है क्योंकि हकीकत यही है कि इस बार का बजट पिछले साल से बेहतर है और ऐसे सुधारों से भरा हुआ है जो शेयर बाजार को नई ऊंचाई पर ले जाऔरऔर भी

वित्त वर्ष 2011-12 के लिए देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का बजट अनुमान है 89,80,860 करोड़ रुपए, जबकि वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने राजकोषीय घाटे का अनुमान रखा है 4,12,817 करोड़ रुपए। इस तरह नए वित्त वर्ष में वित्त मंत्री ने राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.6 फीसदी तक सीमित रखने का मसूंबा बांधा है। लेकिन बहुतेरे जानकार व अर्थशास्त्री वित्त मंत्री के इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को शक की नजर से देखते हैं। हालांकि एनम सिक्यूरिटीजऔरऔर भी

साल भर पहले जब सरकार ने घोषित किया था कि वह राजकोषीय घाटे को जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के 5.5 फीसदी तक सीमित रखेगी, तब उसका यह लक्ष्य और दावा बड़ा अतार्किक लग रहा था। लेकिन 3जी स्पेक्ट्रम की नीलामी से मिले अतिरिक्त धन की बदौलत सरकार राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 5.1 फीसदी तक लाने में कामयाब रही है। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की यह एक बड़ी उपलब्धि है। हालांकि आस्तियों को बेचना घाटे को पूराऔरऔर भी

वित्त वर्ष 2011-12 का बजट देश और देश की अर्थव्यवस्था के हित में है। शेयर बाजार अभी इसे अपने हित में मानता है या नहीं, इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता क्योंकि आखिरकार अर्थव्यवस्था ही बाजार की भी मजबूती का आधार बनती है। फिर आज अगर बीएसई सेंसेक्स करीब 600 अंक उछला है तो जरूर बाजार ने भी इसका अहसास किया है। हालांकि सेंसेक्स बाद में केवल 122.49 अंकों या 0.69 फीसदी की बढ़त के साथ 17,823.40 परऔरऔर भी

मेरी मानिए तो आज सिर्फ और सिर्फ बजट को देखिए। देखिए कि बाजार उसे कैसे लेता है और सोचते रहिए कि भविष्य के निवेश की प्लानिंग कैसे करेंगे। वैसे तो बजट के सारे दस्तावेज आपको सरकार की खास वेबसाइट पर मिल जाएंगे। लेकिन मेरा कहना है कि 11 बजे से लोकसभा में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के भाषण को ध्यान से सुन लेंगे तो मोटामोटी तस्वीर साफ हो जाएगी। निवेश के लिहाज से बजट में क्या देखा-सुनाऔरऔर भी