आज बस बजट देखो और उसकी धार

मेरी मानिए तो आज सिर्फ और सिर्फ बजट को देखिए। देखिए कि बाजार उसे कैसे लेता है और सोचते रहिए कि भविष्य के निवेश की प्लानिंग कैसे करेंगे। वैसे तो बजट के सारे दस्तावेज आपको सरकार की खास वेबसाइट पर मिल जाएंगे। लेकिन मेरा कहना है कि 11 बजे से लोकसभा में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के भाषण को ध्यान से सुन लेंगे तो मोटामोटी तस्वीर साफ हो जाएगी।

निवेश के लिहाज से बजट में क्या देखा-सुना जाना चाहिए? एक, सरकार नए वित्त वर्ष 2011-12 के लिए राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को कितना रखती है। इसे जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के अनुपात के रूप में पेश किया जाता है। चालू वित्त वर्ष के लिए इसका बजट अनुमान जीडीपी के 5.5 फीसदी का था और इसकी रकम थी 3,81,408 करोड़ रुपए। यह असल में मोटे तौर पर वह धन होती है जो सरकार कुल खर्चों को पूरा करने के लिए उधार लेती है। वित्त मंत्री इसका संशोधित अनुमान पेश करेंगे जो संभवतः 4.8 या 4.9 फीसदी रहेगा।

राजकोषीय घाटे की रकम का संशोधित अनुमान 3,87,498 करोड़ रुपए हो सकता है जो 3,81,408 करोड़ के बजट अनुमान से ज्यादा है। लेकिन चूंकि रकम से ज्यादा मायने रखता है जीडीपी से इसका अनुपात तो यह कम हो जाएगा क्योंकि बजट बनाते समय जीडीपी को 69,34,700 करोड़ माना गया था, जो वास्तव में अब 78,77,947 करोड़ माना जा रहा है। इसलिए बढ़ने के बावजूद राजकोषीय घाटा जीडीपी के 5.5 के बजाय 4.9 फीसदी पर आने की उम्मीद है। नए वित्त वर्ष 2011-12 के लिए राजकोषीय घाटे का अनुमान 4,65,863 करोड़ रुपए हो सकता है जो जीडीपी का 5.1 या 5.2 फीसदी निकलता है। लेकिन वित्त मंत्री गैर-आयोजना व्यय (Non-Plan expenditure) को कम दिखाकर वास्तव में इसे 4,34,863 करोड़ रख सकते हैं और कह सकते हैं कि 2011-12 के लिए राजकोषीय घाटे का बजट अनुमान जीडीपी का 4.8 फीसदी है।

दूसरी चीज हमें बजट में देखनी चाहिए कि सरकार की सकल बाजार उधारी क्या रहनेवाली है। इस उधारी में राजकोषीय घाटा शामिल रहता है और यह उससे ज्यादा होती है। जैसे, चालू वित्त वर्ष में सरकार की सकल बाजार उधारी का अनुमान 4.50 लाख करोड़ और शुद्ध बाजार उधारी का अनुमान 3.30 लाख करोड़ रुपए का था। अनुमान है कि 2011-12 में इसे क्रमशः 4.70 लाख करोड़ और 4 लाख करोड़ रखा जा सकता है। लेकिन सब्सिडी के अतिरिक्त बोझ को समायोजित करने के लिए इसे 30,000 करोड़ रुपए बढ़ाकर 5 लाख करोड़ रुपए भी किया जा सकता है। यह बहुत अहम आंकड़ा होता है क्योंकि इससे तय होता है कि सिस्टम में कितनी तरलता सरकारी उधार के बाद मुक्त रहेगी और आगे ब्याज दरों का रुझान क्या रहनेवाला है।

तीसरी बात हमें वित्त मंत्री के भाषण में ध्यान से सुननी होगी कि वे नए वित्त वर्ष में सरकारी कंपनियों के शेयरों की बिक्री या विनिवेश (Disinvestment) से कितनी रकम जुटानेवाले हैं। अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष की तरह 2011-12 में भी इससे 40,000 करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा जाएगा। नए वित्त वर्ष में इंडियन ऑयल, एमएसटीसी, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन समेट आठ-नौ सरकारी कंपनियों के इश्यू आ सकते। लेकिन इसमें ओएनजीसी के एफपीओ के 13,000 करोड़ रुपए जुड़ सकते हैं, अगर कुछ वजहों से वो 31 मार्च 2011 से पहले नहीं आ पाया।

बाकी देखना होगा कि प्रत्यक्ष और परोक्ष (direct tax + indirect tax) टैक्स से सरकार कितना जुटा रही है। इसके अलावा इससे बाहर उसने गैर-कर राजस्व (non tax revenue) के क्या तरीके अपनाए हैं? क्या वह इस बार भी किसी स्पेक्ट्रम की बिक्री से कुछ जुटाने जा रही है? यह भी देखना होगा कि वित्त मंत्री काले धन को खींचने के लिए कोई स्कीम लाते हैं या नहीं। साथ ही यह भी वे भ्रष्टाचार के खिलाफ क्या कदम उठाने जा रहे हैं?

इसके अलावा अलग-अलग उद्योग क्षेत्रों के क्या प्रावधान किए जा रहे हैं। जिन उत्पादों पर एक्साइज और कस्टम ड्यूटी बढ़ाई जाएगी, वे महंगे हो जाएंगे और जिन पर घटाई जाएगी, वे सस्ते हो जाएंगे। लेकिन यह भी देखिएगा कि वित्त मंत्री शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक योजनाओं पर खर्च कितना बढ़ाने जा रहे हैं? इस बार खाद्य सब्सिडी और उर्वरक सब्सिडी कितनी रखी गई है? सरकार का रक्षा बजट कितना है? क्या कृषि के लिए कुछ विशेष कदम उठाए जाएंगे? बीमा और बैंकिंग जैसे वित्तीय क्षेत्र में सुधार के क्या कदम हैं? मल्टी ब्रांड रिटेल और रक्षा उत्पादन में एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) की इजाजत दी गई है या नहीं?

इन विषयों पर बजट की घोषणाओं से पूंजी बाजार की दूरगामी दिशा तो तय होगी ही, आज इनको लेकर शेयर बाजार में मार भी भरपूर होगी। मंदड़िए पिछले तीन महीनों में बाजार पर पकड़ जमा चुके हैं। इसलिए वे सकारात्मक या नकारात्मक किसी भी बात पर बाजार पर हमला करने की कोशिश करेंगे। एक बात जान लें कि इस साल एफआईआई ने बाजार में 350 करोड़ डॉलर की जो बिक्री की है, वह एक तरह का छलावा है क्योंकि इसमें से अधिकतम राशि पी-नोट की रही है। एफआईआई ने इसे इसलिए निकाला है ताकि बजट घोषणाओं के बाद वे इसे दूसरे रूप में भारत ला सकें। संभव है कि वित्त मंत्री पी-नोट के बारे में भी कुछ घोषणा कर दें।

आज बाजार में हाई-टाइड का दिन है। जिस तरह हाई-टाइड के दिन लोगों से समुद्र से दूर रहने की सलाह दी जाती है, उसी तरह हम भी आपसे कहते हैं कि आज आप बाजार का तमाशा एकदम दूर से देखें। यह सलाह आम निवेशकों से ही नहीं, ट्रेडरों से भी है क्योंकि इस तरह के ज्वार-भांटे में जब बड़े-बड़े उखड़ जाते हैं तब हमारे-आप जैसों की क्या बिसात!

1 Comment

  1. hello, me apki puri bato se sehmat hu, or me long term shr leke rakha hu, or muje malum he ki mkt ek din up hona he, jese koi chis hum log asman pe fekte he wo wapis jamin pe ata he ussi tarah mkt jab down hota he tab wo jarur up hota he wo me janta hu, me 2600 ka nifty me maal leke rakha he, or wo mhe mera 300shr bombay dyeing, 192 me, or mene abhi 296 me bhi liya last week, me mkrt se nahi darta, or hamesa profit me rehta hu, or mere pass 12rs ka gvk power mene us wak leke rakha hua he 1000shr, or mere pass aaaj ki mkt ke hisab se tisco 100 shr 496 leke rakha hua he, mgrme ye kehna chatahu ki mkt jab down ho raha tha tab aap ko trader log ko chota sa hint dena chahiye or tab jo chote invester he woo bach sake, me aap ko claim nahi kar raha hu, me ap ki bato se khus hu, or jo yaha sab ko co, ka future batae he me uska follow karta hu, or usko leke sell karta hu, or aaj bhi bombay dyeing bahot hi acha shr he, uska capital baot strong he, 900rs aram se de sakta he, long term ke liye bahot acha he, ye me long term keliye bol raha hu,me aap ki har coloum padta hu, jawab deke ka sukriya, aap muje internatiano conveyor ltd ke bare me bata ye, bahot ache co, he, mgr ap se janna chata hu, jawab jarur digiye ga, me paka jawab ka wait kar raha hu, bye

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