साल 2008 और 2009 में बाजार लेहमान संकट की भेंट चढ़ गया। अब 2011 पर यूरोप व अमेरिका का ऋण संकट मंडरा रहा है। अमेरिका की आर्थिक विकास दर के अनुमान को घटाकर 1 फीसदी कर दिया गया है। अमेरिका के इतिहास में यह भी पहली बार हुआ कि स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने शनिवार को उसकी रेटिंग एएए के सर्वोच्च स्तर से घटाकर एए+ कर दी और आगे एए भी कर सकती है। हालांकि अमेरिकी वित्त मंत्रालयऔरऔर भी

बताते हैं कि रिजर्व बैंक के गवर्नर डॉ. दुव्वरि सुब्बाराव ने मुद्रास्फीति के मोर्चे पर ठंडी पड़ी सरकार को झटका देने के लिए ही उम्मीद के विपरीत ब्याज दरों को एकबारगी 0.50 फीसदी बढ़ाया है। पिछले 17 महीनों से थोड़ी-थोड़ी ब्याज वृद्धि का डोज काम न आने से हताश रिजर्व बैंक ने तेज झटका देकर गेंद अब सरकार के पाले में फेंक दी है। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी को भी सुब्बाराव का इशारा समझ में आ गयाऔरऔर भी

इस समय देश में आयकर विभाग के कुल 53,000 पदों में से लगभग 22 फीसदी खाली पड़े हैं। यह संख्या 11,500 के आसपास बनती है। ऐसा तब हो रहा है जब काले धन का शोर उठा हुआ है और सरकार कर-चोरी को रोकने के दावे कर रही है। सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक 2010-11 में अटके हुए टैक्स की रकम 2.63 लाख करोड़ रुपए रही है। आयकर विभाग खाली पदों को भरने के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष करऔरऔर भी

विश्व बैंक ने भारत में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका परियोजना (एनआरएलपी) के लिए एक अरब डॉलर (करीब 4500 करोड़ रुपए) का ऋण मंजूर किया है। विश्व बैंक का कहना है कि इस राशि से हाल ही में शुरू हुए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन पर अमल ज्यादा अच्छी तरह से हो सकेगा। यह मिशन दुनिया में सबसे बड़े गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों में से एक है। करीब 7.7 अरब डॉलर के इस मिशन का लाभ लगभग 35 करोड़ लोगों कोऔरऔर भी

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर डॉ. दुव्वरि सुब्बाराव का तीन साल का कार्यकाल सितंबर में खत्म हो रहा है। इसलिए सरकारी हलकों में उनकी जगह नए गवर्नर को लाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक इस दौड़ में तीन लोगों का नाम सबसे आगे हैं। ये हैं – शिकागो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सलाहकार रघुराम राजन, आर्थिक मामलों के सचिव आर गोपालन और कार्नेल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर व वित्त मंत्रालयऔरऔर भी

सरकार ने चालू वित्त वर्ष के बजट में की गई घोषणा पर अमल की शुरुआत कर दी है। उसने बताया है कि विदेशी निवेशकों को घरेलू म्यूचुअल फंड में 10 अरब डॉलर तक निवेश करने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) इसमें शिरकत नहीं कर पाएंगे। इससे शेयर बाजार में होने वाले तीव्र उतार चढ़ाव को हल्का रखने में मदद मिलेगी। वित्त मंत्रालय में संयुक्त सचिव (पूंजी बाजार) थॉमस मैथ्यू ने कहा कि इसऔरऔर भी

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने भले ही पिछले साल सितंबर में नॉर्थ ब्लॉक स्थित अपने कार्यालय की सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था। लेकिन जांच के बाद सुरक्षा में सेंध जैसा कोई मामला नहीं पाया गया है। इंडियन एक्सप्रेस में उस पत्र की खबर छपने के बाद वित्त मंत्री ने मंगलवार को कहा कि जांच एजेंसियों को नॉर्थ ब्लाक में उनके कार्यालय की सुरक्षा व्यवस्था में कथित सेंध की जांच में कुछ नहीं दिखा है।औरऔर भी

हमारे नीति-नियामक कितने मतिअंध हैं, इसका प्रमाण पेश कर दिया मंगलवार को जारी मई माह की मुद्रास्फीति के आंकड़ों ने। तीन दिन पहले ही वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु कह रहे थे कि थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति की दर मई में 8.6 फीसदी रह सकती है जो अप्रैल माह के 8.66 फीसदी से कम होगी। लेकिन वास्तव में यह आंकड़ा 9.06 फीसदी का निकला है। सवाल उठता है कि क्या इतने खासऔरऔर भी

शेयर बाजार की निगाह इस हफ्ते गुरुवार 16 जून को पेश होनेवाली रिजर्व बैंक मध्य तिमाही समीक्षा पर टिकी रहेगी। लेकिन इससे पहले दो दिन भी काफी अहम हैं। इसलिए हफ्ते के शुरू में कारोबार फीका रह सकता है। निवेशकों को मई के मुद्रास्फीति के आंकड़ों का भी इंतजार होगा जो मंगलवार, 14 जून को जारी किया जाएगा। वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु का अनुमान है कि मई में मुद्रास्फीति की दर 8.6 फीसदीऔरऔर भी

कई महीनों की अनिश्चितता के बाद सरकार ने नए राष्ट्रीय खुफिया तंत्र, नेशनल ग्रिड (नेटग्रिड) को प्रारंभिक मंजूरी दे दी है। नेटग्रिड गृहमंत्री पी चिदंबरम के दिमाग की उपज है और वित्त मंत्रालय व रक्षा मंत्रालय इसका विरोध करते रहे हैं। गृह मंत्रालय का दावा है कि इससे आतंकवादी खतरों के खिलाफ कार्यरत एजेंसियों को जरूरी सूचनाओं का आदान-प्रदान करने में आसानी हो जागी। सोमवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की सुरक्षा मामलोंऔरऔर भी