चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में अप्रत्यक्ष कर संग्रह 44 फीसदी बढ़कर 1,50,686 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। अप्रत्यक्ष कर संग्रह में सीमा शुल्क (कस्टम), केन्द्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज) और सेवा कर (सर्विस टैक्स) शामिल हैं। वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘‘अप्रैल-सितंबर 2010 में अप्रत्यक्ष कर संग्रह बढ़कर 1,50,686 करोड़ रुपये पर पहुंच गया जो बीते वित्त वर्ष की इसी अवधि में हुए कर संग्रह के मुकाबले 44.4 फीसदीऔरऔर भी

केंद्र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में करीब 8700 करोड़ रुपए का नया निवेश करेगी। यह रकम इक्विटी के रूप में होगी। सरकार से इतनी रकम मिल जाने के बाद ये बैंक पूंजी बाजार से भी और रकम जुटा सकते हैं क्योंकि उनके सामने शर्त है कि उनकी इक्विटी में सरकार की हिस्सेदारी किसी भी सूरत में 51 फीसदी से कम नहीं होनी चाहिए। वित्त मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। वित्तऔरऔर भी

सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश बढ़ रहा है। वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह लगभग 18 फीसदी बढ़कर 21,71,022 करोड़ रुपए हो गया है। खासकर यह बढ़त सरकारी की दिनांकित प्रतिभूतियों में होनेवाले सौदों के चलते हुई है जिसमें निवेश लगभग 90 फीसदी बढ़ गया है। नोट करने की बात यह है कि सरकारी प्रतिभूतियों में बैंक या म्यूचुअल फंड व बीमा कंपनियों जैसी वित्तीय संस्थाएं हीऔरऔर भी

भारत सरकार पर ऋण का बोझ इस वित्त वर्ष के अंत तक थोड़ा घट जाएगा। यह आकलन है अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच का। फिच रेटिंग्स ने सोमवार को जारी रिपोर्ट में कहा है कि वित्त वर्ष 2009-10 के अंत में भारत सरकार का कुल ऋण सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 83 फीसदी था। लेकिन चालू वित्त वर्ष 2010-11 के अंत यानी मार्च 2011 तक यह घटकर जीडीपी के 80 फीसदी तक आ जाएगा। फिच ने यह आकलनऔरऔर भी

आईपीएल की फ्रैंचाइजी से शरद पवार एंड फेमिली का रिश्ता साबित करना कठिन है, मुश्किल नहीं। लेकिन कुछ ऐसे सच हैं जिनको कभी साबित नहीं किया जा सकता। ऐसा ही एक सच है कि हमारे शेयर बाजारों में बड़े पैमाने पर नेताओं का पैसा लगा हुआ है। और, ऐसा ही एक ताजातरीन सच है कि वित्त मंत्रालय ने लिस्टेड कंपनियों में न्यूनतम 25 फीसदी पब्लिक होल्डिंग का जो नियम बनाया है, उसका एक खास मकसद स्विस बैंकोंऔरऔर भी

शेयर बाजार में अगले कुछ सालों में पब्लिक इश्यू की बाढ़ आ सकती है क्योंकि सरकार ने तय कर दिया है कि किसी भी लिस्टेड कंपनी में पब्लिक होल्डिंग कम से कम 25 फीसदी होनी चाहिए। क्रिसिल इक्विटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस समय शेयर बाजारों में लिस्टेड 179 कंपनियों ऐसी हैं जिनमें पब्लिक होल्डिंग 25 फीसदी से कम हैं। अगर ये कंपनियां अपनी शेयधारिता सरकार की बताई सीमा में लाती हैं तो पूंजी बाजार मेंऔरऔर भी

ठीक एक हफ्ते बाद आज ही के दिन भारतीय रिजर्व बैंक नए वित्त वर्ष 2010-11 की सालाना मौद्रिक नीति घोषित करेगा। इसलिए वह क्या करेगा क्या नहीं, इसको लेकर कयासों का दौर तेज होने लगा है। आज वित्त मंत्रालय में वित्तीय सेवाओं के सचिव आर गोपालन ने कहा कि रिजर्व बैंक अपनी मौद्रिक नीति थोड़ा और कठोर बना सकता है। वे राजधानी दिल्ली में संवाददाताओं से बात कर रहे थे। बता दें कि रिजर्व बैंक स्वायत्त नियामकऔरऔर भी

अब तक के इतिहास में केवल वीपी सिंह ऐसे वित्त मंत्री रहे हैं जिन्होंने बाजार बंद रहने के दिन, शनिवार को बजट पेश किया था। इस बार का बजट भी इस मायने में पहला है कि इसके बाद लगातार तीन दिन की छुट्टियां पड़ रही हैं। शनिवार, रविवार और फिर सोमवार को होली। इसलिए हमारे माननीय वित्त मंत्री अपने बजट प्रस्तावों पर बाजार की पूरी प्रतिक्रिया जानने से तीन दिन तक महरूम रह जाएंगे। अमूमन बजट शेयरऔरऔर भी