समझ में नहीं आता इन दुखी आत्माओं का क्या करूं? एक दुखी आत्मा ने लिखा है, “हेलो! आप यहां हर वक्त लिखते हैं कि मार्केंट मजबूत रहेगा। लेकिन हर वक्त वो नीचे ही नीचे जा रहा है। आपने लिखा था कि 6200 से 7000 तक निफ्टी जाएगा। मगर ऐसा नहीं हुआ। अगर आपको सही मालूम होता तो क्यों नहीं आप सबको बोलते कि निफ्टी 4500 तक जाएगा। जब निफ्टी 6200 था तब सब अपना बेच देते औरऔरऔर भी

उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। बजट से पहले केवल एक कारोबारी दिन बचा है। लेकिन बाजार में छाई निराशा सुरसा के मुंह की तरह विकराल होती जा रही है। निफ्टी आज साढ़े तीन फीसदी से ज्यादा गिरकर 5242 तक चला गया। सेंसेक्स भी 600 अंक से ज्यादा गिरकर 17,560 तक पहुंच गया। हालांकि बंद होते-होते बाजार थोड़ा संभला है। इस गिरावट के पीछे खिलाड़ियों के खेल अपनी जगह होंगे। लेकिन ट्रेडर और निवेशक अब नए फेरऔरऔर भी

एरीज एग्रो (बीएसई – 532935, एनएसई – ARIES) के बारे में यूं समझ लीजिए कि वो कृषि रयासनों के धंधे में लगी भारत की बहुराष्ट्रीय कंपनी है। अभी तीन दिन पहले ही 21 फरवरी को उसकी सब्सिडियरी अमरक केमिकल्स ने संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा औद्योगिक क्षेत्र में सल्फर बेंटोनाइट की इकाई में व्यावसायिक उत्पादन शुरू किया है। कंपनी की बिजनेस रणनीति की झलक इस बात से मिल सकती है कि दुनिया में कृषि क्षेत्र में सल्फरऔरऔर भी

बाजार तलहटी पकड़ चुका है। निराशा अपने चरम पर पहुंच चुकी है। निवेशक फिलहाल स्टॉक्स से कन्नी काट रहे हैं। इनमें भी जो छोटे निवेशक हैं वे डेरिवेटिव सेगमेंट में मार्क टू मार्केट की अदायगी के लिए जो कुछ भी पास में है, उसे बेचे जा रहे हैं। मैं कल आम निवेशकों के मूड का पता लगाने के लिए गुजरात में तीन छोटी जगहों पर गया था। मैंने पाया कि यह बात उनके मन में कहीं गहरेऔरऔर भी

बजट सत्र शुरू हो रहा है। इसमें ऐसे सूत्र आने जा रहे हैं जो कई महीनों से शेयर बाजार को परेशान करनेवाली चिंताओं और समस्याओं का समाधान निकालने का सबब बनेंगे। बाकी क्या कहें? एफआईआई और उनके एजेंटों ने हमेशा की तरह इस बार भी आम निवेशकों को गच्चा दिया। बाजार (निफ्टी) जब 5200 पर पहुंच गया तो उन्होंने हल्ला मचवा दिया कि अभी इसमें 10-15 फीसदी और गिरावट आनी है। निवेशक घबराकर बेचकर निकलने लगे इसऔरऔर भी

बजट में नए आर्थिक सुधारों के बारे में प्रधानमंत्री के दावे ने बाजार पर अपना असर दिखा दिया। यह वो मूलाधार है जिस पर सारे देश और निवेशक समुदाय को पूरा यकीन होना चाहिए। इस हकीकत के मद्देनजर बाजार को पहले तो गिरकर 5200 तक जाना ही नहीं चाहिए था। लेकिन ऐसा हुआ तो उसकी वजह चालबाजी या जोड़तोड़ है और, बाजार में जोड़-तोड़ की कोई काट तो है नहीं। मंदड़ियों का कार्टेल अकेले दम पर बाजारऔरऔर भी

बाजार में 800 अंकों के सुधार का मतलब यह नही है कि अंधेरा खत्म, मुसीबत टल गई। हम जैसे ही यह सोचते हैं कि सब कुछ पटरी पर आ गया है, उससे पहले ही बिकवाली का नया झोंका सब कुछ फिर से पटरा कर देता है। कल मैं एक बिनजेस चैनल पर कार्यक्रम देख रहा था जहां कुछ ज्ञानी लोग एक सर्वेक्षण पर बहस कर रहे थे जिसका निष्कर्ष यह था कि देश के 97 फीसदी लोगऔरऔर भी

बाजार 473.59 अंक बढ़कर 18,000 के सबसे नाजुक स्तर को पार कर गया और 18,202.20 पर बंद हुआ है। मुद्रास्फीति, बढ़ती ब्याज दर की फिक्र और बाजार में 10 फीसदी की गिरावट के अंदेशे को धता बताते हुए अचानक एफआईआई व डीआईआई (घरेलू वित्तीय संस्थाओं) की खरीद चालू हो गई है। यहां तक कि खबरों के मुताबिक बाजार नियामक, सेबी ने भी 25 कंपनियों के शेयरों में आई गिरावट की जांच शुरू कर दी है। ऐसा होनाऔरऔर भी

शेयर बाजार और क्रिकेट के मैच ज्यादातर हमेशा फिक्स होते हैं। हालांकि छोटी-मोटी अवधि में अनजाने कारकों के चलते बाजार अक्सर चौंकाता भी है। यह बात मनगढ़ंत नहीं, बल्कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है। 2006 और 2007 में देश में मुद्रास्फीति की स्थिति इससे भी खराब थी। फिर भी 2007 में बाजार ने 21,300 का नया शिखर बनाया। इसलिए अगर आज विद्वान लोग मुद्रास्फीति और ब्याज दरें बढ़ने की चिंता को भारतीय इक्विटी बाजार की गिरावट कीऔरऔर भी

शेयर बाजार को सायास गिराने में लगे लोग भले ही यह बात न मानें। लेकिन सच यही है कि अर्थव्यवस्था से सकारात्मक संकेत आने शुरू हो गए हैं। सबसे बड़ा संकेत यह है कि खाद्य वस्तुओं के थोक मूल्यों पर आधारित मुद्रास्फीति की दर 29 जनवरी को समाप्त सप्ताह में करीब चार फीसदी की भारी गिरावट के साथ 13.07 फीसदी पर आ गयी है। ठीक इससे पहले के सप्ताह यह 17.05 फीसदी थी। सात हफ्ते में खाद्यऔरऔर भी