महीने का आखिरी गुरुवार। डेरिवेटिव सेगमेंट में सेटलमेंट का आखिरी दिन। निफ्टी का 4820 या 5000 होना इस बात पर निर्भर था कि बाजार चलानेवालों ने ऑप्शंस में किस तरफ का कॉल या पुट प्रीमियम पकड़ा है। जैसा पहले सामने आ चुका है कि 4600 पर पुट सौदे की बड़ी पोजिशन बन चुकी थी तो निश्चित रूप से 4600 की गुंजाइश खत्म हो गई थी। दूसरी तरफ ऐसा लगता है कि उन्होंने 5000 और 5100 की कॉलऔरऔर भी

बजाज इलेक्ट्रिकल्स देश की बड़ी व नामी कंपनी है जिस पर शायद ही कोई दो राय होगी। 72 साल पुरानी कंपनी है। शेखर बजाज इसके चेयरमैन व प्रबंध निदेशक हैं। बीते वित्त वर्ष 2010-11 में इसकी बिक्री 2739.43 करोड़ और शुद्ध लाभ 143.79 करोड़ रुपए रहा है। कंपनी की इक्विटी 19.90 करोड़ रुपए है जो दो रुपए अंकित मूल्य के 9.95 करोड़ शेयरों में विभाजित है। इस तरह सालाना आधार पर उसका ईपीएस (प्रति शेयर मुनाफा) 14.63औरऔर भी

आखिरकार भारत वैश्विक झटके से धीरे-धीरे उबर रहा है। हालांकि हमारे मंदड़िए बाजार को तोड़कर नीचे से नीचे ले जाने की हरचंद कोशिश में जुटे हैं। वे इसमें कामयाब नहीं हो पाएंगे और उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। यह अलग बात है कि ऑपरेटरों व एफआईआई का खेल रह-रहकर अपना प्रताप दिखाता रहता है। बाजार के संचालकों के लिए ऑप्शंस में कॉल व पुट राइटिंग के ऊंचे और नीचे स्तर से फायदा कमाकर घर ले जानेऔरऔर भी

रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) फिर कोल इंडिया को पीछे छोड़ बाजार पूंजीकरण में देश की पहले नंबर की कंपनी बन गई। आज उसका बाजार पूंजीकरण 2,50,648 करोड़ रुपए रहा, जबकि कोल इंडिया 2,47,538 करोड़ रुपए पर आ गई। ऊपर से कोल इंडिया को आज एक विदेशी ब्रोकिंग हाउस ने डाउनग्रेड भी कर दिया, जबकि यह अभी तक एफआईआई का सबसे चहेता स्टॉक बना हुआ है। मोटी-सी बात है कि अगर सेंसेक्स में शामिल कंपनियों के लाभार्जन को डाउनग्रेडऔरऔर भी

वीनस रेमेडीज साफ-सुथरी बीस साल पुरानी दवा कंपनी है। कॉरपोरेट गवर्नेंस के नियमों का बखूबी पालन करती है। आठ सदस्यीय निदेशक बोर्ड के चार सदस्य स्वतंत्र निदेशक हैं। देश की 50 प्रमुख दवा कंपनियों में शुमार है। 75 से ज्यादा उत्पाद हैं। दुनिया के 60 देशों में मौजूदगी है। तीन उत्पादन संयंत्र हैं। एक पंचकुला (पंजाब) में। दूसरा बड्डी (हिमाचल प्रदेश) में। और, तीसरा जर्मनी के शहर वेयरने में। पिछले पांच सालों में बिक्री 141.35 करोड़ रुपएऔरऔर भी

एक बार फिर मैंने बाजार को जबरदस्त निराशा के आगोश में डूबा हुआ देखा। इतनी निराशा कि लोगों को केवल घाटी दिख रही है, ठीक वहीं से उठता पहाड़ नहीं दिख रहा। माना कि वैश्विक मसलों ने भारतीय बाजार को घेर रखा है और सेंसेक्स को 16,000 तक गिरा डाला है। लेकिन यह ऐसा स्तर है जहां से बहुतों को भारतीय शेयरों में कायदे का मूल्य नजर आ रहा है। यही वजह है कि आज निफ्टी मेंऔरऔर भी

बाजार के गिरकर दुरुस्त होने का सिलसिला पूरा हुआ हो या न हो, सबसे पहले देशी-विदेशी फंडों, एचएनआई और ऑपरेटरों ने आगे बढ़कर मूल्यवान शेयरों की खरीद शुरू कर दी है। यह अलग बात है कि हफ्ते के अंत तक मंदड़ियों की मुराद पूरी गई। निफ्टी आज, शुक्रवार को 4800 से नीचे 4796.10 तक चला गया और बंद हुआ है कल से 1.99 फीसदी की गिरावट के साथ 4845.65 पर। सेंसेक्स भी 328.12 अंकों की तगड़ी चोटऔरऔर भी

निफ्टी में 5000 का स्तर अपने अंदर हरसंभव नकारात्मकता को सोखे हुए हैं। फिर भी गिरावट से इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि लंबी कूद के लिए कुछ कदम पीछे तो जाना ही पड़ता है। जैसा कि सामने आ चुका है कि निफ्टी में 4800 की सीरीज में जमकर पुट ऑप्शन सौदे हुए है जो दिखाता है कि ज्यादातर मंदड़िए चाहते हैं कि अंततः रुख पलटने से पहले बाजार 4800 तक चला जाए। आज तो मंदड़ियों काऔरऔर भी

भारतीय बाजार कतई पारदर्शी नहीं हैं और फिजिकल सेटलमेंट के अभाव में यहां बाजार संचालित प्रणाली का सिद्धांत पूरी तरह विफल है। यह इकलौता बाजार है जहां वीआईपी इंडस्ट्रीज बुक वैल्यू के 11 गुने पर ट्रेड हो सकता है, जबकि फर्स्टसोर्स सोल्यूशंस (एफएसएल) बुक वैल्यू से 50 फीसदी नीचे पड़ा हुआ है। आज एफएसएल 6.35 फीसदी गिरकर 11.80 रुपए पर पहुंच गया, जबकि उसकी बुक वैल्यू 21.42 रुपए है। दूसरी तरफ वीआईपी इंडस्ट्रीज आज 6.74 फीसदी बढ़करऔरऔर भी

विश्व स्तर पर भी लगता है कि बद से बदतर हालात के असर को पूरी तरह जज्ब किया जा चुका है। ओवरसोल्ड हालत में पहुंच चुके दुनिया के शेयर बाजार से अब यहां से उठते चले जाएंगे। इस बीच भारतीय शेयर बाजार भी बेहद ओवरसोल्ड स्थिति में पहुंच गया है। डेरिवेटिव सौदों के रोलओवर में केवल सात दिन बचे हैं। इसलिए भारतीय बाजार की दिशा अब केवल बढ़ने की ही होनी है। इसी सेटलमेंट में निफ्टी 5500औरऔर भी