तुम गिराने में लगे रहो, हम उठाएंगे

भारतीय बाजार कतई पारदर्शी नहीं हैं और फिजिकल सेटलमेंट के अभाव में यहां बाजार संचालित प्रणाली का सिद्धांत पूरी तरह विफल है। यह इकलौता बाजार है जहां वीआईपी इंडस्ट्रीज बुक वैल्यू के 11 गुने पर ट्रेड हो सकता है, जबकि फर्स्टसोर्स सोल्यूशंस (एफएसएल) बुक वैल्यू से 50 फीसदी नीचे पड़ा हुआ है। आज एफएसएल 6.35 फीसदी गिरकर 11.80 रुपए पर पहुंच गया, जबकि उसकी बुक वैल्यू 21.42 रुपए है। दूसरी तरफ वीआईपी इंडस्ट्रीज आज 6.74 फीसदी बढ़कर 839.35 रुपए पर पहुंच गया, जबकि उसकी बुक वैल्यू मात्र 77.86 रुपए है।

इसमें कौन-सा और कहां का संतुलन है? अगर एफआईआई के निवेश वाले इन दोंनो स्टॉक्स पर गौर करें तो यह दावा एकदम बेबुनियाद लगता है कि हमारे बाजार विकसित हो चुके हैं और यहां कोई चालबाजी नहीं चलती। भारत के लोग इस समय पूरी दुनिया में खर्च और निवेश की मेरुदंड बने हुए हैं। अगर अपने शेयर बाजार में भी उनको खास वरीयता दी गई होती तो आज स्थिति एकदम भिन्न होती।

खैर, इस पर मैं कुछ कर नहीं सकता क्योंकि जो लोग इसके शिकार हैं, जब वे ही अपनी आवाज उठाने को तैयार नहीं हैं तो अकेले मेरे आवाज उठाने का क्या फायदा? जान लें कि एक अण्णा हज़ारे ने सरकार को नहीं झुकाया है, बल्कि उनके पीछे खड़ी जनता की ताकत के आगे सरकार को झुकना पड़ा है।

बहुत संभव है कि बाजार 4900 तक गिरता चला जाए। लेकिन मैंने आपको बार-बार बताया है कि निफ्टी में 5000 के स्तर पर एफआईआई की बिकवाली को सोखने के लिए पर्याप्त खरीदारी होगी। जाहिरा तौर पर यह खरीदारी भारत के छोटे निवेशकों की तरफ से नहीं, बल्कि एचएनआई, ऑपरेटरों, कॉरपोरेट क्षेत्र और डीआईआई की तरफ से आएगी। इससे बाजार में मूल्य-आधारित खरीद को थोड़ा आधार तो जरूर मिलेगा।

सुबह से ही साफ था कि एफआईआई निफ्टी को तोड़कर 4920 तक ले जाना चाहते हैं। उन्होंने 5040 के स्तर को तोड़कर ऐसा करने की पुरजोर कोशिश भी की। लेकिन उनका दांव गलत पड़ गया। निफ्टी 5112.15 तक जाने के बाद 0.41 फीसदी की बढ़त लेकर 5056.60 पर बंद हुआ है। वैसे, वे इसे 4500 तक ले जाएं या 4800 तक, मेरा मानना है कि अगर आप उनकी राय पर चलेंगे तो आपको कभी निवेश करने का मौका नहीं मिलेगा। अपनी राय बनाइए और 5000 के आसपास जमकर खरीद कीजिए। अगर वे निफ्टी को 4800 तक भी ले गए तो कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि हम इसके बाद 7000 पर बेचकर मुनाफा कमा लेंगे।

जो हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा, उससे बड़ी गलती कोई दूसरा कर ही नहीं सकता क्योंकि उसने तो गलती करके सीखने का मौका भी गंवा डाला।

(चमत्कार चक्री एक अनाम शख्सियत है। वह बाजार की रग-रग से वाकिफ है। लेकिन फालतू के कानूनी लफड़ों में नहीं उलझना चाहता। सलाह देना उसका काम है। लेकिन निवेश का निर्णय पूरी तरह आपका होगा और चक्री या अर्थकाम किसी भी सूरत में इसके लिए जिम्मेदार नहीं होंगे। यह मूलत: सीएनआई रिसर्च का फीस-वाला कॉलम है, जिसे हम यहां मुफ्त में पेश कर रहे हैं)

1 Comment

  1. mahangai bhi aab sasti lagney lagi hai humain, kyoki

    hazarro mey lutney kee aadat pad chuki hai humain !

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