संसद का चोला छोटा पड़ा लोकतंत्र के लिए, उमड़ा ख्वाहिशों का जन-सैलाब

भारत का लोक करवट बदल रहा है। लोकतंत्र नई शक्ल में ढलने को बेताब है। उत्तर से लेकर दक्षिण और पूरब से लेकर पश्चिम तक लोग एक भाषा में बोल रहे हैं – अण्णा तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं। सच्चे लोकतंत्र की ख्वाहिश इंडिया गेट से लेकर आजाद मैदान और सड़कों व गली-कूचों तक नारे बनकर निकल रही है। नौजवान शेर की तरह दहाड़ रहे हैं, जबकि सरकार भीगी बिल्ली या बकरी बनी मिमियाती नजर आ रही है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संसद में अण्णा पर लिखित बयान पढ़ा। ऐसे जैसे कोई नेता नहीं, बकरी अंग्रेजी में मिमिया रही हो।

प्रधानमंत्री ने कहा है कि अण्णा हज़ारे ने जो रास्ता चुना है, वो लोकतंत्र के लिए नुक़सानदेह है। गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि अण्णा की टीम जिस जन लोकपाल बिल की बात कर रही है, उसे संसद से नहीं पास कराया जा सकता। तो क्या इसका मतलब अण्णा का समर्थन कर रही बीजेपी या समाजवादी पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा कानून नहीं बनने देना चाहती? शायद चिदंबरम का इशारा इसी तरफ था कि राजनीतिक दल जन लोकपाल बिल को पास नहीं होने देंगे।

दूसरी तरफ अवाम भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारे लगाते हुए लोकतंत्र का दूसरा मतलब पेश कर रहा है। इसे उनके एक नारे से समझा जा सकता है कि गली-गली में शोर है, सारे नेता चोर हैं। यह सच है। जो भावना अभी तक लोगों के दिलों में कैद थी, वह अण्णा के आंदोलन के बहाने अब खुलकर जुबान पर आ रही है। इस अर्थ में यह जबरदस्त राजनीतिक आंदोलन है। लेकिन चूंकि यह हमारी संसदीय लोकतंत्र की व्यवस्था और तमाम राजनीतिक दलों को ठेंगे पर रख रहा है, इसलिए ‘विद्वान लोग’ इसे अराजनीतिक आंदोलन भी कह रहे हैं, जो उनके मुताबिक आखिरकार लोकतंत्र-विरोधी साबित होगा।

कल की बात कल साफ होगी, लेकिन आज तो इतना साफ हो गया है कि भारतीय लोकतंत्र के लिए संसद का वर्तमान चोला छोटा पड़ने लगा है। इंडिया गेट पर रंग दे बसंती चोला का गीत यही कह रहा है कि चिदंबरम, मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी, मुलायम सिंह, लालकृष्ण आडवाणी, मायावती और प्रकाश या वृंदा करात जिस संसदीय पवित्रता की कायल हैं, वह अवाम की लोकतांत्रिक ख्वाहिशों के लिए घुटन का सबब बन गई है।

अतीत में भी रह-रहकर यह आवाज उठती रही है। जयप्रकाश नारायण के पीछे जनता की यही अधूरी ख्वाहिशें बोल रही थीं। वी पी सिंह ने राजीव के खिलाफ नारा बुलंद किया तो उनके पीछे भी इन्हीं तमन्नाओं से लाइन लगा दी। आज अण्णा के साथ वही सोई इच्छाएं जागकर आवाज लगा रही हैं। आज हर कोई कह रहा है – मैं अण्णा हूं। हमें लोकपाल बिल चाहिए, जोकपाल बिल नहीं। सरकार अगर इस सच को जितना जल्दी से जल्दी समझ ले, उतना ही अच्छा है। नहीं तो उसका बचा हुआ कवच-कुंडल भी चकनाचूर हो जाएगा।

असली सवाल विश्वसनीयता का है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कितना भी कहें कि उनकी सरकार मज़बूत लोकपाल के पक्ष में है और इसकी एक प्रक्रिया है और क़ानून बनाने का हक़ संसद को है। लेकिन आंदोलन में उतरे किसी भी शख्स को प्रधानमंत्री पर यकीन नहीं है। विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने प्रधानमंत्री के बयान के बाद कहा कि सरकार अपने भ्रष्टाचार को छिपाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, “देश के लोगों का सरकार से भरोसा उठ गया है। इसलिए देश का युवा सड़कों पर उतर आया है।”

लेकिन हकीकत यह है कि लोगों का भरोसा बीजेपी और अन्य विपक्षी पार्टियों से भी उठ गया है। इस निर्वात में प्रधानमंत्री पूरी बात को नया रंग देना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “भारत विश्व के मंच पर आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है, लेकिन कुछ शक्तियां ऐसा नहीं चाहती। हमें ऐसी शक्तियों के हाथ में नहीं खेलना चाहिए।”

प्रधानमंत्री जी! क्या मतलब है आपका? क्या अण्णा के आंदोलन के पीछे ऐसे शक्तियां हैं जो भारत का विकास नहीं होना देना चाहतीं? अरे, भ्रष्टाचारियों की सरकार के ईमानदार सरदार! कैसी इंदिरा गांधी के जमाने वाली पुरानी राजनीति आजमा रहे हो! इंदिरा गांधी गरीबी से लेकर महंगाई के पीछे विदेशी हाथ का शोर उठाया करती थीं। आप तो ऐसा न करो।

इस बीच अण्ण हज़ारे का अनशन जारी है। हो सकता है कि गुरुवार की सुबह जगह बदलकर रामलीला मैदान हो जाए। लेकिन जगह और नाम में क्या रखा है? अब तो हर कोई अण्णा है और हर जगह आंदोलन या अनशन के लिए सबसे मुफीद है। लड़ाई फिलहाल जन लोकपाल विधेयक लाने की है। लेकिन पूर्णाहुति सच्चे लोकतंत्र की स्थापना के साथ होनी चाहिए। तथास्तु! आमीन!! ऐसा ही हो!!!

1 Comment

  1. SIRJI, ME CHATA HU KI AAP ISS MSG KO SAB KE SAMNE RAKHE, TAKI HAMARE DESH KE YOUNG GENERATION PADE OR HAMARE DESH KE GADDAR NETA SAMAJ SAKE OR HUM AANDOLAN KAR SAKE YE, DESH KO NAHI APNI POCKET MONEY DEKTE HE, INKO DSH NAHI APNA JEB BHARNA HOTA HE, AGAR YE DESH KE LIYE KAR RAHE HOTE TO KAB KA BILL PASS KAR DIYE HOTE MAGAR YE DESH KE NAAM ME GADDAR HE, YE AJMAL KASAB OR ……NAAM BHUL GAYA HU, UNSE BHI KHATARNAK HE, YE DESH KE NAYAK NAHI KHAL NAYAK HE,

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