देशी-विदेशी कॉरपोरेट क्षेत्र का एक ही सूत्र और मंत्र है अपना मुनाफा अधिकतम करते जाना। इसी पर उनका समूचा वजूद टिका है। मुनाफा घटता जाए तो वे एक दिन हाथ खड़ाकर दीवालिया हो जाते हैं। फिर भी वित्त मंत्री उन पर कृपा बरसाने से बाज़ नहीं आ रहीं। साथ ही देश को झांसा देती जा रही हैं कि देशी-विदेशी कंपनियों पर जितनी कृपा बरसेगी, वे उतना ही निवेश करेंगी और रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे। लेकिनऔरऔर भी

करोडों बेरोजगारों के लिए रोज़ी-रोज़गार के अवसर और रोज़ी-रोज़गार में लगे लोगों की आय व बचत को बढ़ाना। यही हमारी अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौती है। इसे सुलझाने से ही देश में मांग या खपत बढ़ेगी, जिससे निजी क्षेत्र नया पूंजी निवेश करेगा। लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लगता है कि स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹50,000 से बढ़ाकर ₹75,000 कर देने और टैक्स-स्लैब में मामूली फेरबदल कर देने से अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ जाएगी। इससे 15 लाख सेऔरऔर भी

जो जितना कमजोर, उससे उतना ही ज्यादा टैक्स। आप जानकर चौंक जाएंगे कि दिल्ली के ओल्ड राजिंदर नगर के जिस कोचिंग सेंटर में सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे तीन छात्रों की मौत हो गई, उसके बारे में केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय के पास कोई जानकारी नहीं है। राज्यसभा में ओल्ड राजिंदर नगर के हादसे तो मुद्दा उठा तो सरकार के पास केवल जीएसटी वसूली के अलावा कोई जवाब नहीं था। शिक्षा मंत्रालय को बस इतनाऔरऔर भी

अपने यहां टैक्सों की विचित्र स्थिति है। सालाना करोड़ों में कमा रहा कॉरपोरेट क्षेत्र कुछ लाख कमानेवाले लोगों से कम टैक्स देता है और किसी तरह गुजारा कर रहे देश के आमजन जीएसटी, एक्साइज़ व कस्टम शुल्क के रूप में सबसे ज्यादा टैक्स देते हैं। बजट के मुताबिक सरकार को चालू वित्त वर्ष 2024-25 में कॉरपोरेट टैक्स से ₹10.20 लाख करोड़ मिलने हैं, जबकि इनकम टैक्स से मिलनेवाली रकम इससे अधिक ₹11.87 लाख करोड़ रहेगी। वहीं, आमजनऔरऔर भी

बजट को तीन अहम काम करने थे। निजी निवेश बढ़ाने के इंतज़ाम, रोज़गार के अवसर और आम खपत को बढ़ाना। लेकिन खपत बढ़ाने के लिए इनकम टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने के बजाय कैपिटल गेन्स टैक्स और एसटीटी बढ़ा दिया। संगठित क्षेत्र में नई नौकरी पानेवाले को पहले महीने ₹15,000 देने और कर्मचारियों को दो साल तक ईपीएफओ में ₹3000 रुपए तक के मासिक योगदान के रीइम्बर्समेंट से नई नौकरियां कैसे पैदा हो सकती हैं? दावा किऔरऔर भी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अब तक के ट्रैक-रिकॉर्ड से साबित कर दिया है कि वे सरकार का खज़ाना भरने के लिए टैक्स वसूलने और दूसरे तरीके अपनाने में किसी भी हद तक गिर सकते हैं। रिजर्व बैंक से एकबारगी ₹2.11 लाख करोड़ का रिकॉर्ड लाभांश वसूलना आज तक कोई दूसरा नहीं कर सका। वहीं, जनता से ज्यादा से ज्यादा टैक्स वसूलने का कोई भी मौका वे नहीं चूकते। इस बार भी नहींऔरऔर भी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण में साल 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने का कोई रोडमैप नहीं है। इसमें भले ही अगले पांच साल में 4.1 करोड़ युवाओं के लिए रोज़गार, कौशल व अन्य अवसर बनाने पर दो लाख करोड़ रुपए खर्च करने की बात हो, लेकिन इसका कोई कार्यक्रम बजट में नहीं है। इस साल शिक्षा, रोज़गार व कौशल के लिए 1.48 लाख करोड़ रुपए के प्रावधान की बात है। लेकिन जब एकऔरऔर भी

नई एनडीए सरकार के पहले बजट का दिन। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 11 बजे से लोकसभा में बजट भाषण पढ़ना शुरू कर देंगी। भाषण के पहले हिस्से में अधिकांश लोगों का ध्यान इस पर होगा कि रिजर्व बैंक से मिले 2.11 लाख करोड़ रुपए के छप्पर-फाड़ लाभांश के बाद सरकार अपना राजकोषीय़ घाटा कम करेगी या उसे पांच साल तक 81.35 करोड़ गरीबों को मुफ्त राशन देने की फूड सब्सिडी के हवाले कर देगी। विकसित भारत केऔरऔर भी

अपने सुंदर व सुरक्षित भविष्य की आकांक्षा में डूबा सारा भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ बड़ी उम्मीद से देख रहा है कि वे भाजपा को 303 के बहुमत से 240 सीटों के अल्पमत तक सिमटा देनेवाले जनादेश का सम्मान करते हुए एनडीए सरकार के पहले बजट में कुछ मूलभूत आर्थिक सुधार करते हैं या विकसित भारत के सब्ज़बाग की पुरानी चाशनी ही फेटते रहेंगे। यह बजट इस मायने में महत्वपूर्ण है कि इसमें जनाकांक्षाओं के अनुरूपऔरऔर भी

हमारी निहित संभावना, आकार-प्रकार और मौजूदा भू-राजनीतिक हालात ने अमेरिका व यूरोप समेत समूचे पश्चिमी जगत की नज़र में भारत को आर्थिक व राजनीतिक रूप से चीन की जवाबी शक्ति बना दिया है। इसलिए वो भारत को चढ़ाने का कोई मौका नहीं चूकते। यह अलग बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका भरपूर निजी इस्तेमाल कर रहे हैं। हाल ही में उनका रूस जाना पश्चिमी दुनिया से मोलतोल करने का हीऔरऔर भी