अकेले इनफोसिस में इतना दम है कि वह पूरे बाजार को दबाकर बैठा सकता है। शुक्रवार को यह बात साबित हो गई। सेंसेक्स 238.11 अंक गिर गया, जिसमें से 201.82 अंक का योगदान अकेले इनफोसिस का था। वह भी तब, जब सेंसेक्स में इनफोसिस का योगदान 8.18 फीसदी है। सेंसेक्स में रिलायंस इंडस्ट्रीज का योगदान सबसे ज्यादा 9.44 फीसदी और आईटीसी का उससे कम 9.02 फीसदी है। इस तरह सेंसेक्स में वजन के मामले में इनफोसिस तीससेऔरऔर भी

पहले लंगोटी हुआ करती थी। कहा जाता था कि भागते भूत ही लंगोटी ही भली। लंगोटी फिर चड्ढी हो गई। और, अब चड्ढी में भी तमाम ब्रांड हो गए। लोकल से लेकर ग्लोबल तक। अमेरिका का ऐसा ही ब्रांड है जॉकी। देखे होंगे आपने इसके विज्ञापन। अमेरिकी कंपनी जॉकी इंटरनेशनल के इस ब्रांड को भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल व संयुक्त अरब अमीरात में बेचने का इकलौता लाइसेंस मिला हुआ है पेज़ इंडस्ट्रीज़ को, जिसके एवज में उसेऔरऔर भी

बड़ी जटिल सोच और संरचना है बाज़ार की। औदयोगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के फरवरी के आंकड़े तो खराब ही रहे। मात्र 4.1 फीसदी औद्योगिक उत्पादन बढ़ा है फरवरी में। लेकिन इससे भी बड़ा सदमा यह था कि जनवरी में आईआईपी में 6.8 फीसदी बढ़त के जिस आंकड़े को लेकर खुशियां मनाई गई थीं, वह झूठा निकला। अब सीएसओ (केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय) का कहना है कि चीनी उद्योग ने जनवरी के बजाय नवंबर से जनवरी तक के आंकड़ेऔरऔर भी

मित्रों, इस कॉलम में जब भी हम किसी शेयर में निवेश की सिफारिश करते हैं तो अक्सर आगाह करते रहते हैं कि खुद ठोंक-बजाकर देख लेने के बाद ही निवेश करें। जैसे, 11 अप्रैल 2011 को हमने यहां सुप्रीम इंडस्ट्रीज में निवेश की सलाह देने के साथ लिखा था, “कोई कंपनी जब अच्छी तरह में समझ में आ जाए, उसमें भावी विकास की गुंजाइश नजर आए, तभी उसके शेयरों में निवेश करें। हमारे या किसी और केऔरऔर भी

बाजार बंद होते-होते साफ हो चुका था कि इंडोनेशिया में रिक्टर पैमाने पर 8.7 तीव्रता के भूकंप से भारत में किसी सुनामी का खतरा नहीं है। यह भी साफ होने लगा था कि इंडोनेशिया के जिस इलाके में भूकंप आया है, वहां से वो इलाका काफी दूर और अप्रभावित है, जहां से भारत की तमाम कंपनियां कोयला आयात करती हैं। लेकिन माहौल में डर छा चुका था और कोयला आयात करनेवाली तमाम भारतीय कंपनियों के शेयर गिरनेऔरऔर भी

सब वही। धंधा वही। बरक्कत वही। लेकिन बाजार ने किसी भी वजह से नजरों से गिरा दिया तो कंपनी का शेयर धड़ाम से नीचे आ जाता है। हरियाणा में गुड़गांव से संचालित होनेवाली कंपनी एचएसआईएल लिमिटेड के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है। करीब नौ महीने पहले, 29 जुलाई 2011 को उसका दो रुपए अंकित मूल्य का शेयर 245.80 रुपए पर इसलिए था क्योंकि बाजार से उसे एकबारगी चढ़ा दिया था और वो 19.71 के पी/ई अनुपातऔरऔर भी

दक्षिण भारत की बदनाम कंपनी पिरामिड साइमीरा को खत्म करने का सिलसिला आखिरी मुकाम पर पहुंचने लगा है। मद्रास हाईकोर्ट की तरफ से नियुक्त परिसमापक (लिक्विडेटर) ने 14 मई की तारीख मुकर्रर की है। तब तक कंपनी को कर्ज देनेवालों को अपने दावों का प्रमाण पेश कर देना होगा। उन्हें इस बाबत एक हलफनामा परिसमापक के पास जमा कराना होगा। चेन्नई में परिसमापक के कार्यालय की तरफ से कहा गया है कि वहां निर्धारित फॉर्मैट में ऋणऔरऔर भी

हल्ला था कि धनलक्ष्मी बैंक का अधिग्रहण होने जा रहा है और वह अपनी कम से कम 30 शाखाएं बंद कर देगा। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस में बैंक के सीईओ व प्रबंध निदेशक पीजी जयकुमार ने स्पष्ट कह दिया, “शाखाओं को बंद करने की हमारी कोई योजना नहीं है। हम बढ़ना चाहते हैं।” बता दें कि अधिग्रहण की चर्चाओं के बीच धनलक्ष्मी बैंक का शेयर पिछले एक महीने में 57.20 रुपए सेऔरऔर भी

आइशर मोटर्स का दस रुपए अंकित मूल्य का शेयर 4 मई 2011 को बीएसई में 1119 रुपए की तलहटी पर था। ठीक 11 महीने बाद पिछले हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन, 4 अप्रैल 2012 को 2210 रुपए की चोटी पर जा पहुंचा। इसी दौरान एनएसई में यह 1114 रुपए से 2214 रुपए तक पहुंचा है।. न्यूनतम से उच्चतम के बीच करीब-करीब दोगुना फासला! 11 महीने में 98 फीसदी का रिटर्न!! यह है शेयर बाजार में निवेश कीऔरऔर भी

सारी दुनिया को अरसे से पता था कि चूंकि एस्ट्राज़ेनेका फार्मा इंडिया में विदेशी प्रवर्तक कंपनी की इक्विटी हिस्सेदारी 90 फीसदी है। इसलिए पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी के दिशानिर्देशों के मुताबिक उसे जून 2013 तक इसे घटाकर 75 फीसदी पर लाना होगा। अन्यथा उसे शेयर बाजार की गलियां छोड़कर कंपनी को डीलिस्ट कराना होगा। लेकिन महीने भर पहले 6 मार्च को जब देश के सबसे बड़े आर्थिक अखबार इकनॉमिक टाइम्स ने पेज नंबर 12 की लीडऔरऔर भी