अच्छे लोग, बुरे लोग। अच्छी कंपनियां, बुरी कंपनियां। अब अगर आप निवेश के लिए किसी ईश्वर भुवन होटल्स जैसी गुमनाम कंपनी को चुनते हैं तो सचमुच ईश्वर ही आपका मालिक है। कंपनी आपकी बचत लेकर गधे के सिर से सींग की तरह गायब हो जाएगी। लेकिन क्या करें! हम तो फास्टफूड के आदी हो चुके हैं। सब कुछ पका-पकाया चाहिए। किसी ने बताया, टिप दी, खरीद लिया। डूब गए तो शेयर बाजार को लाख-लाख गालियां देने लगे।औरऔर भी

मैकनल्ली भारत इंजीनियरिंग कंपनी इस साल अपनी स्वर्ण जयंती बना रही है। कोलकाता के विलियमसन मैगर समूह की कंपनी है। 1961 से कार्यरत कंपनी का तंत्र बाहर तक फैला है। फ्रांस, रूस, पोलैंड, जर्मनी, चीन व यूक्रेन तक की कंपनियों से तकनीकी सहयोग समझौता है। दो साल पहले 2009 में इसने जर्मन कंपनी केएचडी हमबोल्ट वेडाग की कोयला व खनन टेक्नोलॉजी डिवीजन खरीद ली। हंगरी में भी इसकी सब्सडियरी है। लेकिन सारे तामझाम के बावजूद है यहऔरऔर भी

देश की आर्थिक विकास दर जून से सितंबर 2011 तक की तिमाही में 6.9 फीसदी रही है। यह सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में दो सालों से ज्यादा वक्त में किसी भी तिमाही में हुई सबसे कम विकास दर है और लगातार तीसरी तिमाही में 8 फीसदी से नीचे रही है। चिंता की बात यह है कि इस दौरान मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र की विकास दर मात्र 2.7 फीसदी रही है, जबकि खनन क्षेत्र बढ़ने के बजाय 2.9 फीसदी घटऔरऔर भी

बाजार के बारे में क्या कहा जाए! यहां कोई न्यूनतम स्तर भी न्यूनतम स्तर नहीं होता। जैसे, नव भारत वेंचर्स ने पिछले साल 29 नवंबर 2010 को 295.10 रुपए पर तलहटी बनाकर 302 रुपए पर बंद हुआ तो उसका तब का पी/ई अनुपात 5.33 था और शेयर की बुक वैल्यू थी 234.06 रुपए। ऐसे में इसमें निवेश की सलाह तो बनती ही थी। लेकिन यह शेयर 30 अगस्त 2011 को 158 रुपए के नए न्यूनतम स्तर पहुंचऔरऔर भी

एस्कोर्ट्स लिमिटेड बनी तो 1960 में। लेकिन इसके बनने की शुरुआत देश को आजादी मिलने से तीन साल पहले 1944 में ही हो गई थी। कंपनी ट्रैक्टर व अन्य कृषि उपकरण ही नहीं, ऑटो कंपोनेंट और रेलवे व कंस्ट्रक्शन के काम के उपकरण भी बनाती है। उसने बाकायदा अलग से अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी एस्कोर्ट्स कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट नाम से बना रखी है। कंपनी ने कल ही वित्त वर्ष 2010-11 के सालाना नतीजे घोषित किए हैं। आपऔरऔर भी

सभी आवश्यक सूचनाओं तक सबकी पहुंच। किसी भी बाजार के कुशलता से काम करने की यह अनिवार्य शर्त है। ध्यान दें, सूचनाओं की उपलब्धता ही पर्याप्त नहीं, उनकी पहुंच जरूरी है। जो फेंच न जानता हो, उसे फ्रेंच में जानकारी देना महज एक अनुष्ठान भर पूरा करना है। लेकिन अपने यहां, खासतौर पर शेयर बाजार में यही हो रहा है। एक तो सारी सूचनाएं अंग्रेजी में, दूसरे ऐसा घालमेल कि आम निवेशकों को कुछ पल्ले ही नऔरऔर भी

हर चमकनेवाली चीज सोना नहीं होती। है तो यह कहावत, लेकिन चमक के पीछे के सच को समझने में काफी मदद करती है। राजेश एक्सपोर्ट्स की चमक का भी कुछ ऐसा ही मामला है। अभी दस दिन पहले ही उसने सितंबर तिमाही के नतीजे घोषित किए हैं। साल भर पहले की तुलना में बिक्री 14.43 फीसदी बढ़कर 5767.03 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 45.21 फीसदी बढ़कर 107.08 करोड़ रुपए हो गया। कंपनी की अधिकांश आय निर्यात सेऔरऔर भी

शेयर बाजार किसी दिन अगर 300-400 अंक गिर जाता है तो इससे भारत की विकासगाथा का अंत नहीं होता। इतिहास गवाह है कि बाजार इससे भी बहुत-बहुत बड़ी गिरावटों के बाद भी संभलकर शान से उठ खड़ा हुआ है। जो लोग बाजार में 15-20 साल से सक्रिय होंगे, उनको याद होगा कि 1995-97 के दो सालों में अभी जैसे ही हालात थे। मुद्रास्फीति ज्यादा थी। ब्याज दरें ऊंची थी। सरकार नीतिगत फैसलों में लुंजपुंज हुई पड़ी थी।औरऔर भी

जब मुंबई व बैंगलोर एयरपोर्ट के संचालन से लेकर बड़ी-बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में लगी जीवीके पावर जैसी कंपनी का शेयर पेनी स्टॉक बनने की दिशा में बढ़ रहा हो (कल वो 10.21 रुपए पर पहुंच गया), जब अहमदनगर फोर्जिंग जैसी मजबूत कंपनी का शेयर साल भर में 7.97 के पी/ई से घटकर 3.17 के पी/ई पर (168.80 रुपए से 94 रुपए) पर ट्रेड होने लगा हो तो वाकई सोचना पड़ेगा कि शेयरों के भाव आखिर किन चीजोंऔरऔर भी

बाजार में इस कदर आंधी आई हुई है कि बड़े-बड़े शेयर औंधे मुंह गिरे पड़े हैं। कल हर मिनट कोई न कोई स्टॉक टपक कर गिरता गया। एनडीटीवी 36.30 रुपए, बीएजी फिल्म्स 4.36 रुपए, मुक्ता आर्ट्स 30.50 रुपए, 3आई इनफोटेक 18.45 रुपए, सुज़लॉन एनर्जी 21.10 रुपए, रामसरूप इंडस्ट्रीज 7 रुपए, बारट्रॉनिक्स 42.60 रुपए, आरकॉम 69.50 रुपए, जीटीएल इंफ्रा 8.30 रुपए, इंडियाबुल्स सिक्यूरिटीज 6.79 रुपए, जेएसडब्ल्यू एनर्जी 39.35 रुपए, एसकेएस माइक्रो फाइनेंस 116.30 रुपए, मॉयल 222 रुपए वऔरऔर भी