ज्यादा उछल-कूद से डरे क्यों डाबर!

शेयर बाजार किसी दिन अगर 300-400 अंक गिर जाता है तो इससे भारत की विकासगाथा का अंत नहीं होता। इतिहास गवाह है कि बाजार इससे भी बहुत-बहुत बड़ी गिरावटों के बाद भी संभलकर शान से उठ खड़ा हुआ है। जो लोग बाजार में 15-20 साल से सक्रिय होंगे, उनको याद होगा कि 1995-97 के दो सालों में अभी जैसे ही हालात थे। मुद्रास्फीति ज्यादा थी। ब्याज दरें ऊंची थी। सरकार नीतिगत फैसलों में लुंजपुंज हुई पड़ी थी। उस दरम्यान सेंसेक्स बार-बार 2800 से 4400 के बीच उठता-गिरता रहा। एक कदम आगे, दो कदम पीछे। अच्छी खबर आई तो उठ गया। फिर कठोर हकीकत ने हड़काया तो जमीन पर आ गया। इस बार भी लगता है कि बाजार कुछ सालों तक एक रेंज में ही बंधा रहेगा।

आज हम जिस स्टॉक की चर्चा कर रहे हैं, वह भी एक दायरे में ही बंधकर चलता है। डाबर इंडिया। भारत की अपनी पुश्तैनी एफएमसीजी (फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स) कंपनी। दुनिया की सबसे बड़ी आयुर्वेदिक व प्राकृतिक हेल्थकेयर कंपनी। बराबर आंखों के सामने रहती है विज्ञापनों व खबरों के जरिए। ताजा खबर यह है कि जगदाले हेल्थकेयर के ड्रिंक्स बिजनेस को हथियाने की दौड़ में ग्लैक्सो स्मिथ क्लाइन, एब्बट लैब, ज़ाइडस कैडिला और विप्रो के साथ वो भी शामिल है। लेकिन दिक्कत यह है कि उसका शेयर कभी दौड़ता ही नहीं।

उसका एक रुपए अंकित मूल्य का शेयर कल बीएसई (कोड – 500096) में 98.10 रुपए और एनएसई (कोड – DABUR) 97.95 रुपए पर बंद हुआ है। ए ग्रुप का शेयर है तो डेरिवेटिव सौदे भी होते हैं। आज खत्म हो रहे सेटलमेंट में उसके फ्यूचर्स का भाव कल 97.80 रुपए रहा है। महीने भर पहले भी यह शेयर 98.80 पर था। बीच में 3 नवंबर को 102.50 रुपए तक गया। फिर वापस आ गया। इस साल 17 जून 2011 को 122 रुपए तक चला गया था। वही उसके एक साल नहीं, पांच साल का उच्चतम स्तर है। जबकि नीचे में वह इसी साल 28 जनवरी 2011 को 86.70 रुपए तक चला गया था। पिछले साल सितंबर में कंपनी ने एक पर एक बोनस शेयर दिया था। लेकिन बोनस से पहले और बाद में शेयर वही 98 से 111 के बीच डोलता रहा।

सितंबर 2011 की तिमाही में कंपनी की बिक्री 10.14 फीसदी बढ़कर 875.47 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 9.92 फीसदी बढ़कर 138.66 रुपए हो गया है। ब्रोकरेज फर्म एडेलवाइस के डाटाबैंक के अनुसार पिछले तीन सालों में डाबर की बिक्री 19.98 फीसदी और शुद्ध लाभ 19.71 फीसदी की सालाना चक्रवृद्धि दर से बढ़ा है। कंपनी का नियोजित पूंजी पर रिटर्न 42.66 फीसदी और इक्विटी पर रिटर्न 48.74 फीसदी के शानदार स्तर पर है। उसका ठीक पिछले बारह महीनों (टीटीएम) का ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) 2.79 रुपए है। इस तरह उसका शेयर फिलहाल 35.16 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। यह भारतीय एफएमसीजी कंपनियों में मैरिको से सस्ता और गोदरेज कंज्यूमर व इमामी लिमिटेड से महंगा है। लेकिन यह भी तो सच है कि डाबर का ब्रांड गोदरेज, इमामी व मैरिको की बनिस्बत कहीं ज्यादा व्यापक व स्वीकार्य है।

खैर, ज्यादा कुछ न कहकर बस इतना बताना है कि ब्रोकरेज फर्म एचडीएफसी सिक्यूरिटीज ने इसी महीने 3 नवंबर को जारी रिसर्च रिपोर्ट में कहा था कि यह शेयर अगले 12 महीनों में 120 रुपए तक जाएगा। उसका अनुमान है कि कंपनी का ईपीएस चालू वित्त वर्ष 2011-12 में 3.9 रुपए और इसके बाद 2012-13 में 4.8 रुपए रहेगा। अगले वित्त वर्ष के ईपीएस 4.8 रुपए को 25 के अनुमानित पी/ई से गुणा करके उसने शेयर के लिए 120 रुपए का भाव निकाला है। वैसे, साल भर में 20 फीसदी का क्या बुरा है। हमारा भी मानना है कि डाबर में कम से कम साल भर के नजरिए के साथ इस वक्त निवेश कर देना चाहिए। ऐसा करना एकदम सुरक्षित रहेगा, क्योंकि दुनिया में कुछ भी हो जाए, डाबर के उत्पादों का बिकना कभी नहीं बंद होगा।

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