भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) शेयरों की तरह म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए भी डीमैट खातों को जरूरी बनाने पर विचार कर रहा है। सेबी मे इस बारे में बीते मई माह में म्यूचुअल फंडों के साझा मंच एम्फी (एसोसिशयन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया) को एक पत्र भेजकर पूछा था कि क्यों न म्यूचुअल फंड निवेश को भी डीमैट एकाउंट से जोड़ दिया जाए। एम्फी को अपने सुझाव 15 जून, मंगलवार तक सेबी केऔरऔर भी

देश में शेयर ट्रेडिंग के लिए जरूरी डीमैट खातों की संख्या अभी भले ही 1.69 करोड़ तक सीमित हो, लेकिन इनका दायरा देश के 80 फीसदी पिनकोड पतों तक फैल चुका है। यह दावा है देश की प्रमुख डिपॉजिटरी संस्था एनएसडीएल (नेशनल सिक्यूरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड) का। एनएसडीएल में डीमैट खातों की संख्या अभी 1.02 करोड़ है, जबकि दूसरी डिपॉजिटरी संस्था सीडीएसएल (सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज इंडिया लिमिटेड) में इस समय कुल 67.06 लाख डीमैट खाते हैं। इनमें बंदऔरऔर भी

अर्धसत्य, चक्र, अपहरण, आघात और हजार चौरासी की मां जैसी चर्चित फिल्मों के जानेमाने प्रोड्यूसर मनमोहन शेट्टी पर पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने एडलैब्स के शेयरों में इनसाइडर ट्रेडिंग के लिए एक करोड़ रुपए का जुर्माना लगा दिया है। मामला अप्रैल 2006 का है जब मनमोहन शेट्टी ही एडलैब्स के मालिक व प्रबंध निदेशक निदेशक थे। इसके बाद साल 2005 में अनिल धीरूभाई अबानी समूह एडलैब्स को खरीद चुका है और अब इसका नाम रिलायंस मीडियावर्क्सऔरऔर भी

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीए या इरडा) द्वारा हाल में उठाए गए तमाम कदमों की तारीफ की है और भरोसा जताया है कि यूलिप (यूनिट लिंक्ड इंश्योरेस पॉलिसी) पर उठे विवाद को जल्द ही सुलझाया लिया जाएगा। वित्त मंत्री मंगलवार को मुंबई के बांद्रा कुरला कॉम्प्लेक्स में भारतीय बीमा संस्थान (आईआईआई) के नए परिसर के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। बता दें कि यूलिप के निवेश के हिस्से पर नियंत्रणऔरऔर भी

इस समय सरकार व स्टॉक एक्सचेंजों के पास निवेशकों की सुरक्षा के लिए लगभग 1600 करोड़ का फंड है। इसमें से कॉरपोरेट मामलात मंत्रालय के पास 500 करोड़, बीएसई के पास 432 करोड़, एनएसई के पास 353 करोड़ और क्षेत्रीय स्टॉक एक्सचेंजों के पास 300 करोड़ रुपए का फंड जमा है। इसके अलावा सेबी दोषी कंपनियों या व्यक्तियों से जो पेनाल्टी वसूल करती है वह भारत सरकार की समेकित निधि में चली जाती है। लेकिन इतने फंडऔरऔर भी

शुक्रवार को पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने स्टॉक एक्सचेंजों से कहा कि वे कुछ शर्तों को पूरा करने के बाद 12 कंपनियों को ट्रेड फॉर ट्रेड सेटलमेंट (टीएफटीएस) से निकालकर सामान्य रोलिंग सेटलमेंट में ला सकते हैं। ये कंपनियां हैं – ओसवाल ओवरसीज, यूनिटेक इंटरनेशनल, वीएसएफ प्रोजेक्ट्स, विकल्प सिक्यूरिटीज, न्यू मार्केट्स एडवाइजरी, ग्लोबल सिक्यूरिटीज, रणविजय ट्रेडिंग कंपनी, केएमसी स्पेशियलिटी, उपासना फाइनेंस, लालफुल इनवेस्टमेंट्स, डीएसजे स्टॉक एंड शेयर्स और तिरुपति लिंक्स। असल में टीएफटी सेटलमेंट बहुत सारेऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी कंपनियों के अधिग्रहण के लिए ओपन ऑफर की सीमा को न्यूनतम 20 फीसदी के मौजूदा स्तर से बढ़ाकर 25 फीसदी कर सकती है। वह यह फैसला पिछले साल बनाई गई टेकओवर रेगुलेशंस एडवाइजरी कमिटी (टीआरएसी) की सिफारिशों के आधार पर करेगी। साथ ही यह भी संभव है कि ओपन ऑफर लाने की ट्रिगर लिमिट 15 फीसदी से बढ़ाकर 25 फीसदी कर दी जाए। सूत्रों के मुताबिक सेबी जल्दी ही अपने टेकओवर कोडऔरऔर भी

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने भरोसा जताया है कि यूलिप के अधिकार क्षेत्र को लेकर पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी और बीमा नियामक संस्था आईआरडीए (इरडा) के बीच उठा विवाद जल्दी ही सुलझा लिया जाएगा। उन्होंने एक निजी बिजनेस चैनल के साथ बातचीत में यह विश्वास व्यक्त किया। वित्त मंत्री ने कहा कि मैं जानता हूं कि क्या हो रहा है, मुझे पूरा विश्वास है कि मामले को जल्द सुलझा लिया जाएगा। बता दें कि यूलिप (यूनिटऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी हर दिन एकाध कंसेंट ऑर्डर तो पास ही कर देती है। यह प्रतिभूति कानून को तोड़नेवाले पक्ष के खिलाफ प्रशासनिक या दीवानी कार्यवाही को निपटाने का आदेश होता है। इसमें कानून तोड़ने के दोष का निर्धारण किया भी जा सकता है और नहीं भी। संसद ने सेबी एक्ट 1992 के अनुच्छेद 15टी(2) के अंतर्गत सेबी को कंसेंट ऑर्डर पास करने का अधिकार दे रखा है। यह असल में आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंटऔरऔर भी

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने साल 2003 से 2005 के दौरान हुए आईपीओ घोटाले में ब्रोकर फर्म व डीपी (डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट) मोतीलाल ओसवाल सिक्यूरिटीज को एक कंसेंट ऑर्डर के तहत बरी कर दिया है। यह कंसेंट ऑर्डर पारित तो 6 मई को हुआ था, लेकिन इसे सार्वजनिक सोमवार 10 मई को किया गया। मोतीलाल ओसवाल सिक्यूरिटीज के खिलाफ सेबी की कार्यवाही अप्रैल 2006 से ही चल रही थी। लेकिन जनवरी 2010 में ब्रोकर फर्म नेऔरऔर भी