पूरा शेयर बाजार और यहां का तकरीबन हर कारोबारी इसी राय का है कि अब तो निफ्टी को 4800 तक जाना ही है। इसलिए हर कोई जहां भी संभव है, शॉर्ट सौदे ही कर रहा है। यहां तक कि विशेषज्ञ भी शॉर्ट करने के मौके तलाश रहे हैं। ब्लैकबेरी पर संदेश घुमाए जा रहे हैं कि फलां कंपनी बुरी है, उसे निकाल दो। दूसरा एसएमएस कहता है कि निफ्टी सबसे बुरे दौर की तरफ बढ़ रहा है।औरऔर भी

बाजार में सुबह से चर्चा थी कि निफ्टी आज गिरकर 5290 तक चला जाएगा और अगले कुछ दिनों में यह 4800 पर होगा। इसकी वजह यूरोप में ऋण संकट के उभार, ब्याज दरों में वृद्धि, डीजल के दाम बढ़ने के अंदेशे और विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बांड (एफसीसीबी) की चिंता को बताया जा रहा है। लेकिन शाम होते-होते ये सारे कयास गलत साबित हुए। निफ्टी नीचे में 5367.45 तक ही गया। लेकिन फिर 5422.60 तक बढ़ने के बादऔरऔर भी

आज को मिलाकर रोलओवर के लिए चार दिन बचे हैं। जैसी कि उम्मीद थी, डिवीज लैब (बीएसई – 532488) ने चौथी तिमाही के अच्छे नतीजे पेश किए और उसका शेयर टेक्निकल एनालिस्टों द्वारा बताई गई 735 रुपए की बाधा को पार कर गया है। बल्कि दिन में यह 752.20 रुपए तक गया है जो पिछले एक माह का सर्वोच्च स्तर है। हमने एक बार फिर खुद को बाजार से आगे साबित किया है और अब डिवीज लैबऔरऔर भी

जैसी कि उम्मीद थी, बाजार ने कल 5420 पर पहुंचने के बाद यू-टर्न लिया और आज 5490 तक चलता चला गया। हालांकि इसके बाद वो गिरना शुरू हो गया क्योंकि मंदड़िए अपना करतब दिखाने लगे। वे निफ्टी को 5432 तक गिरा ले गए। लेकिन बाजार उसके बाद उठा तो उठता ही जा रहा है। 5500 के ऊपर वो पहुंच चुका है। दिक्कत यह है कि इस वक्त ज्यादातर ट्रेडर व निवेशक के मन में यह बात घरऔरऔर भी

बाजार में रोलओवर की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। आज बहुत ज्यादा नहीं, लेकिन ठीक-ठाक उतार-चढ़ाव दिखाई दिया। सेंसेक्स 140.63 अंक इधर-उधर होने के बाद 55.20 अंकों (0.31%) की बढ़त लेकर बंद हुआ तो निफ्टी 41.35 अंक इधर-उधर होने के बाद 7.50 अंक (0.14%) बढ़कर बंद हुआ है। रोलओवर का दौर कल से शुरू हो जाएगा और अगले हफ्ते गुरुवार तक पांच दिन चलेगा। वैसे आपको बता दूं कि रोलओवर का खेल शुद्ध रूप से एफआईआई केऔरऔर भी

इसमें कोई दो राय नहीं कि विश्वास के संकट ने बाजार के मिजाज पर चोट की है। इसका बेड़ा एसबीआई के आंकड़ों ने और गरक कर दिया। इस वक्त बाजी मंदड़ियों के हाथ में है और उनका सूत्र है – हर बढ़त पर बेचो। वे अपने मकसद में कामयाब भी हुए जा रहे हैं। यह कहानी बार-बार दोहराई जा रही है। लकिन बाजार के ऊपर पहुंचने पर मंदड़िए टेक्निकल कॉल्स की वजह से भारी बिकवाली नहीं करऔरऔर भी

डीएमके के छह मंत्रियों का केंद्र सरकार से बाहर निकलना एक नौटंकी है जो सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस की रजामंदी से रची जा रही है। सारे मंत्रियों के हटने के बावजूद यूपीए सरकार को डीएमके का बाहर से समर्थन जारी है, जारी रहेगा। इसलिए केंद्र सरकार के वजूद को कोई खतरा नहीं है। हां, संसद के भीतर समीकरण थोड़े जरूर बदल जाएंगे। डीएमके के 18 सांसद जाएंगे तो मुलायम की समाजवादी पार्टी के 22 सांसद सरकार को मिलऔरऔर भी

मैं कल करीब दर्जन भर दमदार विश्लेषकों के मिला और वे सभी कच्चे तेल की चढ़ाई को लेकर चिंतित हैं। उन्हें लगता है कि कच्चे तेल के दाम जल्दी ही 130-140 डॉलर प्रति बैरल तक चले जाएंगे। इसलिए वे खुद भी शॉर्ट सेलिंग कर रहे हैं और दूसरों को भी ऐसा करने की सलाह दे रहे हैं। कच्चे तेल की कीमतों का अनुमान लगाने के बारे में मेरा रिकॉर्ड काफी अच्छा रहा है। 2005 में जब यहऔरऔर भी

बीएसई सेंसेक्स 623 अंक उठा था तो हिचकी का आना लाजिमी था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम की चिंता में बाजार 128 अंक गिरकर खुला। फिर 157 अंक ऊपर चढ़ गया। और, फिर चौरस हो गया। इस बीच बाजार के स्वघोषित वित्त मंत्री (एनालिस्ट) बजट की मीनमेख निकालने में जुटे हैं। खासकर राजकोषीय घाटे के लक्ष्य के बारे में उनका कहना है कि इसे हासिल नहीं किया जा सकता। ऐसी ही गलती सीएलएसए ने 2003औरऔर भी

आलोचकों की आलोचनाओं को धता बताते हुए बाजार में बजट का उत्साह कायम है। मंगलवार को सेंसेक्स और निफ्टी साढ़े तीन फीसदी बढ़ गए। वैसे, सच कहूं तो हमें इस बात की कतई परवाह नहीं करनी चाहिए कि कोई बजट के बारे में क्या कह रहा है क्योंकि हकीकत यही है कि इस बार का बजट पिछले साल से बेहतर है और ऐसे सुधारों से भरा हुआ है जो शेयर बाजार को नई ऊंचाई पर ले जाऔरऔर भी