मेहनत करते समय गान और मेहनत करने के बाद मान मिल जाए तो काम करने का उत्साह चौगुना हो जाता है। फिर तो इंसान शान से श्रम का रस लेता रहता है और उसे इसका फल भी मिलता है।और भीऔर भी

सभी अपने-अपने काम में लगे हैं। आप भी, मै भी। आप मेरी सुनें, जरूरी नहीं। मैं आपकी मानूं, जरूरी है। लेकिन न जाने किस रूप में नारायण मिल जाएं। इसलिए किसी की भी उपेक्षा करना ठीक नहीं।और भीऔर भी

समाज में हमेशा ज्यादातर लोग संतुष्ट रहते हैं या संतोषम् परम सुखम् का जाप करते हैं। कुछ ही लोग होते हैं जो असंतुष्ट रहते हैं। दुनिया को जीने के लिए बेहतर जगह बनाने का काम इन्हीं का होता है।और भीऔर भी

व्यक्ति की नैतिकता हो सकती है। लेकिन सरकारों की कोई नैतिकता नहीं होती। सत्ता की चंडाल चौकड़ी को बचाना ही उसका चरित्र है। हां, वह अवाम की निगाह में जरूर नैतिक दिखना चाहती है।और भीऔर भी

योग की साधना जीवन से हटकर नहीं की जा सकती। हमें योग का अभ्यास जीवन से मुक्ति पाने के लिए नहीं, बल्कि जीवन को पूर्णता से जीने के लिए करना चाहिए। गीता तक में यही बात कही गई है।और भीऔर भी

जिस काम को करने से मन को शांति मिले, जिसे करते हुए मन में शांति हो और जिसे करने के बाद मन में शांति रहे, वही काम हमारे लिए सही काम है। लेकिन काम चुनने की यह आजादी मिले तो सही।और भीऔर भी

सच तो सच है। हम जानें या न जानें, इससे उस पर फर्क नहीं पड़ता। सच चलायमान है। फिर भी वो खुद चलकर हमारे पास नहीं आता। अनुसंधान करना पड़ता है। तभी हम सच की मणि तक पहुंच पाते हैं।और भीऔर भी

तीन तरह के लोग होते हैं। एक, जिनके लिए कोई समस्या नहीं होती। दो, जो मानते हैं कि समस्या तो है, पर समाधान नहीं। तीन, जो मानते हैं कि समस्या है और इसे हल भी किया जा सकता है।और भीऔर भी

समस्याओं का होना कोई बुरी बात नहीं, अगर हम उनसे जूझने को तैयार हों। देखें कि कौन-सी समस्या व्यक्तिगत है और कौन-सी व्यवस्था-जन्य क्योंकि इनसे निपटने के तरीके भिन्न होते हैं।और भीऔर भी

काल की धारा में बहना आसान है, तैरना कठिन है। बहने के लिए कुछ नहीं करना होता। लेकिन तैरने के लिए सीखना पड़ता है, धारा को समझना पड़ता है, प्रवाह से लड़ना पड़ता है। इंसान बनना पड़ता है।और भीऔर भी