ऑप्टो सर्किट्स भांति-भांति के मेडिकल उपकरण बनाती है। ईसीजी से लेकर दिल के स्टेंट तक। 1992 में बनी बेंगालुरू की कंपनी है। लेकिन अमेरिका, यूरोप, जापान, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, रूस व चीन समेत दुनिया के 150 से ज्यादा देशों में अपने उत्पाद बेचती है। अमेरिका की औषधि नियामक संस्था, यूएसएफडीए की सूची में है। कंपनी के पास फिलहाल 168 पेटेंट हैं, जबकि 53 पेटेंट विचाराधीन हैं। पिछले तीन सालों में उसकी बिक्री 50.18 फीसदी और लाभ 39.43 फीसदीऔरऔर भी

दुनिया की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग साइट, फेसबुक अगले साल अप्रैल से जून के बीच पूंजी बाजार में उतर सकती है। वह अपना आईपीओ (शुरुआती पब्लिक ऑफर) लाने का विचार कर रही है। अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक फेसबुक अपने शेयर बेचकर बाजार से 10 से 12 अरब डॉलर (500 से 600 अरब रुपए) की पूंजी जुटाना चाहती है। लेकिन फेसबुक के प्रवक्ता लैरी यू ने कहा है कि वे आईपीओ केऔरऔर भी

सच कहूं तो लोगों से आशा ही छोड़ दी है कि हमारी सरकार शेयर बाजार के लिए कुछ कर सकती है। इसलिए ज्यादातर निवेशक भारतीय पूंजी बाजार से निकल चुके हैं और पूरा मैदान विदेशी निवेशकों के लिए खाली छोड़ दिया है। बदला सिस्टम खत्म करने के बाद 2001 में ही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने डेरिवेटिव सौदों में फिजिकल सेटलमेंट की जरूरत जताई थी। लेकिन दस साल बीत चुके हैं। सेबी फैसला भी कर चुकी है।औरऔर भी

सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की विमानन कंपनी एयर इंडिया में विनिवेश की संभावनाओं से इनकार किया है और कहा है कि धन की तंगी से जूझ रही इस कंपनी को घाटे से उबारने का प्रयास किया जा रहा है। नागरिक उड्डयन मंत्री व्यालार रवि ने गुरुवार को दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के अवसर पर कहा, “एयर इंडिया में विनिवेश की कोई योजना नहीं है और न ही निकट भविष्य में कंपनी का कोई प्रारम्भिक पब्लिक इश्यू (आईपीओ)औरऔर भी

अमेरिका की प्राइवेट इक्विटी फर्म कार्लाइल ग्रुप ने प्रमुख ब्रोकरेज व वित्तीय सेवा कंपनी इंडिया इनफोलाइन (आईआईएफएल) की 9 फीसदी इक्विटी खरीद ली है। यह खरीद उसने सीधे शेयर बाजार से की है। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंजों को यह जानकारी दी है। लेकिन उसने यह नहीं बताया है कि कार्लाइल ने किस भाव पर उसके शेयर खरीदे हैं। वैसे, बुधवार के बंद भाव 71.20 रुपए पर इंडिया इनफोलाइन की 9 फीसदी इक्विटी का मूल्य करीब 185 करोड़औरऔर भी

शेयर बाजार में चल रही मायूसी ने पूंजी बाजार के दूसरे हिस्से प्राइमरी बाजार में भी सन्नाटा फैला दिया है। चालू वित्त वर्ष 2011-12 में पूंजी बाजार में उतरनेवाली 22 कंपनियों ने आईपीओ (शुरुआती पब्लिक ऑफर) लाने का इरादा ही छोड़ दिया है। इसके साथ ही बड़े निवेशकों को सीधे खींचनेवाले क्यूआईपी (क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट) बाजार में भी एकदम मुर्दनी छा गई है। ब्रोकरेज फर्म एसएमसी ग्लोबल सिक्यूरिटीज के ताजा अध्ययन के मुताबिक जिन 22 कंपनियों नेऔरऔर भी

जिस तरह ज्यादातर कंपनियों के आईपीओ (शुरुआती पब्लिक ऑफर) कुछ ही समय बाद अपने इश्यू मूल्य से बहुत नीचे खिसक जाते हैं और लिस्टिंग के दिन में उनमे जबरदस्त ऊंच-नीच होती है, उसने पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी को आखिरकार कुछ ठोस कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। सेबी ने आईपीओ के मूल्य में मर्चेंट बैंकरों की जवाबदेही तय करने के लिए उनके द्वारा संचालित पुराने आईपीओ का हाल बताना जरूरी कर दिया है। इस सिलसिले मेंऔरऔर भी

1. इक्विटी शेयर क्या है? इक्विटी शेयर को आम बोलचाल में शेयर या स्टॉक भी कहा जाता है। इससे किसी कंपनी में अमुक अंश की हिस्सेदारी व्यक्त होती है। इक्विटी शेयरधारक कंपनी के नफे-नुकसान में, अपने शेयरों की संख्या के अनुपात में व्यवसायिक हिस्सेदार होता है। इसके धारक को कंपनी के सदस्य का दर्जा प्राप्त होने के साथ कंपनी के प्रस्तावों पर अपना विचार व्यक्त करने और वोट देने का अधिकार प्राप्त है। 2. राइट्स इश्यू/राइट्स शेयरऔरऔर भी

कभी सोचा है आपने कि केवल भारतीय ट्रेडरों और निवेशकों को ही इतनी ज्यादा वोलैटिलिटी, इतना भयंकर झंझावात क्यों झेलना पड़ता है? क्या आपने कभी सुना है कि अमेरिका का डाउ जोन्स सूचकांक लेहमान संकट व डाउनग्रेड जैसे विशेष हालात के अलावा सामान्य स्थिति में कभी दो दिन के अंदर 5% ऊपर-नीचे हुआ हो? लेकिन भारत में हर तीन महीने पर ऐसा होता है। बाजार को 5% का फटका लगता है, निवेशकों की दौलत में भारी सेंधऔरऔर भी