रीको ऑटो इंडस्ट्रीज दोपहिया से लेकर चार-पहिया वाहनों के कंपोनेंट बनानेवाली बड़ी कंपनी है। कितनी बड़ी, इसका अंदाजा कंपनी के धारुहेड़ा, मानेसर व गुड़गांव के संयंत्रों को देखकर लगाया जा सकता है। हीरो मोटोकॉर्प से लेकर मारुति तक की बड़ी सप्लायर है। आज से नहीं, करीब पच्चीस सालों से। लेकिन 2006 से ही उसके सितारे गर्दिश में हैं। पहले मजदूरों की 56 दिन लंबी हड़ताल हुई। फिर दुनिया के वित्तीय संकट ने भारत को आर्थिक सुस्ती मेंऔरऔर भी

मुरैना (मध्य प्रदेश) की खाद्य तेल कंपनी केएस ऑयल्स की हालत इतनी खराब नहीं है कि उसका शेयर 77 रुपए से टूटकर 7.70 रुपए पर आ जाए। जी हां! केएस ऑयल्स का शेयर 18 जनवरी 2010 को बीएसई में 77 रुपए पर था, जबकि 17 अगस्त 2011 को 7.70 रुपए पर आ गया। पूरे 90 फीसदी की चपत। कंपनी ने हालांकि चालू वित्त वर्ष 2011-12 की पहली तिमाही के नतीजे घोषित नहीं किए हैं, लेकिन बीते वित्तऔरऔर भी

वैसे तो नाम में कुछ नहीं रखा। लेकिन जानकर आश्चर्य हुआ कि अनिल नाम की भी एक नहीं, दो लिस्टेड कंपनियां हैं। इनमें से एक है अनिल लिमिटेड जिसका नाम करीब साल भर पहले 22 सितंबर 2010 तक अनिल प्रोडक्ट्स लिमिटेड हुआ करता था। अहमदाबाद की कंपनी है। किसी समय इसका वास्ता अरविंद मिल्स वाले लालभाई समूह से हुआ करता था। अब नहीं है। 1939 में कॉर्न वेट मिलिंग के धंधे से शुरुआत की थी। अब तमामऔरऔर भी

ग्लास के बरतनों में बोरोसिल का ब्रांड इतना बड़ा व स्थापित है कि उसके नाम से नकली माल तक बनता है। प्रयोगशालाओं से लेकर माइक्रोवेब तक के लिए बोरोसिल का ग्लास सबसे मुफीद माना जाता है। इसे बनाने वाली कंपनी बोरोसिल ग्लास वर्क्स का गठन 1962 में अमेरिकी कंपनी कॉर्निंग ग्लास के साथ मिलकर किया गया। बाद में अमेरिकी कंपनी अपनी हिस्सेदारी भारतीय प्रवर्तकों – गुजरात के खेरुका परिवार को बेचकर निकल गई। ब्रांड को देखकर आपकोऔरऔर भी

करीब साल-सवा साल पहले हमारे चक्री महाराज इंडिया सीमेंट्स को झकझोरे पड़े थे। सीमेंट के धंधे के साथ-साथ आईपीएल की चेन्नई सुपर किंग टीम की मालिक इस कंपनी का शेयर तब 140 रुपए के आसपास चल रहा था। चक्री का दावा था, “अगले दो-तीन सालों में आईपीएल टीम के मूल्यांकन के दम पर इंडिया सीमेंट का शेयर 450 रुपए तक जा सकता है। अभी फिलहाल अगले कुछ महीनों में तो इसमें 100 रुपए के बढ़त की पूरीऔरऔर भी

आज फंडामेंटल और लांग टर्म गया तेल लेने। आज हम एकदम शॉर्ट टर्म में फायदा दिलानेवाले ऐसे स्टॉक की चर्चा करेंगे जो वित्तीय आंकड़ों के दम पर खास आकर्षण नहीं पैदा करता। लेकिन बाजार के उस्तादों के मुताबिक इसमें मुनाफा कमाने की गुंजाइश पक्की है। आइनॉक्स के मल्टीप्लेक्सों का नाम तो आपने सुना ही होगा। जाकर सिनेमा भी देखा होगा। इसे संचालित करनेवाली कंपनी का नाम है – आइनॉक्स लीज़र। बीते हफ्ते गुरुवार, 11 अगस्त को इसनेऔरऔर भी

बाजार अब सीधे मंगलवार को खुलेगा। अनिश्चितता का आलम है। ट्रेडरों ने ज्यादातर सौदे शुक्रवार को ही काट लिये क्योंकि उन्हें डर है कि मंगलवार को जब बाजार खुलेगा, तब तक अमेरिका व यूरोप के संकट का कोई नया पेंच न सामने आ जाए। सब कुछ शॉर्ट टर्म हो गया है। खबरों पर बाजार और अलग-अलग स्टॉक्स की गति निर्भर है। लेकिन शेयर बाजार सबसे बड़ा पेंच यह है कि अक्सर खबर के सार्वजनिक होने तक उसका असरऔरऔर भी

परसिस्टेंट सिस्टम्स इतनी मरी-गिरी कंपनी नहीं है कि उसका शेयर अगर जमीन पर गिर जाए तो उसे खोटा सिक्का मानकर उठाया ही न जाए। 1990 में बनी कंपनी है। सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट डेलपवमेंट सेवाओं में सक्रिय है। 6600 से ज्यादा कर्मचारी हैं। 300 से ज्यादा कस्टमर हैं जो अमेरिका, यूरोप व एशिया के कई देशों तक फैले हैं। उसने पिछले पांच सालों में 3000 से ज्यादा सॉफ्टवेयर विकसित किए हैं। क्लाउड कंप्यूटिंग व सॉफ्टवेयर आर एंड डी मेंऔरऔर भी

इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां एक तरह से ठेकेदारों जैसा ही काम करती हैं। लेकिन ठेकेदार की छवि हमारे दिमाग में नेताओं तक पहुंच और सरकारी धन की लूट करनेवाले गुंडे-मवाली की ही है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुख्यात माफिया हरिशंकर तिवारी और वीरेंद्र शाही मूलतः ठेकेदार ही तो रहे थे। पर, इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां एकदम भिन्न व प्रोफेशनल तरीके से काम करती हैं। देश में जिस तरह इंफ्रास्ट्रक्चर की खस्ता हालत को लेकर त्राहि-त्राहि मची है, उसमें इस क्षेत्र कीऔरऔर भी

कैबिनेट ने सार्वजनिक क्षेत्र की स्टील कंपनी सेल (स्‍टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड) के लिए 55,000 करोड़ रुपए की निवेश योजनाओं को मंजूर कर लिया। इस्‍पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा संसद में बताते हैं कि सेल ने झारखंड में अपनी चिरिया लौह अयस्‍क खदानों के आधुनिकीकरण के लिए कई योजनाएं तैयार की हैं। खुद सेल के चेयरमैन सी एस वर्मा बता रहे हैं कि कंपनी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, मोजाम्बिक व कोलंबिया तक में लौह अयस्क खदानें खरीदने कीऔरऔर भी