पहले घर एक-मंजिला हुआ करते थे। अब बहु-मंजिला होते हैं। पहले धन-दौलत सोने-चांदी के सिक्कों या बर्तनों के रूप में जमीन या दीवार में गाड़कर बचाई जाती है। अब लोग अपनी बचत बैंक एफडी, म्यूचुअल फंड या शेयरों जैसे अनाकार माध्यमों में लगाते हैं। पहले मुद्रास्फीति नहीं थी तो बचत जितना रखो, उतनी ही रहती थी। अब खोखली होती जाती है। इसलिए आप कमाकर बचाते हैं, यह पर्याप्त नहीं। आपकी बचत को भी कमा पड़ेगा। कम याऔरऔर भी

अब निवेश के लिए मर चुका है लांग टर्म। लद चुका है लांग टर्म निवेश का ज़माना। आज का दौर खटाखट नोट बनाने का है। रुझान पकड़कर समझदारी से ट्रेडिंग करने का। बाजार चाहे गिरे, या बढ़े। बनाइए नोट खटाखट। दोनों ही हाल में कमाई। दोनों हाथों में लड्डू और सिर कढ़ाई में। जी हां, ऑनलाइन ट्रेडिंग एकेडमी का यही दावा है। उसका कहना है कि वह आपको हफ्ते भर में ऐसी ट्रेनिंग दे देगी कि आपऔरऔर भी

विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) तो भारत में धंधा करने के लिए आए हैं। काम खत्म, पैसा हजम। कमाई हो गई, निकल लिए। उनके मूल देश में कुछ गड़बड़ हुई तो अपना आधार बचाने निकल पड़े। यूरोप-अमेरिका के मामूली से घटनाक्रम पर भी वे बावले हो जाते हैं। इसलिए जो निवेशक एफआईआई का अनुसरण करते हैं, वे यकीनन समझदार होने के बावजूद परले दर्जे की मूर्खता करते हैं। लेकिन माना जाता है कि एलआईसी या यूटीआई म्यूचुअल फंडऔरऔर भी

हीरो मोटोकॉर्प का शेयर खट-खटाखट बढ़ रहा है। 18 अक्टूबर को सितंबर तिमाही के नतीजे घोषित किए तो 1984.85 रुपए पर बंद हुआ था। अभी दिवाली के दिन 26 अक्टूबर को मुहूर्त ट्रेडिंग में उसका बंद भाव 2105.65 रुपए रहा है। इस तरह छह कारोबारी सत्रों में वह छह फीसदी से ज्यादा बढ़ चुका है। क्या बनता है इस स्टॉक में लाभ का योग? आइए समझने की कोशिश करते हैं। हीरो मोटोकॉर्प, देश की सबसे बड़ी मोटरसाइकिलऔरऔर भी

जीवन है तो जरूरतें हैं और जब तक जरूरतें हैं, तब तक उन्हें पूरा करने की इच्छा है। पढ़-लिख खूब बड़ा बनने की इच्छा। खूबसूरत दिखने की इच्छा। किसी दिन आसमान छूने की इच्छा। विदेश जाने की इच्छा। अपने घर के बाद हरे-भरे फार्महाउस में रहने की इच्छा। छोटी-छोटी इच्छाएं हैं तो बड़ी-बड़ी इच्छाएं हैं। खुश रहने की ख्वाहिश, धनवान बनने की इच्छा, राज करने की चाहत, ज्ञानवान बनने की तमन्ना। इन इच्छाओं को जो भी पूराऔरऔर भी

ज़ाइडस वेलनेस करीब 3900 करोड़ रुपए के टर्नओवर वाले ज़ाइडस कैडिला समूह की कंपनी है। शुगर फ्री, एवरयूथ व न्यूट्रालाइट जैसे लोकप्रिय उत्पाद बनाती है। कुछ महीने पहले ही उसने माल्ट से बना फूड ड्रिक एक्टीलाइफ बाजार में उतारा है। छोटी है, पर बड़ी तेजी से बढ़ती कंपनी है। पिछले तीन सालों में उसकी बिक्री 81.25 फीसदी और शुद्ध लाभ 135.23 फीसदी की सालाना चक्रवृद्धि दर से बढ़ा है। नियोजित पूंजी पर उसका रिटर्न 74.33 फीसदी औरऔरऔर भी

तमाम विशेषज्ञ कहते फिरते हैं कि आम निवेशकों को शेयर बाजार में निवेश केवल म्यूचुअल फंडों के जरिए करना चाहिए। एक बार पुरानी नौकरी के दौरान राकेश झुनझुनवाला से आम निवेशकों के लिए नए साल के निवेश पर सलाह मांगने गया था तो उन्होंने ऐसा ही दो-टूक जवाब दिया था। ये लोग पुराने जमाने के ओझा-सोखा की तरह कहते हैं कि बडा कठिन है किसी आम निवेशक के लिए सीधे शेयरों में निवेश करने की समझ हासिलऔरऔर भी

मुर्गा बांग न दे, तब भी सुबह का होना तो नहीं रुकता। इसी तरह सही सलाह न मिलने से लोगों का निवेश करना नहीं रुकता। वे भविष्य की सुरक्षा के लिए अपनी वर्तमान बचत को दांव पर लगाते रहते हैं, जोखिम उठाते रहते हैं। लेकिन कुछ तो नासमझी व लालच का तकाजा और बहुत कुछ हमारे नियामक तंत्र के लापरवाह और गैर-जिम्मेदाराना रवैये के चलते हर दिन लाखों देशवासी करोड़ों गंवा रहे हैं। स्पीक एशिया तो एकऔरऔर भी

हिंदुस्तान ज़िंक पहले साल 2003 तक भारत सरकार की कंपनी हुआ करती थी। अब कबाड़ी से अरबपति अनिल अग्रवाल के वेदांता समूह की कंपनी है। कंपनी की 845.06 करोड़ रुपए की इक्विटी में वेदांता समूह की हिस्सेदारी 64.92 फीसदी है, जबकि भारत सरकार के पास अब भी उसके 29.54 फीसदी शेयर हैं। फ्लोटिंग स्टॉक कम होने के बावजूद उसका शेयर बहुत ज्यादा ऊपर-नीचे नहीं होता। 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 155.25 रुपए (21 अप्रैल 2011) और न्यूनतमऔरऔर भी

कोई कंपनी जब टी ग्रुप में डाल दी जाती है तो उसमें उसी दिन डिलीवरी के कारण लिक्विडिटी एकदम सूख जाती है। हो सकता है कि वहां पड़े-पड़े कोई शेयर किसी दिन एकदम इल्लिक्विड हो जाए, मतलब उसमें कोई खरीद-फरोख्त हो ही नहीं। बाजार नियामक सेबी और हमारे एक्सचेंज इसे लिस्टेड कंपनियों को सजा देने के लिए इस्तेमाल करते हैं। लेकिन ऐसा बी ग्रुप की किसी अच्छी-खासी कंपनी के साथ होने लगे तो आप क्या कहेंगे? जी,औरऔर भी