वैश्विक कृषि उत्पादन की वृद्धि दर पिछले दशक के 2.6 फीसदी के मुकाबले चालू दशक में घटकर 1.7 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है। तिलहन व अनाज के उत्पादन में कमी के चलते वैश्विक खाद्यान्न उत्पादन घटने की आशंका है। आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) और खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) द्वारा जारी एक संयुक्त कृषि परिदृश्य के मुताबिक, अल्पकाल में हालांकि कृषि उत्पादन बढ़ेगा। ओईसीडी-एफएओ की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘वैश्विक कृषि उत्पादनऔरऔर भी

जिस पश्चिग बंगाल में ममता बनर्जी मां, माटी, मानुष के नारे पर सत्तासीन हुई हैं, उसी के एक इलाके की माटी हजारों मानुषों के लिए श्राप बन गई है। सुंदरवन के गोसाबा में हजारों किसानों के लिए आने वाला मानसून बारिश की बूंदें भले ही ले आए, लेकिन खारी धरती की फसलें तब भी हरी नहीं होंगी। दो साल पहले आए आइला चक्रवात से खारी हुई मिट्टी का अभिशाप झेलने को विवश हैं ये किसान। एक ओरऔरऔर भी

उत्तर प्रदेश में जमीन अधिग्रहण को लेकर उठे विवाद और दबाव के बीच मुख्यमंत्री मायावती ने किसानों की एक पंचायत बुलाकर उनसे बातचीत करने के बाद नई भूमि अधिग्रहण नीति की घोषणा की है। इसमें अब निजी कंपनियां परियोजनाओं के लिए किसानों से सीधी बातचीत करके भूमि खरीदेंगी। इसमें अब शासन व प्रशासन की भूमिका सिर्फ मध्यस्थ या फैसिलिटेटर की ही होगी। किसान पंचायत में आए प्रतिनिधियों से सीधा संवाद कर समस्याएं सुनने के बाद मुख्यमंत्री मायावतीऔरऔर भी

एक तरफ यूपीए सरकार खाद्य सुरक्षा कानून के तहत सभी को आवश्यक अनाज देने का हल्ला मचाए हुए है, वहीं कुछ अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) भी इसी तरह की मुहिम से अपना आधार व स्वीकृति बनाने में जुट गए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय नामी एनजीओ ‘ऑक्सफैम’ ने भूख-मुक्त भारत के लिए पटना सहित देश के अन्य पांच शहरों से मंगलवार को एक व्यापक अभियान शुरू किया। ऑक्सफैम के क्षेत्रीय प्रबंधक प्रवींद कुमार प्रवीण ने पटना मेंऔरऔर भी

आर्थिक सलाहकार कितने बिके हुए हो सकते हैं इसका नमूना पेश कर दिया है वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने। कौशिक बसु अंतर-मंत्रालयी समूह (आईएमजी) के चेयरमैन भी हैं। इस समूह का कहना है कि महंगाई पर नियंत्रण पाने के लिए मल्टी-ब्रांड रिटेल में विदेशी निवेश को मंजूरी दे देनी चाहिए। समूह ने कृषि विपणन कानून में बदलाव का भी सुझाव दिया है। यह सीधे-सीधे वॉलमार्ट जैसे विदेशी रिटेल स्टोरों की लॉबीइंग के सिवाऔरऔर भी

अच्छे उत्पादन के चलते भारत का मक्का निर्यात अक्तूबर को समाप्त होने वाले 2010-11 के विपणन वर्ष में 33 फीसदी बढ़कर 24 लाख टन रहने की उम्मीद है। इस दौरान रिकॉर्ड घरेलू उत्पादन की संभावना है। अमेरिकी खाद्यान्न परिषद (यूएसजीसी) की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत ने 2009-10 के विपणन वर्ष (नवंबर से अक्तूबर) में 18 लाख टन मक्के का निर्यात किया था। यूएसजीसी के भारत स्थित प्रतिनिधि अमित सचदेव ने बताया कि भारत का मक्का निर्यातऔरऔर भी

भारत के लोगों में भले ही अमेरिका के दुग्ध उत्पादों को लेकर तमाम सांस्कृतिक और धार्मिक आपत्तियां हों, लेकिन अमेरिका ने भारत के भारत के डेयरी बाजार में घुसने का इराद नहीं छोड़ा है। वॉशिंगटन से जारी समाचार के अनुसार, अमेरिका के कृषि के मंत्री टोम विलसाक ने मुक्त व्यापार व्यवस्था पर एक संसदीय समिति के समक्ष सुनवाई के दौरान कहा कि भारतीय दुग्ध उत्पाद बाजार को खुलवाने का मुद्दा को पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामाऔरऔर भी

कर्नाटक में तंबाकू की अवैध खेती की वजह से वर्ष 2010-11 में इसका उत्पादन तय लक्ष्य से 10 फीसदी अधिक करीब 30 करोड़ किलो तक होने की संभावना है। भारतीय तंबाकू बोर्ड ने चालू फसल वर्ष (सितंबर-अगस्त) में 27.2 करोड़ किलो तंबाकू उत्पादन का लक्ष्य रखा है। बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट से कहा, ‘‘ हमें उम्मीद है कि तंबाकू का उत्पादन निर्धारित 27.2 करोड़ किलो के मुकाबले 30 करोड़ किलो होगा।औरऔर भी

कपड़ा मंत्रालय ने 2010-11 में देश का कपास उत्पादन अनुमान और घटाकर 3.05 करोड़ गांठ कर दिया है। मंत्रालय ने दिसंबर 2010 में हुई बेमौसम बारिश के मद्देनजर यह कदम उठाया है जिसके कारण मंडियों में आवक कम रही थी। इससे कपास के दाम में और लगने के आसार हैं। सरकारी निकाय कपास परामर्शक बोर्ड (सीएबी) ने सत्र अक्तूबर-सितंबर 2010-011 की शुरआत में 3.29 करोड़ गांठ उत्पादन का अनुमान लगाया था। अप्रैल में इसे घटाकर 3.12 करोड़औरऔर भी

देश में चाय का उत्पादन मार्च महीने में करीब 16 फीसदी बढ़कर 567.3 लाख किलोग्राम हो गया। शुक्रवार को टी बोर्ड की तरफ से जारी आंकडों में यह जानकारी दी गई है। साल भर पहले मार्च 2010 में चाय का उत्पादन 490 लाख किलोग्राम था। इस साल चाय उत्पादन असम में बेहतर पैदावार के चलते बढ़ा है। असल में साल भर पहले चाय का उत्पादन 147.8 लाख किलोग्राम था, जबकि मार्च 2011 में यह 236.6 लाख किलोग्रामऔरऔर भी