भारतीय रेल के जिन जनरल डिब्बों और लोकल उपनगरीय ट्रेनों में देश के बूढ़े, बच्चे, महिलाएं और युवा जानवरों की तरह सफर करते हैं, सरकार का मानना है कि उससे उसे सबसे ज्यादा घाटा हो रहा है और इनके किरायों में वृद्धि करना अब अपरिहार्य हो गया है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे बोर्ड के पूर्व सदस्य (ट्रैफिक) वीनू एन माथुर का कहना है यात्री किरायों को बढ़ाए बगैर रेलवे के घाटे को संभालऔरऔर भी

कंपनियों के शेयरों के भाव इस पर भी निर्भर करते हैं कि उसे चाहनेवाले कितने हैं। दिक्कत यह है कि हमारे यहां चाहनेवालों में निवेशक कम, ऑपरेटर ज्यादा हैं। लेकिन लंबे समय में ऑपरेटरों का करतब नहीं, कंपनी की असली ताकत ही चलती है। नहीं तो जिस पेंटामीडिया ग्राफिक्स को केतन पारेख ने फरवरी 2000 में 2275 रुपए तक उठा दिया था, वह आज 1.33 रुपए पर नहीं डोल रहा होता। इसलिए, ट्रेडिंग में सब चलता है,औरऔर भी

एक व्यक्ति विशाल संस्था से कैसे लड़ सकता है? अकेला चना भाड़ कैसे फोड़ सकता है? लेकिन अंधेरे को चीरने के लिए एक दीया ही काफी है। रावण की लंका जलाने के लिए एक हनुमान ही काफी होता है।और भीऔर भी

सफर पर निकला मुसाफिर हूं। न संत हूं, न परम ज्ञानी। मेरे पास ज्ञान का खजाना नहीं जो आपको बांटता फिरूं। हर दिन बोता हूं, काटता हूं। दिहाड़ी का चक्र। जो मिलता है, उसे आप से साझा कर लेता हूं।और भीऔर भी

हर कोई अधीर है। किसी को धैर्य नहीं। फटाफट नोट बनाने की पिनक है। दो-चार साल क्या, लोगबाग दो-चार महीने भी इंतजार करने को तैयार नहीं हैं। जो लोग लांग टर्म हैं, वे एफडी और पीपीएफ में लांग टर्म हैं। शेयर बाजार में तो वे भी शॉर्ट टर्म हैं। लोग कहने लगे हैं कि वॉरेन बफेट का जमाना लद गया। दुनिया का यह सबसे कामयाब निवेशक भी अपनी सोच बदल रहा है। मसलन, पहले बफेट टेक्नोलॉजी शेयरोंऔरऔर भी

जब मूल वस्तु ही स्थिर नहीं तो उसकी छाया कैसे स्थिर हो सकती है? दुनिया में सब कुछ हर पल बदल रहा है तो हमारे विचार कैसे स्थिर रह सकते हैं? पीछे छूट गए बच्चे की तरह उन्हें साथ ले आना जरूरी है।और भीऔर भी

शुक्रवार को शेयर बाजार में मिड कैप व स्मॉल कैप कंपनियों को तगड़ा झटका लगा। यूं तो सेंसेक्स व निफ्टी में क्रमशः 0.55 फीसदी और 0.59 फीसदी की ही गिरावट आई है, लेकिन 137 मिड व स्मॉल कैप कंपनियों के शेयर अब तक के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गए, जबकि 343 कंपनियों पर निचला सर्किट ब्रेकर लगा। अगर ये सर्किट ब्रेकर न होते तो न जाने उनमें कितनी गिरावट आ जाती। बाजार के कारोबारियों का कहना हैऔरऔर भी

केंद्र सरकार भले ही पेट्रोल की तरह सारे पेट्रोलियम उत्पादों के दाम को आखिरकार बाजार के हवाले कर देना चाहती है। लेकिन फिलहाल वह डीजल, मिट्टी के तेल और रसोई गैस के दाम बढ़ाने के बारे में नहीं सोच रही है। हालांकि, इन तीनों उत्पादों को बाजार मूल्य से कम दाम पर बेचने से तेल कंपनियों को रोजाना 360 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी के अनुसार इस समयऔरऔर भी

इसे बढ़ी हुई ब्याज दरों का असर कहें या औद्योगिक सुस्ती का नतीजा, लेकिन आंकड़े गवाह हैं कि इस साल औद्योगिक क्षेत्र को बैंकों से मिले ऋण में अभी तक पिछले साल के मुकाबले 55,138 करोड़ रुपए कम बढ़त हुई है। चालू वित्त वर्ष 2011-12 में 4 नवंबर तक बैंकों द्वारा दिया गया गैर-खाद्य ऋण या दूसरे शब्दों में मैन्यूफैक्चरिंग व उपभोक्ता क्षेत्र को दिया गया ऋण 2,25,211 करोड़ रुपए बढ़ा है, जबकि बीते वित्त वर्ष 2010-11औरऔर भी

खरीफ फसल के दौरान 2011-12 (अक्‍तूबर-सितम्‍बर) में चावल की सरकारी खरीद का आंकड़ा एक करोड़ टन का निशान पार कर गया है। खाद्य व उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार 17 नवम्‍बर, बुधवार तक चालू खरीफ सीजन के दौरान विभिन्‍न सरकारी एजेंसियों ने 1,01,04,088 टन चावल की खरीद की। इस मामले में पंजाब सबसे आगे है जहां 76,04,255 टन चावल खरीदा गया। 19,30,703 टन चावल खरीदने के साथ हरियाणा दूसरे नम्‍बर पर है। तीसराऔरऔर भी