रुपए में कमजोरी का सिलसिला जारी है। डॉलर के सापेक्ष उसकी विनियम दर सोमवार को दोपहर तीन बजे के आसपास 1/52 रुपए से नीचे चली गई। 5 मार्च 2009 के बाद पहली बार रुपया इतना नीचे गिरा है। शाम पांच बजे तक एमसीएक्स एसएक्स में एक डॉलर की दर 52.27 रुपए हो गई, वहीं दिसंबर फ्यूचर्स का भाव 52.50 रुपए रहा है। अगर बाजार की मानें तो जून 2012 तक डॉलर/रुपए की विनिमय दर 53.20 रुपए होऔरऔर भी

खरबपति निवेशक वॉरेन बफेट का कहना है कि यूरोप के ऋण संकट ने 17 सदस्यीय यूरोज़ोन की बुनियादी कमजोरी को उजागर किया है और महज बयानबाजी व घोषणाओं ने इसे नहीं सुलझाया जा सकता। सोमवार को जापान के दौरे के पहले बफेट ने सीएनबीसी से हुई बातचीत में कहा, “यह यूरो सिस्टम की प्रमुख व बुनियादी गड़बड़ी है। मैं जानता हूं कि अभी जो व्यवस्था चल रही है, उसमें बड़ी खामी है और यह खामी महज शब्दोंऔरऔर भी

एशिया-प्रशांत क्षेत्र की राष्‍ट्रीय मादक द्रव्‍य कानून प्रवर्तन एजेंसि‍यों के प्रमुखों की 35वीं बैठक मंगलवार, 22 नवंबर से आगरा में शुरू हो रही है। यह बैठक 25 नवंबर तक चलेगी। बैठक का आयोजन भारत सरकार की तरफ से सेन्‍ट्रल ब्‍यूरो ऑफ नारकोटि‍क्‍स, ग्‍वालि‍यर द्वारा संयुक्‍त राष्‍ट्र मादक द्रव्‍य और अपराध कार्यालय (यूएनओडीसी) के सहयोग से कि‍या जा रहा है। भारत में यह बैठक दूसरी बार हो रही है। पिछली बार 28 साल पहले दिल्ली में यह बैठकऔरऔर भी

भारतीय रेल के जिन जनरल डिब्बों और लोकल उपनगरीय ट्रेनों में देश के बूढ़े, बच्चे, महिलाएं और युवा जानवरों की तरह सफर करते हैं, सरकार का मानना है कि उससे उसे सबसे ज्यादा घाटा हो रहा है और इनके किरायों में वृद्धि करना अब अपरिहार्य हो गया है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे बोर्ड के पूर्व सदस्य (ट्रैफिक) वीनू एन माथुर का कहना है यात्री किरायों को बढ़ाए बगैर रेलवे के घाटे को संभालऔरऔर भी

कंपनियों के शेयरों के भाव इस पर भी निर्भर करते हैं कि उसे चाहनेवाले कितने हैं। दिक्कत यह है कि हमारे यहां चाहनेवालों में निवेशक कम, ऑपरेटर ज्यादा हैं। लेकिन लंबे समय में ऑपरेटरों का करतब नहीं, कंपनी की असली ताकत ही चलती है। नहीं तो जिस पेंटामीडिया ग्राफिक्स को केतन पारेख ने फरवरी 2000 में 2275 रुपए तक उठा दिया था, वह आज 1.33 रुपए पर नहीं डोल रहा होता। इसलिए, ट्रेडिंग में सब चलता है,औरऔर भी

एक व्यक्ति विशाल संस्था से कैसे लड़ सकता है? अकेला चना भाड़ कैसे फोड़ सकता है? लेकिन अंधेरे को चीरने के लिए एक दीया ही काफी है। रावण की लंका जलाने के लिए एक हनुमान ही काफी होता है।और भीऔर भी

सफर पर निकला मुसाफिर हूं। न संत हूं, न परम ज्ञानी। मेरे पास ज्ञान का खजाना नहीं जो आपको बांटता फिरूं। हर दिन बोता हूं, काटता हूं। दिहाड़ी का चक्र। जो मिलता है, उसे आप से साझा कर लेता हूं।और भीऔर भी

हर कोई अधीर है। किसी को धैर्य नहीं। फटाफट नोट बनाने की पिनक है। दो-चार साल क्या, लोगबाग दो-चार महीने भी इंतजार करने को तैयार नहीं हैं। जो लोग लांग टर्म हैं, वे एफडी और पीपीएफ में लांग टर्म हैं। शेयर बाजार में तो वे भी शॉर्ट टर्म हैं। लोग कहने लगे हैं कि वॉरेन बफेट का जमाना लद गया। दुनिया का यह सबसे कामयाब निवेशक भी अपनी सोच बदल रहा है। मसलन, पहले बफेट टेक्नोलॉजी शेयरोंऔरऔर भी

जब मूल वस्तु ही स्थिर नहीं तो उसकी छाया कैसे स्थिर हो सकती है? दुनिया में सब कुछ हर पल बदल रहा है तो हमारे विचार कैसे स्थिर रह सकते हैं? पीछे छूट गए बच्चे की तरह उन्हें साथ ले आना जरूरी है।और भीऔर भी

शुक्रवार को शेयर बाजार में मिड कैप व स्मॉल कैप कंपनियों को तगड़ा झटका लगा। यूं तो सेंसेक्स व निफ्टी में क्रमशः 0.55 फीसदी और 0.59 फीसदी की ही गिरावट आई है, लेकिन 137 मिड व स्मॉल कैप कंपनियों के शेयर अब तक के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गए, जबकि 343 कंपनियों पर निचला सर्किट ब्रेकर लगा। अगर ये सर्किट ब्रेकर न होते तो न जाने उनमें कितनी गिरावट आ जाती। बाजार के कारोबारियों का कहना हैऔरऔर भी