निवेश और युद्ध में वही सफल होता है जो रणनीति व योजना बनाकर चलता है। सबसे सफल निवेशक वो बनता है जो संकट का पहला संकेत मिलते ही घबराता नहीं। वो बाज़ार की हर तरह की स्थिति के लिए पहले से योजना बनाकर चलता है। साथ ही अड़ियल नहीं, बल्कि बाज़ार की स्थिति के अनुरूप लचीला रुख अपनाने को तैयार रहता है। यह भी जान लें कि बाज़ार में केवल जानकर या सटीक ज्ञान से भी नहींऔरऔर भी

भारत की सबसे बड़ी सम्पदा है उसकी मानव पूंजी। यही वो पूंजी है जो जीवन सुधारने की आशा में आज महाकुंभ में कोरोड़ों की तादाद में टूट पड़ी है। प्रयाग के संगम पर आस्था में डूबा सैलाब हिलोरे मार रहा है। लेकिन मोदी सरकार ने अब तक के लगभग 11 साल में उसे सही दिशा में लगाने पर ध्यान नहीं दिया। मोदी सरकार मेक-इन इंडिया के नाम पर विदेशी पूंजी के पीछे फूलों का गुलदस्ता लेकर दौड़तीऔरऔर भी

कहां है गरीबी, कहां है दरिद्रता और बेरोजगारी? मोदी सरकार कहती है कि उसने 2013-14 से 2022-23 के बीच के दस सालों में 25 करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर निकाल लिया है। अब देश में 29.17% के बजाय केवल 11.28% लोग ही गरीब रह गए हैं। भारतीय शेयर बाज़ार का पूंजीकरण सितंबर के बाद बराबर गिरने के बावजूद अब भी जीडीपी का 130% है। देश में 21 करोड़ पंजीकृत निवेशक और 11.5 करोड़ अलग याऔरऔर भी

ये हमारी-आपकी बची-खुची पूंजी में निकालने की जुगत भिड़ा रहे हैं। नियामक संस्था सेबी जल्दी ही 250 रुपए या इससे भी कम 100 रुपए की एसआईपी का रास्ता साफ करने की तैयारी में है। यह लालच दिखाकर कि म्यूचुअल फंडों की इक्विटी स्कीमों में नियमित धन लगाकर गरीब से गरीब देशवासी भी कॉरपोरेट की बढ़ती कमाई में हिस्सेदार बन सकता है। उसे एफडी, पीपीएफ या डाकघर जैसी बचत योजनाओं से असल में घाटा ही होता है क्योंकिऔरऔर भी