विदेशी निवेशकों के भारत छोड़कर चीन की तरफ भागने की तीन खास वजहें बताई जा रही हैं। एक, अमेरिका जहां चीन से मोलतोल करने की मुद्रा में है, वहीं वो भारत पर एकतरफा दबाव बनाकर अपनी शर्तें मनवा रहा है। उसे पता है कि भारत कहीं से मोलतोल करने की स्थिति में नहीं है। दूसरे भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले लगातार कमज़ोर होता जा रहा है। विदेशी निवेशकों को लगता है कि भारतीय शेयर बाज़ार से मुनाफाऔरऔर भी

भारत का मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र नहीं बढ़ेगा तो यहां के उद्योग-धंधे कैसे बढ़ेगे? उद्योग-धंधे नहीं बढ़ेंगे तो कॉरपोरेट क्षेत्र कैसे बढ़ेगा? कॉरपोरेट क्षेत्र नहीं बढ़ेगा तो शेयर बाज़ार कैसे बढ़ सकता है? भारत की विकासगाथा की इस ज़मीनी हकीकत ने विदेशी निवेशकों को हताश कर दिया है। केवल विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) ही नहीं, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) करनेवाले भी अब भारत से बिदक कर भागने लगे हैं। उन्हें यकीन है कि जो सरकार भ्रष्टाचार के ज़रिए विश्वऔरऔर भी

बीएसई का सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी-50 सूचकांक 27 सितंबर 2024 के ऐतिहासिक शिखर से अब तक 15% से ज्यादा गिर चुके हैं। शेयर बाज़ार के इस तरह धड़ाम होने की एकमात्र वजह है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) का पलायन। वे हमारे शेयर बाज़ार के कैश सेगमेंट ने 27 सितंबर 2024 से कल तक हमारे शेयर बाज़ार के कैश सेगमेंट से ₹2.36 लाख करोड़ निकाल चुके हैं। आखिर दुनिया की सबसे तेज़ गति से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाऔरऔर भी

सरकार के राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन (एनएसओ) ने चालू वित्त वर्ष 2024-25 में मौजूदा मूल्यों पर जीडीपी का दूसरा अग्रिम अनुमान बढ़ाकर ₹331.03 लाख करोड़ कर दिया है। इसका पहला अग्रिम अनुमान ₹324.11 लाख करोड़ का था। इस समय डॉलर 87.36 रुपए का चल रहा है तो मुद्रास्फीति को जोड़कर हमारा जीडीपी मार्च 2025 तक 3.79 ट्रिलियन डॉलर का होगा। इस बीच पिछले तीन साल से प्रधानमंत्री देश की अर्थव्यवस्था को पांच ट्रिलियन डॉलर और उत्तर प्रदेश वऔरऔर भी

जीवन बड़ा जिद्दी होता है। वो कहीं भी प्रतिकूल से प्रतिकूल हालात में भी पनप जाता है। पेड़ सूख जाए और उसकी लकड़ी सड़ने लग जाए तो उस पर भांति-भांति के कुकुरमुत्ते उग आते हैं। इसी तरह उद्यमी और उद्योग-धंधे अपने उभरने की ज़मीन खुद बना लेते हैं। कुछ न हो, तब भी वे कुछ न कुछ करने का रास्ता खोज ही निकालते हैं। अभी उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 45 दिनों तक महाकुम्भ चला। कहने कोऔरऔर भी