बेहद शर्म की बात है श्रम मंत्री का गर्व
देश के गहराते आर्थिक संकट और अवाम पर गहराती आपदा को छिपाने के लिए मोदी सरकार रोज़गार के आंकड़ों के साथ जबरदस्त हेरफेर और विचित्र व्याख्या कर रही है। जैसे, श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया कहते हैं कि मोदीराज में 2014 से 2024 के दौरान कृषि क्षेत्र में रोज़गार 19% बढ़ा है, जबकि यूपीए राज में 2004 से 2014 के दौरान 16% घटा था। श्रम मंत्री को कौन बताए कि यह गर्व नहीं, शर्म की बात है किऔरऔर भी
बीस साल से घटता जा रहा है रोज़गार
मोदी सरकार ने रोज़गार मिले लोगों की गिनती मे भयंकर ठगी व फ्रॉड किया है और देश-दुनिया के आंखों में धूल झोंकी है। फिर भी आबादी के अनुपात में रोज़गार उपलब्ध कराने में उसका रिकॉर्ड यूपीए सरकार से बदतर रहा है। वैसे, यूपीए सरकार के दौरान भी रोज़गार की स्थिति बेहतर नहीं थी। यूपीए सरकार के पहले साल 2004-05 आबादी में कामगारों का अनुपात या डब्ल्यूपीआर 62.2% था। यह घटते-घटते 2009-10 तक 55.9% और 2011-12 तक 54.7%औरऔर भी
रोज़गार का बढ़ना और डेटा का करतब
करीब छह साल पहले सरकार की एक लीक हो गई आवधिक श्रमबल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) रिपोर्ट से जब पता चला कि देश में बेरोजगारी की दर 2017-18 में 45 सालों के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गई थी तो हर तरफ हंगामा मच गया। मोदी सरकार के इसका ज़ोरदार खंडन किया। लेकिन मई 2019 में उसी सरकार ने दोबारा सत्ता संभाली तो दस दिन में ही उसे पुष्टि करनी पड़ी कि लीक हो गई रिपोर्ट की बातें एकदम सचऔरऔर भी
साल में बने दो नहीं, 4.6 करोड़ रोज़गार!
सरकार अपनी छवि बनाने के लिए बड़े-बड़े विज्ञापन निकाले, सफेद झूठ तक बोले तो चल सकता है। लेकिन जब वो देश में रोज़गार के मसले पर झूठ बोलती है तो ऐसा अपराध करती है जो अक्षम्य है, जिसके लिए भविष्य उसे कभी माफ नहीं कर सकता। नया साल शुरू होने के दो दिन बाद ही केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने मीडिया को बुलाकर दावा किया कि यूपीए के दस साल के शासन में 2004 से 2014औरऔर भी
स्टार्ट-अप कितने बने और कितने ध्वस्त!
छल-छद्म, झूठ, तिकड़म और विज्ञापन से राजनीति में झांसा दिया जा सकता है। लेकिन अर्थनीति में नहीं। इसमें बड़े-बड़े विज्ञापन देकर और झूठ बोलकर भी सच को छिपाया नही जा सकता। कुछ दिन पहले अखबारों में मोदी के साथ नौजवान लड़कों व लड़कियों का फोटो लगाकर पूरे पेज़ के विज्ञापन में दावा किया गया कि नौ साल में 1.59 लाख से ज्यादा स्टार्ट-अप बने हैं। इन्हें करीब ₹13 लाख करोड़ की फंडिंग मिली और इनमें सीधे-सीधे 17.2औरऔर भी





