जो जुगाड़ ने बचाया था, नए सच ने तोड़ा
अर्थशास्त्रियों और आईएमएफ व विश्व बैंक जैसी संस्थाओं के लिए देश का राजकोषीय घाटा, खासकर जीडीपी से उसका अनुपात बड़ा पवित्र मानक होता है। अपने यहां इसके ऊपर से एफआरबीएम एक्ट के तहत 31 मार्च 2021 तक राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3% तक ले आना था। कोरोना महामारी के चलते यह लक्ष्य नहीं पूरा हो सका। अब सरकार ने इसे 2030 तक खिसका दिया है। इस बार 1 फरवरी को बजट पेश हुआ तो वित्तमंत्री निर्मलाऔरऔर भी





