उद्योग जगत की आशा बदली निराशा में
चीन ने सारे अमेरिकी आयात पर 34% शुल्क लगाकर जवाब दे दिया। फिर ट्रम्प ने पलटकर उस पर 50% टैरिफ बढ़ाकर 104% कर डाला। लेकिन जवाबी टैरिफ पर अभी तक भारत का कोई जवाब नहीं आया है। मोदी जी चुप हैं। देश के आम लोग तो औरंगजेब की कब्र के बाद वक्फ की जमीन के कब्जे में उलझे हैं। लेकिन कॉरपोरेट क्षेत्र टैरिफ युद्ध पर सरकार के पस्त रवैये से परेशान है। उसे लगता है कि अमेरिकाऔरऔर भी
देश डूबता रहा, वे प्लस-वन चिल्लाते रहे
शेयर बाज़ार का साफ संदेश है कि डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा जवाबी टैरिफ लगाना न अमेरिका के लिए अच्छा है, न बाकी दुनिया या भारत के लिए। फिर भी हमारे देश का गोदी मीडिया और सरकार के बिके हुए अर्थशास्त्री शोर मचाए जा रहे हैं कि अमेरिका का टैरिफ लगाना भारत के लिए लाभप्रद है। खुद सरकार में बोलने की हिम्मत नहीं तो सूत्रों के हवाले खबरें चलाई जा रही हैं। ये वही सूत्र व अर्थशास्त्री हैं जोऔरऔर भी
सब भिड़ने पर उतारू, मोदी भागने पर!
डोनाल्ड ट्रम्प के जवाबी टैरिफ पर मेक्सिको, कनाडा, यूरोपीय संघ और चीन से लेकर वियतनाम व बांग्लादेश तक पलटकर वार कर रहे हैं। लेकिन भारत सरकार चुप है। अधिकारिक सूत्रों के हवाले कहा जा रहा है कि भारत को ज्यादा चिंतित होने की ज़रूरत नहीं क्योंकि उसके प्रतिस्पर्धी देशों पर ज्यादा टैरिफ लगाया गया है जिसका फायदा हमें मिलेगा। वे इस हकीकत को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं कि अमेरिका में होनेवाले आयात में भारत काऔरऔर भी
निवेश के पांच वचन जिन्हें कभी न तोड़ें
शेयर बाज़ार में निवेश से लम्बे समय में अच्छा कमाने के लिए समय पर अच्छे स्टॉक्स चुनने से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है गलत स्टॉक्स को गलत भाव पर खरीदकर फंसने से बचना। गलतियों से बचेंगे तो ठीकठाक कंपनियों के शेयर चार-पांच साल में आराम से 12-14% की सालाना चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) से रिटर्न दे देते हैं। लेकिन 20-25 स्टॉक्स के पोर्टफोलियो में पांच-दस गलत स्टॉक्स फंस गए तो बाकियों का रिटर्न भी खाकर बैठ जाते हैं। इसलिएऔरऔर भी






