मोदी सरकार ने अपने टुच्चे स्वार्थ के लिए भारत को अमेरिका और चीन के दो पाटों के बीच बुरी तरह फंसा दिया है। वो ट्रम्प के 26% जवाबी टैरिफ का विरोध इसलिए नहीं कर रही है क्योंकि अमेरिका में न्याय विभाग की सघन जांच के बाद न्यूयॉर्क की संघीय अदालत ने गौतम अडाणी के खिलाफ रिश्वतखोरी और फ्रॉड का अभियोग तय कर दिया है। इस पर पिछले महीने हेग कन्वेंशन के तहत भारत सरकार को अहमदाबाद कीऔरऔर भी

चीन ने राष्ट्रवाद का दम दिखा दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन के आयात पर पहले के 20% के ऊपर 34% टैरिफ (कुल 54%) लगाया तो उसने भी अपने यहां सारे अमेरिकी माल के आयात पर 34% शुल्क लगा दिया। ट्रम्प ने जवाब में 104% टैरिफ लगा दिया तो चीन ने भी टैरिफ बढ़ाकर 84% कर दिया। ट्रम्प ने झल्लाकर चीनी माल पर आयात शुल्क 145% कर दिया तो चीन ने उसका जवाब 125% शुल्क सेऔरऔर भी

हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती। इसी तरह हर चर्चित और चढ़ा हुआ शेयर अच्छा नहीं होता। हमें हर चमक को समझने का सलीका विकसित करना होता है। साथ ही पहले से चढ़े हुए शेयरों की फांस से बचना चाहिए। निवेश की दुनिया में हमें विश्वास नहीं, संदेह से शुरू करना चाहिए। उन्हीं कंपनियों में निवेश करें जिनका बिजनेस मॉडल हमें अच्छी तरह समझ में आ जाए। मुफ्त के तमाम सलाहकार बताते फिरते हैं कि यह मल्टी-बैगरऔरऔर भी

टैरिफ युद्ध पर दुनिया के सबसे ज्यादा आयात करनेवाले देश अमेरिका और सबसे ज्यादा निर्यात करनेवाले देश चीन के बीच वार-पलटवार जारी है। अमेरिका के 54% के जवाब में चीन में 84% टैरिफ लगाया तो अमेरिका ने उसे पहले बढ़ाकर 104% और फिर 125% कर दिया। 27 देशों के यूरोपीय संघ ने अमेरिका के 20% आयात शुल्क के जवाब में 25% आयात शुल्क का ऐलान कर दिया। लेकिन हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभी तक खामोश हैं, जबकिऔरऔर भी