लालच का कोई तर्क नहीं होता। बस फायदा ही फायदा दिखता है। पांच रुपए का शेयर खरीद लिया और दो-चार साल में 50 रुपए हो गया तो दस गुना रिटर्न! दिक्कत यह है कि आज भी शेयर बाज़ार के ज्यादातर निवेशक इसी तरह के तर्कहीन लालच में अंधे होते हैं। हर किसी के पास रिटर्न की पूरी गणना व ख्बाव होता है। लेकिन रिस्क का कोई हिसाब-किताब नहीं होता। समझदारी दिखाई तो कंपनी का पिछला ट्रैक रिकॉर्डऔरऔर भी

अपने यहां महिलाओं का बहुत बड़ा हिस्सा घर-परिवार चलाने के बेहद ज़रूरी काम में रात-दिन लगा रहता है। लेकिन उन्हें इसका कहीं से कोई भुगतान नहीं मिलता तो इन महिलाओं की गिनती देश की श्रम शक्ति में नहीं होती। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के एक नए अध्ययन में हिसाब लगाया गया है कि अगर महिलाओं को इस अनपेड काम का भुगतान मिलने लग जाए तो इससे हमारे जीडीपी या अर्थव्यवस्था में लगभग 7.5% का इज़ाफा हो जाएगा।औरऔर भी

सरकार का सर्वेक्षण कहता है कि बीते वित्त वर्ष 2022-23 में देश में 15 साल के ऊपर के सभी भारतीयों की श्रम बल या बाज़ार में भागादारी 54.6% है जिसमें से महिलाएं 31.6% हैं। वहीं, प्रोफेशनल संस्था सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (सीएमआईई) का कहना है कि श्रम बाजार में यह भागीदारी 2022-23 में मात्र 39.5% रही है जो 2016-17 के बाद का न्यूनतम स्तर है। इसमें भी केवल पुरुषों का हिस्सा 66% है, जबकि महिलाओं काऔरऔर भी

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः से लेकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम तक भारत में महिला शक्ति का बड़ा हल्ला है। लेकिन जिस देश में प्रधानमंत्री तक महिला हुई है, अभी वित्त मंत्री और राष्ट्रपति तक महिला हैं, क्या वहां महिलाएं सशक्त हुई हैं और श्रम बाज़ार में उनकी मजबूत भागीदारी है? भारत दुनिया के उन मुठ्ठी भर देशों में शुमार हैं जहां श्रम बाज़ार में महिलाओं की भागीदारी भयंकर गति से घटी है। इस पतन मेंऔरऔर भी