आईपीएल के कमिश्नर ललित मोदी  मेरठ के पास के मोदीनगर वाले मोदी समूह से वास्ता रखते हैं। वे मोदी एंटरप्राइसेज और गॉडफ्रे फिलिप्स के प्रमुख केके मोदी के मझले बेटे हैं। ललित पढ़ने-लिखने में यूं ही थे। भारत में किसी कॉलेज में एडमिशन नहीं मिला तो अमेरिका चले गए पढ़ने। ड्यूक यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे थे तो ड्रग्स के चक्कर में पड़ गए। लेकिन घरवालों को असली दिक्कत तब हुई जब उन्होंने अपने से नौ साल बड़ीऔरऔर भी

ज्यादातर भारतीय म्यूचुअल फंड में निवेश करने से घबराते हैं। ऐसा इसलिए कि एक तो उन्हें इसमें भारी जोखिम नजर आता है, दूसरे वे जानते ही नहीं कि निवेश का यह माध्यम काम कैसे करता है। यह बात रिसर्च व विश्लेषण से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय फर्म बोस्टन एनालिटिक्स की ताजा रिपोर्ट से सामने आई है। बोस्टन एनालिटिक्स ने पिछले महीने देश के 15 शहरों में तकरीबन 10,000 लोगों से बातचीत के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। रिपोर्ट काऔरऔर भी

अक्टूबर 2007 में राठी बार्स ने पब्लिक इश्यू में 35 रुपए के मूल्य पर अपने शेयर जारी किए थे। इसके बाद न तो उसने कोई डिविडेंड दिया है न ही बोनस शेयर जारी किए हैं। कंपनी की चुकता पूंजी तब भी 16.33 करोड़ रुपए थी और अब भी उतनी ही है। इसमें प्रवर्तक राठी परिवार की हिस्सेदारी 57.39 फीसदी है। लेकिन मंगलवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में उसके शेयर 17.40 रुपए पर पहुंचे तो यह उसकेऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी की तरफ से 14 जीवन बीमा कंपनियों को कोई भी नया यूलिप प्लान लाने से रोक दिए जाने के बावजूद न तो बीमा क्षेत्र के नियामक आईआरडीए और न ही निजी बीमा कंपनियों में कोई खलबली मची है। आईआरडीए के आला अफसर छुट्टी मना रहे हैं। जीवन बीमा कंपनियों के साझा मंच लाइफ इंश्योरेंस काउंसिल की तरफ से उसके प्रमुख एस बी माथुर ने इतना भर कहा है कि मौजूदा यूलिपधारकों कोऔरऔर भी

बताते हैं कि दूसरों को अपने जैसा समझो। आत्मवत् सर्वभूतेषु। लेकिन दूसरा तो हमसे भिन्न है। स्वतंत्र व्यक्तित्व है उसका। हम जब भी इसे नहीं समझते, अपनी ही बातें थोपने लगते हैं तो तकरार बढ़ जाती है। इसलिए हरेक की भिन्नता का सम्मान जरूरी है।और भीऔर भी

आज की भागमभाग भरी जिंदगी में हम लोगों से बातें खूब करते हैं, लेकिन मिलते नहीं। इसलिए जान-पहचान वालों की भीड़ के बीच भी अकेले होते चले जाते हैं। अरे, कभी घर तो आइए। बात ही नहीं, मुलाकात भी करते हैं। खोल से निकलकर रिश्तों की बुनियाद रखते हैं।और भीऔर भी

राजेश के मिश्र बड़ी विचित्र स्थिति है। बीमा के नाम पर आम अनजान लोगों को यूलिप (यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस पॉलिसी) की घुट्टी पिलाई जा रही है। बीमा नियामक संस्था आईआरडीए के मुताबिक यूलिप में पी का मतलब प्लान नहीं, पॉलिसी है। लेकिन हकीकत में तो यह प्लान ही है, निवेशकों को छलने का एक तरह का गेम-प्लान क्योंकि इसका केवल 2 फीसदी हिस्सा पॉलिसीधारक की बीमा में जाता है और 98 फीसदी निवेश में। बीमा कंपनियां कहतीऔरऔर भी

हमारी पूंजी बाजार नियामक संस्था, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) लगता है मनबढ़ हो गई है। अभी वित्त मंत्रालय की मध्यस्थता में यूलिप (यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस पॉलिसी) पर बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए से हुई सहमति को एक दिन भी नहीं बीते हैं कि उनसे 9 अप्रैल के विवादास्पद आदेश से ही नया पंगा निकाल दिया है। उसका कहना है कि जिन 14 जीवन बीमा कंपनियों को उसने यूलिप के लिए सेबी में पंजीकरण जरूरी करने कीऔरऔर भी

ठीक एक हफ्ते बाद आज ही के दिन भारतीय रिजर्व बैंक नए वित्त वर्ष 2010-11 की सालाना मौद्रिक नीति घोषित करेगा। इसलिए वह क्या करेगा क्या नहीं, इसको लेकर कयासों का दौर तेज होने लगा है। आज वित्त मंत्रालय में वित्तीय सेवाओं के सचिव आर गोपालन ने कहा कि रिजर्व बैंक अपनी मौद्रिक नीति थोड़ा और कठोर बना सकता है। वे राजधानी दिल्ली में संवाददाताओं से बात कर रहे थे। बता दें कि रिजर्व बैंक स्वायत्त नियामकऔरऔर भी

इस समय इनफोसिस के पास कैश या कैश में बदलने योग्य दौलत 15,857 करोड़ रुपए की है जो साल भर पहले के 10,993 करोड़ रुपए से 44.24 फीसदी ज्यादा है। इसमें से कैश व उसके समतुल्य रकम 12,111 करोड़ रुपए है जिसमें से कंपनी का अपना कैश व बैंक बैलेंस 9797 करोड़ रुपए का है। कंपनी ने सर्टीफिकेट ऑफ डिपॉजिट में 1190 करोड़ रुपए लगा रखे हैं जिसे कभी भी भुनाया जा सकता है। इसके अलावा उसकेऔरऔर भी