इस हफ्ते गुरुवार, 1 फरवरी को सरकार नए वित्त वर्ष 2024-25 का अंतरिम बजट पेश करने जा रही है। चुनाव के ठीक पहले का बजट किसी आम बजट से भी ज्यादा अहम हो सकता है क्योंकि तब सरकार अवाम को थोड़ा ज्यादा याद रखती है। टैक्स नहीं लगा सकती। हालांकि गरीब नवाज़ होने का हल्ला खूब मचाएगी। मीडिया अगले चार-पांच दिन तक बजट को लेकर पगलाया रहेगा। वो क्या कहेगा, इसका आसानी से अनुमान लगाया जा सकताऔरऔर भी

अपने शेयर बाज़ार में अच्छी कंपनियों की कमी नहीं। एक ढूंढो, हज़ार मिल जाती हैं। लेकिन दिक्कत यह है कि लगभग सारी की सारी अच्छी कंपनियां हाथ से निकल चुकी हैं। उनके शेयर इस वक्त आसमान से बातें कर रहे हैं। इनमें से पांच-दस दिन की ट्रेडिंग तो की जा सकती है। लेकिन लम्बे समय के लिए इन्हें खरीदना फालतू का जोखिम उठाना है। जोखिम भी उठाओ और कायदे का रिटर्न भी न मिले तो क्या फायदा!औरऔर भी

गणतंत्र, संविधानप्रदत्त अधिकारों से सम्पन्न नागरिकों का देश। अंग्रेज़ों द्वारा गुलामी के दौरान मॉरीशस लेकर सूरीनाम और दूसरे देशों में बसाए भारतीय वापस लौटकर नहीं आए तो बात समझ में आती है। खाड़ी के देशों में गए कामगार वापस मुल्क नहीं लौट रहे तो वजह साफ है। लेकिन आज जिस तरह गरीब व बेरोज़गार नौजवान ठगों और बिचौलियों का शिकार बनकर भी विदेश जाने को लालायित हैं, प्रोफेशनल अपनी बिकाऊ प्रतिभा के दम पर वर्क वीज़ा हासिलऔरऔर भी

पिछले एक दशक में देश छोड़कर बाहर भाग रहे गरीबों, नौजवानों, प्रोफेशनल्स और अमीरों की संख्या बहुत तेज़ी से बढ़ी है। खुद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संसद में 21 जुलाई 2023 को बताया था कि 2022 में कुल 2,25,260 भारतीयों ने अपनी भारतीय नागरिकता छोड़ी है। 2020 में यह संख्या 85,256 थी। दो साल में ढाई गुना से ज्यादा! वित्त वर्ष 2011-12 से लेकर 2022-23 तक कुल 16,63,440 भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ी है। बीते सालऔरऔर भी