रिजर्व बैंक के गवर्नर हों, सेबी के चेयरमैन हों या केंद्र सरकार में सचिव स्तर के अधिकारी, सारे के सारे नौकरशाह सरकार के नौकर होते हैं। ये कभी राष्ट्रहित में नहीं, हमेशा सरकार-हित में ही सोचते है। लेकिन पिछले अप्रैल से लेकर इस अप्रैल तक के बारह महीनों में देश पर बारह सालों से राज कर रही मोदी सरकार ने अपने कर्मों से साबित कर दिया है कि वह भले ही देश को विकसित और आर्थिक महाशक्ति बनाने की डकार भरे, लेकिन उसे राष्ट्रीय स्वामिभान, देश की संप्रभुता और आर्थिक विकास की कोई परवाह नहीं है। अमेरिका ने सैकड़ों भारतीयों को हथकड़ी-बेड़ी लगाकर अमृतसर में ला पटका, मोदी सरकार चुप रही। ट्रम्प ने भारत पर 50% टैरिफ लगा दिया, सरकार चुप रही। ऑपरेशन सिंदूर के बाद ट्रम्प कहता रहा कि उसने भारत-पाकिस्तान का युद्ध रुकवा दिया। मोदी ने इसका कोई जवाब नहीं दिया। ट्रम्प ने कहा कि रूस से कच्चा तेल मत लो, हमने चुपचाप मान लिया। अब भी ट्रम्प भारत को नरक बोलकर चला जाता है, सरकार कोई जवाब नही देती। साफ है कि मोदी सरकार का राष्ट्र की अस्मिता से कोई लेना-देना नहीं। वो येनकेन प्रकारेण सत्ता पर कब्जा करके जनधन की अबाध लूट जारी रखना चाहती है। अब तो जीडीपी बढ़ाने पर उसका तिलिस्म भी भरभराकर टूट गया है। सच खुल गया कि उसने अर्थव्यवस्था का सत्यानाश कर दिया है। अब बुधवार की बुद्धि…
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