सरकारी दावों पर यकीन करें तो देश में अब कोई बेहद गरीब नहीं बचा और स्वास्थ्य, शिक्षा व जीवन स्तर जैसे तमाम पहलुओं को मिलाकर देखें तो बहुआयामी गरीब लोगों का आबादी में हिस्सा 2015-18 से 2019-21 के बीच 24.85% से घटकर 14.96% पर आ चुका है। लेकिन देश की लगभग 60% आबादी या 80 करोड़ गरीबों को पांच किलो राशन मुफ्त देने की कोरोनाकाल में साल 2020 में शुरू की गई योजना पांच साल और बढ़ाऔरऔर भी

मोदी सरकार को दो काम बखूबी आते हैं। एक मीडिया व हेडलाइंस को मैनेज करते हुए जमकर हल्ला मचाना और दूसरा टैक्स बढ़ाना। उसने इन दोनों ही कामों को अभीष्टतम स्तर तक पहुंचा दिया है। बहुत सारा अनाप-शनाप सरकारी खर्च उसने जमकर बढ़ा दिया। लेकिन अर्थव्यवस्था के स्वस्थ व संतुलित विकास के लिए निजी निवेश, निजी खपत और निर्यात को भी बढ़ाना पड़ता है। सरकारी खर्च के रूप में अर्थव्यवस्था को बढ़ाने का केवल एक इंजिन चलऔरऔर भी

सत्य के आधार पर ही जीवन-जगत का विकास होता है। सारा विज्ञान सत्य पर ही आधारित है। ज़रा-सी चूक बंटाधार कर देती है। चूक तो अनजाने में होती है। लेकिन झूठ तो जान-बूझकर सच्चाई को छिपाने के लिए बोला जाता है। सच नकारात्मक कभी नहीं, हमेशा सकारात्मक होता है। नए वर्ष व सम्वत 2080 की शुरुआत हमें सत्य के साथ ही करना चाहिए। आखिर हमारी अर्थव्यवस्था के द्रुत विकास का सच क्या है? चालू वित्त वर्ष 2023-24औरऔर भी

दीपावली के साथ इस साल का त्योहारी सीजन अब खत्म हो गया। यह हमारी कंपनियों के लिए घरेलू बाज़ार से कमाई का सबसे अच्छा मौसम होता है। निर्यात से कमाई तो क्रिसमस तक चलती रहती है। लेकिन निर्यात का मोर्चा तो बराबर ठंडा चल रहा है। सितंबर में हमारा निर्यात 2.6% घटा था, जबकि अक्टूबर से दिसंबर तक अनुमान है कि यह 6.3% बढ़ सकता है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने हिसाब लगाया है कि हमारे कॉरपोरेट क्षेत्रऔरऔर भी

जलाओ दीये, पर रहे ध्यान इतना, अंधेरा धरा पर कहीं रह न जाए। सुख, समृद्धि व खुशहाली का त्योहार आप सभी को बहुत-बहुत मुबारक। दीपावली असत्य पर सत्य की जीत का त्योहार है। नई शुरुआत की बेला है। यह काहिली व दलिद्दर को मिटाने और कर्तव्य, करतब व कर्म की राह पर डट जाने के संकल्प का पर्व है। अपने हिस्से की मेहनत व उद्यमशीलता में कोई कोर-कसर नहीं छोड़नी चाहिए। लेकिन यह दौर साथ-साथ बढ़ने औरऔरऔर भी