जो आपदा में भागे, बनें इनके अवसर!
जो सत्ता के रंग में नहीं रंग सकते, दलाली नहीं कर सकते, छद्म राष्ट्रवाद का उम्माद नहीं फैला सकते हैं और भारत से बाहर दुनिया में कहीं सेटल हो सकते हैं, उनमें से ज्यादातर लोग देश छोड़कर भाग रहे हैं। इनमें बड़ी तादाद एचएनआई (हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल्स) या अति अमीर लोगों की है। ये लोग बाहर बसने के लिए गोल्डन वीसा खरीद रहे हैं। लंदन की वैश्विक नागरिकता व आवास सलाहकार फर्म हेनली एंड पार्टनर्स की एकऔरऔर भी
राम-राम के शोर में ये कैसा सन्निपात!
जो कभी नहीं हुआ, वो अभी हो रहा है। शुक्रवार, 12 मार्च 1993 को जब सुबह से ही मुंबई बम धमाकों से थर्रा रही है, पूरी मुंबई में 257 लोग मारे गए और 1400 से ज्यादा घाटल हो गए, दोपहर डेढ़ बजे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के बेसमेंट तक में जबरदस्त धमाका हुआ, तब भी अपना शेयर बाजार बंद नहीं हुआ था और उसमें सोमवार 15 मार्च से बाज़ार में बाकायदा ट्रेडिंग होने लगी। बुधवार, 26 मार्च 2008औरऔर भी
मूल्य का पेड़ अभी, फल मिलता बाद में
शेयर बाज़ार के निवेशकों का साबका बार-बार ‘वैल्यू’ से पड़ता है। वॉरेन बफेट का मशहूर वाक्य है कि ‘प्राइस’ वो है जो आप देते हो और ‘वैल्यू’ वो है जो आप पाते हो। अंग्रेज़ी में पारंगत लोग भले ही इसका अर्थ और मर्म समझ लें। लेकिन हिंदी या अन्य भारतीय भाषाएं बोलने-समझने वाले लोगों को इसमें काफी दिक्कत होती है। प्राइस का अनुवाद कीमत, दाम या भाव हो सकता है और वैल्यू को हम मूल्य कह सकतेऔरऔर भी
सच खोल रहा गुजरात मॉडल की पोल
पिछले 10-12 साल से देश में गुजरात के आदर्श मॉडल का हल्ला चल रहा है। लेकिन पिछले माह निकारागुआ के रास्ते अमेरिका भागने की जुगत में लगे 303 नौजवानों में से सबसे ज्यादा 65 युवा गुजरात के थे। इन्हीं में मेहसाणा के एक युवक का कहना था, “यहां तो केवल उन्हीं को सरकारी नौकरी मिलती है जो पैसा खिलाते हैं या जिनकी तगड़ी पहुंच है। प्राइवेट में कायदे का पैसा नहीं मिलता। इसलिए भारत में रहकर हमेशाऔरऔर भी






