मैन्यूफैक्चरिंग बढ़ा नहीं, रोजगार कहां!
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन का यह मानना बेहद खतरनाक है कि सरकार बेरोज़गारी जैसी समस्या नहीं सुलझा सकती। अगर यही बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या भाजपा के किसी अन्य बड़े नेता ने कही होती तो राजनीतिक तूफान मच गया होता। पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने तो नागेश्वरन के बयान के बाद कह ही दिया कि भाजपा को कुर्सी खाली कर देनी चाहिए, कांग्रेस के पास बेरोज़गारी के मसले को सुलझाने की ठोस योजना हैऔरऔर भी
रोता डेमोग्राफिक डिविडेंड खून के आंसू
यह सच्चाई जानकर भारत के हर देशभक्त का कलेजा चाक हो जाएगा कि हमारी बेरोज़गार आबादी का लगभग 83% हिस्सा युवाओं का है। यह वे नौजवान युवक व युवतियां हैं जिन्हें भारत का डेमोग्राफिक डिविडेंड कहा जाता है और जिसके दम पर भारत के बहुत तेज़ी से लम्बे समय तक विकास करते रहने की भविष्यवाणी की गई थी। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) और मानव विकास संस्थान (आईएचडी) द्वारा बीते मंगलवार को जारी ‘भारत रोज़गार रिपोर्ट 2024’ मेंऔरऔर भी
भारत 25% विकसित, छूटेगा 75% पीछे
हमारे रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर व शिकागो यूनिवर्सिटी में फाइनेंस के प्रोफेसर रघुराम राजन का कहना है कि भारत का 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बन पाना मुश्किल है और इस लक्ष्य की बात करना भी तब बकवास है जब देश के इतने सारे बच्चों के पास हाईस्कूल तक की शिक्षा नहीं है और डॉप-आउट दरें बहुत ज्यादा हैं। इस इंटरव्यू के बाद बहुत सारे सरकारी अर्थशास्त्री उनके पीछे पड़ गए और चिल्लाने लगे कि राजन भारतऔरऔर भी
विकास के हाइप पर यकीन बड़ी गलती
नए वित्त वर्ष 2024-25 का आगाज़। नए हफ्ते का पहला दिन। ऐसा संयोग कभी-कभी ही मिलता है। हमें इसे अप्रैल-फूल के चक्कर में व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए, बल्कि सत्य के सफर का प्रस्थान बिंदु बना लेना चाहिए। हम महज शेयर बाज़ार के निवेशक या ट्रेडर ही नहीं, बल्कि अपनी अर्थव्यवस्था के सबसे प्रतिबद्ध प्रेक्षक भी हैं। कारण, निवेशक व ट्रेडर के रूप में हमारा पूरा वजूद ही अर्थव्यवस्था के हाल पर टिका हुआ है। इसलिए सारे हाइपऔरऔर भी
सागर में गोता गहरा तभी मोती निवेश के
सेंसेक्स व निफ्टी ही नहीं, स्मॉल-कैप व मिड-कैप सूचकांकों की चाल देखकर हम अक्सर मगन हो जाते हैं कि वाह! शेयर बाज़ार में क्या तेज़ी चल रही है। आकार और उद्योग व सेवा क्षेत्र पर आधारित ऐसे 15-15 सूचकांक अलग से हैं जिनकी धड़कनों से बाज़ार का ताज़ा हाल जाना जा सकता है। लेकिन इतना ज्ञान बिजनेस चैनलों व सोशल मीडिया के सतही एनालिस्टों के लिए काफी हो सकता है, शेयर बाज़ार में गहरी पैठ की चाहऔरऔर भी





