आशावाद के बाद बाज़ार में अभी अनिश्चितता का आलम है। जहां बेहतरी की कहानियां शेयर बाज़ार में लालच की भावना को हवा देती रहीं, वहीं अनिश्चितता भय को बढ़ाती जा रही है। बाज़ार से लालच की भावना भाग चुकी हैं। कभी यूक्रेन पर रूस के हमले और जवाब में अमेरिकी कार्रवाई के खतरे तो कभी अमेरिका में ब्याज दर बढ़ाए जाने की आशंका के नाम पर बाज़ार में बिकवाली बढ़ जाती है। इसमें भारत ही नहीं, दुनियाऔरऔर भी

शेयर बाज़ार में हर दिन ट्रेडरों के बीच जो गुत्थम-गुत्था चलती है, उसमें जान डालने के लिए माहौल बनाना पड़ता है। ऐसा माहौल जो लोगों की लालच व भय की भावना को भरपूर हवा दे। साल 2020 और 2021 में हर तरफ कहानियां फैलाई गईं कि अर्थव्यवस्था सुधर रही है। कोई कहता कि V के आकार में अर्थव्यवस्था उठ रही है, कोई कहता W के आकार में तो कोई कहता कि K के आकार में। हमारी अर्थव्यवस्थाऔरऔर भी

शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग में भाव लालच और भय की भावनाओं से तय होते हैं। लेकिन लालच और भय की इन भावनाओं को कहां से हवा व गति मिलती है? फिर चुनावों का संदर्भ लेते हैं। उत्तर प्रदेश में धारणा बनाई जा रही है कि समाजवादी पार्टी आ गई तो गुड़ों का राज होगा, सभी असुरक्षित, एक ही परिवार का डंका बजेगा। सामने से कहा जा रहा है कि भाजपा झूठ ही झूठ बोलती है, किसान विरोधीऔरऔर भी

चुनावों का मौसम है। बढ़-चढ़कर दावे किए जा रहे हैं। पक्ष-विपक्ष दोनों नहीं जीत सकते। लेकिन दोनों का दावा कि सामनेवाले का सूपड़ा साफ हो जाएगा। अवाम की भावनाओं को हवा दी जा रही है। शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग भी इसी तरह भावनाओं का खेल है। निवेश के सबसे बड़े गुरु बेंजामिन ग्राहम का मशहूर कथन है कि शेयर बाज़ार छोटे समय में वोटिंग मशीन की तरह काम करता है और लम्बे समय में तराजू का। उनकेऔरऔर भी

एक बात हमें अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि न तो अपने यहां देखभाल करनेवाला समाज है और न ही सरकार। हर कोई स्वार्थ का पुतला है। सरकार भी चंद निहित स्वार्थों की सेवा में लगी है। सबका साथ, सबका विकास महज अवाम को झांसा देने का नारा है। सबका विश्वास भी चरका पढ़ाकर हासिल किया जाता है। हमें अपना हित खुद समझना और हासिल करना है। शेयर बाज़ार पर भी यह बात पूरी तरह लागू होतीऔरऔर भी

हिसाब बड़ा साफ है। अगर आप नौकरी से महीने में एक लाख रुपए की सैलरी हासिल कर रहे हैं तो शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग या किसी अन्य बिजनेस से एक लाख कमाते हैं तब असल में माना जाएगा कि आपके उद्यम का तुलनात्मक ‘आर्थिक मूल्य’ शून्य हुआ, यानी आप पहले जैसी ही स्थिति में बने हुए हैं। अगर ट्रेडिंग से आप महीने में 40-50 हज़ार रुपए कमा लेते हैं (जो बुरी कमाई नहीं है), तब आप प्रतिमाहऔरऔर भी

शेयर बाज़ार में सुरक्षित ट्रेडिंग के लिए मूलभूत शर्ते हैं – कम से कम 50 लाख की ट्रेडिंग पूंजी, घर-परिवार के लिए नियमित गुजारे के लिए 2.50 करोड़ रुपए की एफडी जैसे माध्यम, कम से कम दो साल के घर-खर्च का अलग इंतज़ाम। इन सभी शर्तों का पूरा करने से भी ट्रेडिंग में सफलता सुनिश्चित नहीं होती। इसे सुनिश्चित कर सकता है केवल और केवल आपका गहन अभ्यास। इसके बाद का रास्ता भी कतई आसान नहीं है।औरऔर भी

शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग एक तरह का खेल है, प्रतिस्पर्धा है। इसमें देश ही नहीं, विदेश तक के लाखों खिलाड़ी सक्रिय हैं। सब एक से बढ़कर खेल। पूंजी से लेकर ज्ञान और हुनर के उस्ताद। ऊपर से सिस्टम की छोटी से छोटी कमज़ोरी से खेलनेवाले खिलाड़ी। बॉक्सिंग सभी कर सकते हैं। मुठ्ठी बांधकर चलाना किसे नहीं आता! लेकिन रिंग में सामनेवाले को नॉक-आउट करने से पहले हज़ारों घंटों के अभ्यास की दरकार होती है। स्टॉक ट्रेडिंग मेंऔरऔर भी

क्रिकेटर आईपीएल के एक सीजन में ही करोड़ों कमा लेते हैं। लेकिन क्या हर कोई कामयाब क्रिकेटर बन सकता है? इसी तरह वित्तीय बाज़ार का सफल ट्रेडर बनना कोई हंसी-ठठ्ठा नहीं है। इसके लिए गहरी व्यावहारिक समझ के साथ-साथ गहन अभ्यास की ज़रूरत पड़ती है। यह सब अनायास चुटकी बजाकर नहीं होता। शेर के जबड़े से मांस का टुकड़ा निकालना आसान नहीं। शेयर बाज़ार में कभी तेज़ी का तूफान चलता है, कभी मंदी का अवसाद होता हैऔरऔर भी

जो काम-धंधा बंद होने या नौकरी छोड़ने से बेरोज़गार हो गए हैं, उनके अलावा भी लाखों बारोज़गार लोग हैं जिन्हें लगता कि वे नौकरी छोड़कर शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग से अच्छा कमा सकते हैं। अभी तो कोविड का दौर चल रहा है। करीब पांच साल पहले एक ऐसे शख्स से मिला था जो आईसीआईसीआई बैंक की नौकरी छोड़कर शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग करने पर आमादा था। उसका साफ कहना था कि वह निफ्टी-50 और बैंक निफ्टी केऔरऔर भी